Saturday, 26 October 2013

लड़के लड़कियों को किस नज़र से देखते हैं

लड़के लड़कियों को किस नज़र से देखते हैं: सेक्स या संजीदा रिश्ता?
लड़के लड़कियों को किस नज़र से देखते हैं: सेक्स या संजीदा रिश्ता?जब लड़के सिर्फ कुछ समय की मस्ती के लिए साथी ढूंढ रहे होते हैं तो वो सिर्फ लड़की के शरीर को देखते हैं - ख़ास तौर से उनके, 'कमर/कुल्हे का हिस्सा'।

वो लड़की के चेहरे पर तभी ध्यान देना शुरू करते हैं जब वो एक स्थायी लम्बे समय के रिश्ते के लिए साथी ढूंढ़ रहे होते हैं। शायद यह इतनी चौकाने वाली बात नहीं है। लेकिन इसके पीछे शायद कुछ विकासमूलक कारण हैं। लड़के लड़की का शरीर देखते हैं उर्वरता (फर्टिलिटी) आंकने के लिए। और चेहरा देखते हैं उनका चरित्र आंकने के लिए। - क्या यह एक अच्छी साथी की साथी बनेगी?

होंग-कोंग में शोधकर्ताओं ने विपरीत लिंग कामी लोगों के साथ तीन परीक्षण करे और तीनो का नतीजा एक जैसा निकला। चाइना में 111 महिला और पुरुषों को बोला गया की वो अपने आप को विपरीत सेक्स के व्यक्ति के साथ रिश्ते में कल्पना करें।

प्रेम प्रसंग या वचन बद्धता

पहले समूह को कल्पना करना था की वो मुख्या किरदार निभा रहे है 'मैं-अपनी-बाकी-की-ज़िन्दगी-बिताना चाहता-हूँ' कहानी में। उन्हें एक मदभरी शाम के बारे में सोचना था किसी लड़के या लड़की के साथ, डिनर करते हुए और भविष्य में घर और बच्चों की बातें करते हुए। शाम के ख़त्म होने पर वो एक द्दोसरे को चुम्बन देते हैं और अपने अपने घर जाते हैं।

दुसरे समूह को कल्पना करनी थी की वो समुद्री यात्रा पे है एक जहाज़ पर। वहां वो किसी आकर्षक व्यक्ति से मिलते हैं, थोडा फ्लर्ट करते हैं, साथ में एक रात भी गुज़रते हैं और फिर एक दुसरे से कभी नहीं मिलते।

सभी सहभागियों को फिर विपरीत लिंग के लोगों की तसवीरें दिखाई गयी, और शोधकर्ताओं ने मापा की उनकी आँखें कहाँ पर टिकी थी. इस परीक्षण पर कुछ ख़ास असर नहीं हुआ. क्यूंकि वो लडको के चेहरे और शरीर पर भी उतना ही ध्यान दे रहे थे.

कुल्हे या चेहरा

हालाँकि लड़कों के साथ एक स्थायी चीज़ देखने को मिली। जिन लड़कों को बोला गया था की सिर्फ एक रात साथ होने की कल्पना करें, उनकी नज़रें तस्वीरों में लड़कियों के कुल्हे और कमर पर टिकी थी। और जिन लड़कों को स्थायी लम्बे समय के रिश्ते की कल्पना करने के लिए कहा गया था उन्होंने लड़कियों के चेहरे पर आँखें टिकाई।

यह हो सकता है की महिलाएं अधिकतर एक ही जैसी चीज़ करती हैं, हाँ लेकिन यह इस पर निर्भर करता है की वो अपने माहवारी के किस पड़ाव में हैं, ऐसा शोधकर्ताओं का मानना है। लेकिन, फिलहाल के लिए उन्होंने इस परीक्षण में महिलाओं को शामिल नहीं किया और सिर्फ लड़कों के साथ ही परीक्षण किया।

अंतर पहचाने

दुसरे परीक्षण में, 116 पुरुषों को फिर से इन्ही स्थितियों की कल्पना करने को कहा गया। फिर उन्हें उसी लड़की की दो तसवीरें भी दिखाई गयी। दोनों ही तस्वीरों में, उस लड़की की कमर पर और चेहरे के पास अलग अलग आभूषण थे।

परीक्षण सहभागियों को पता लगाना था की दोनों तस्वीरों में क्या-क्या भिन्नता है। पहले परीक्षण की तरह, जिन पुरुषों को लड़की के साथ एक रात बिताने की कल्पना करने के लिए कहा गया था, उन्होंने कमर के अभुषाओं का फर्क चेरे के फर्क से पहले बता दिया। और जिन पुरुषों को लम्बे समय के स्थायी रिश्ते के बारे में कल्पना करने को कहा था, उन्होंने चेहरे के आस पास का फरक जल्दी बता दिया।

विचलित

दुसरे परीक्षण में, पुरुषों को 'O ' और 'Q ' शब्दों में फर्क बताने को कहा गया, और साथ में राखी गयी आकर्षक कमर और चेहरे वाली लड़की की तस्वीर।
जिन लड़कों को 'एक रात का रिश्ता' की कल्पना करने को कहा गया था उनको कमर के आस पास की जगह में फर्क बताने में बहुत समय लगा। लेकिन लम्बे समय के रिश्ते की कल्पना करने वाले लड़कों ने लड़की के चेहरे पर ज़्यादा ध्यान दिया।

बच्चे पैदा करना...

इन सब बातों से यह साफ़ ज़ाहिर होता है की लड़कों को जल्दी होती है सेक्स करने की, और वो बिना ज़्यादा समय गवाए, सीधे लड़की के कामुक अंगों पर ध्यान देते हैं। वो असल में, लड़की की उर्वरता को आंकने में लगे रहते हैं, ऐसा शोधकर्ताओं का कहना है।

लड़की के कमर और कुल्हे के हिस्सा का माप सबसे बढ़िया तरीका है पुरुषों के लिए महिला की उर्वरता आंकने का। पतली कमर और आकर्षक कूल्हों के साथ, महिला शायद सही उम्र में है गर्भवती होने के लिए। या सेक्स करने की योजना के हिसाब से, पुरुष सिर्फ झटपट सेक्स करने को आतुर है।

...या, बच्चों को बड़ा करना

लेकिन जब पुरुष लम्बे समय के स्थायी रिश्ते के बारे में सोच रहे होते है, तो वो महिला के चेहरे पर ध्यान देते हैं। शायद उसके चरित्र को आंकने के लिए - ईमानदार या कपटी, कम बोलने वाली या लड़का, सेक्स को लेकर संकोची या खुले विचार वाली।

इधर पुरुष सिर्फ यह आंकने की कोशिश नहीं कर रहे की वो गर्भवती हो सकती है या नहीं, लेकिन यह भी की वो शादी शुदा ज़िन्दगी में कितना ढल पायेगी और बच्चों को कैसे बड़ा करेगी।

Saturday, 19 October 2013

यौन शिक्षा (Sex education) एक विस्तृत संकल्पना है-------

यौन शिक्षा (Sex education) एक विस्तृत संकल्पना है-------
यौन शिक्षा (Sex education) एक विस्तृत संकल्पना है जो मानव यौन अंगों , जनन, संभोग या रति क्रिया , यौनिक स्वास्थ्य, जनन-सम्बन्धी अधिकारों एवं यौन-आचरण सम्बन्धी शिक्षा से सम्बन्धित है। माता-पिता एवं अभिभावक, मित्र-मण्डली, विद्यालयी पाठ्यक्रम, सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता के कार्यक्रम आदि यौन शिक्षा के प्रमुख साधन हैं।हमें युवाओं पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकताओ क्यों होती है? क्या शादी के समय जनन स्वास्थ्य प्रारम्भ नहीं होता? भविष्य में भारत की जनसंख्या की वृद्धि किस प्रकार होगी, यह बात 15-24 वर्ष की आयु वर्ग वाले लोगों सहित 1890 लाख लोगों पर निर्भर करती है। शिक्षा और रोजगार के अवसरों के अलावा, यौन जनन स्वास्थ्य के संबंध में सूचना और मार्गदर्शन देने के लिए उनकी आवश्यकताओं को पूरा करना, जनसंख्या और विकास कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण पहलू है। किशोर यौन और जनन स्वास्थ्य कार्यक्रम उन्हें उत्तरदायी और ज्ञात निर्णय लेने योग्य बनाते हैं।
यह विशेषतः उन युवा महिलाओं के मामले में अधिक महत्वपूर्ण है जिन्हें ऐसे अधिकार दिए जाने चाहिए जिससे वे अपने यौन और जनन जीवन पर नियंत्रण रखने, अवपीड़न, पक्षपात और हिंसा से मुक्त रहने के अपने अधिकार का प्रयोग कर सकें। कामुकता के बारे में, यौन संबंध के बारे में और अवांछित गर्भधारण करने से बचने और यौन संचारित रोगों के बारे मे बेहतर सूचना प्राप्त होने से युवा लोगों के जीवन स्तर मेंसुधार आएगा। किशोर लड़कियों और लड़कों पर ध्यान केन्द्रित करने के महत्व के समर्थन में निम्नलिखित तथ्य दिए जाते हैः
1. भारत में 15-19 वर्ष की आयु वर्ग वाली लड़कियों में स लगभग 25 प्रतिशत लड़कियां 19 वर्ष की आयु होने से पहले बच्चे को जन्म दे देती हैं।
2. 18 वर्ष की आयु होने से पहले ही गर्भधारण करने से स्वास्थ्य के लिए बहुत से जोखिम पैदा हो जाते हैं। 20-24 वर्ष की आयु वाली महिलाओं की अपेक्षा कम उम्र वाली लड़कियों की गर्भावस्था या प्रसव के दौरान मृत्यु होने की बहुत संभावना होती है।
3. तरुण माताओं के अधिक बच्चे होते हैं क्योंकि वे गर्भनिरोधकों का प्रयोग नहीं करना चाहती।
4. अन्तर्राष्ट्रीय योजनाबद्ध पितृत्व संघ के अनुसार भारत मे होने वाले गर्भपातों में से 14 प्रतिशत तरूण महिलाएं कराती हैं।
5. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूं. एन. एफ. पी. ए.) के अनुसार यदि पहले बच्चे के जन्म के लिए मां की आयु 18 वर्ष से 23 वर्ष तक कर दी जाए तो इससे जनसंख्या संवेग में 40 प्रतिशत से अधिक गिरावट आसकती है।
6. एच. आई. वी./एड्स पर संयुक्त राष्ट्र के संयुक्त कार्यक्रम के अनुसार भारत में एच. आई. वी. संक्रमण से पीड़ित लोगों में से लगभग आधे लोग 25 वर्ष से कम आयु वाले हैं।
क्या किशोर - किशोरियों को यौन शिक्षा देने से स्वच्छन्द संभोग को बढ़ावा मिलता है?
नही, इस प्रचलित विश्वास के विपरीत यौन शिक्षा स्वच्छन्द संभोग को बढ़ावा नहीं देती वस्तुतः ऐसे कार्यक्रम असुरक्षित यौन संबंध से जुड़ी चिंताओं को दूर करते हैं और सुरक्षित यौन संबंधों को प्रोत्साहि करते हैं। यौन शिक्षा कार्यक्रमों पर लिखे गए 1050 वैज्ञानिक लेखों का विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा की गई समीक्षा में अनुसंधान कर्ताओं ने यह देखा कि "इस विवाद का कहीं कोई समर्थन नहीं किया गया कि यौन शिक्षा से यौन अनुभव प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है या क्रियाकलापों में वृद्धि होती है। यदि कोई प्रभाव नजर आता है तो वह अपवाद से रहित है क्योंकि यह मैथुन स्थगित करने और/या गर्भनिरोध का प्रभावी प्रयोग करने की दिशा में है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि उचित और समय पर सूचना उपलब्ध कराने में असफल रहना- "अनैच्छिक गर्भ के अवाछित परिणामों और यौन संचारित रोगों के संचारण को कम करने के अवसर समाप्त कराना है, और इसलिए इससे हमारे युवाओं को हानि होती है"।
किशोर जनन और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में माता-पिता और समाज को विश्वास में लेना चाहिए ताकि एक ऐसा वातावरण तैयार किया जा सके जिससे किशोर अपने विकल्पों का प्रयोग कर सकें। एक ऐसी समाकलित पहुंच के अभाव में इस गतत भय के आधार पर कार्यक्रम का विरोध किया जा रहा है इससे स्वच्छन्द संभोग को बढ़ावा मिलेगा। लड़के और लड़कियों दोनों को एक साथ लेकर कार्य करने की आवश्यकता है ताकि वे लड़के-लड़कियां यौन और जननप्रक्रियाओं के महत्व को न समझ सकें। यह यौन अधिकारों की उचित जानकारी देता है और उनका उचित उपयोग करना भी बताता है।
अधिक उम्र में शादी करने से जनसंख्या स्थिरीकरण पर किस प्रकार से प्रभाव पड़ता है?
शादी, भारतवर्ष मेंलगभग सार्वभौमिक है। शादी के समय की आयु का सीधा संबंध महिलाओं को उपलब्ध शिक्षा और रोजगार के अवसरों से होता है। अशिक्षित और/या बोरोजगार महिलाओं की अपेक्षा बेहतर शिक्षा प्राप्त रोजगार में नियुक्त महिलाएं देर से शादी करती हैं। शादी के समय न्यूनतम आयु 1960 के दशक में 17 वर्ष थी। जो 1990 के दशक में बढ़ाकर 20 वर्ष कर दी गई है। फिर भी, लगभग 43 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु होने से पहले ही कर दी जाती है जो कि महिलाओं के लिए भारत में शादी की वैध आयु है। कम आयु में शादी करने के अन्य कारणों में से एक कारण यह भी है कि लड़की अपना कौमार्य नष्ट कर सकती है जिसके संरक्षण के लिए परिवार को उत्तरदायी माना जाता है और शादी करके इस उत्तरदायित्व का निर्वाह कर दिया गया है, ऐसा माना जाता है।
प्रायः जल्दी शादी होने से गर्भ भी जल्दी रह जाता है, जैसा कि अधिकांश महिलाएं शादी के बाद शीघ्र ही गर्भवती हो जाती हैं क्योंकि उन्हें गर्भनिरोधक सेवाओं की जानकारी और पहुंच का अभाव होता है तथा शादी के प्रथम वर्ष के भीतर ही एक उत्तराधिकारी देने के लिए उन पर परिवार का दबाव होता है। दूसरी तरफ, बच्चा पैदा करके अपना "पौरूष" सिद्ध करने की इच्छा शादी के तुरंत बाद गर्भनिरोधक विधियों का प्रयोग करने से रोकती है। बच्चे को जन्म देना शादी की सुरक्षा के रूप मे देखा जाता है क्योंकि जब उसकी पत्नी उसके बच्चे की मां होती है तब अपनी पत्नी का उत्तरदायित्व संभालने का भार उस पर और बढ़ जाता है। जब किसी महिला के बच्चे पैदा नहीं होते तो पति-पत्नी के संबंधों का विच्छेद होना और पत्नी को छोड़ देने के मामले बहुत ही सामान्य हो गए हैं। किशोर अवस्था में शादी के तुरंत बाद या अन्यथा गर्भ रह जाने से तो मां और बच्चे के स्वास्थ्य और जीवन के लिए खतरा बढ़ जाता है। बच्चों की मृत्यु हो जाने पर दंपत्ती और बच्चे पैदा करना चाहते हैं। इस वृहत स्तर पर जल्दी शादी करने और जल्दी बच्चा पैदा करने के परिणाम स्वरूप पीढियां तेजी से बदलती हैं, जनसंख्या स्थिरीकरण में बाधा उत्पन्न होती है, चाहे दंपत्ती एक या दो बच्चे पैदा ही क्यों न करें।
गर्भ निरोध क्या है?
विभिन्न साधनों में से किसी भी एक साधन के जरिए गर्भधारण करने को जानबूझ कर रोकना ही गर्भनिरोध कहलाता है। सामान्यतः जन्म-नियंत्रण या गर्भनिरोध वह है जो किसी महिला को गर्भवती होने से रोकता है। गर्भनिरोध का सबसे स्वरूप संयम बरतना है। तथापि, कामवासना से अलग रहने से ही स्वाभाविक मानवीय काम प्रेरणा पर विजय प्राप्त की जा सकती है। चिकित्सा पद्धति के अनुसार विभिन्न साधनों के जरिए गर्भ निरोध किया जा सकता है जो अस्थायी या स्थायी हो सकता है ताकि जो लोग संयम नहीं बरत सकते वे गर्भधारण करने पर नियंत्रण पा सकते हैं।कितने और कितने अंतराल पर बच्चे पैदा हो यह स्वतंत्र और विश्वसनीय रूप से निश्चित करने तथा ऐसा करने से संबंधित सूचना शिक्षा और साधनों की जानकारी प्राप्त करने के अधिकार को जनन अधिकार का महत्वपूर्ण घटक माना जाता है गर्भनिरोधकों से पुरूष और महिलाएं इन अधिकारों का प्रयोग कर सकती हैं।
भारत वर्ष में "मिश्रित विधि" के गर्भनिरोधक प्रयोग की पद्धति क्या है?
आधुनिक चिकित्सा शास्त्र ने हमारे समक्ष गर्भनिरोधक के कई विकल्प प्रस्तुत किए हैं। गर्भ रोकने के विभिन्न विधियों के प्रयोगों की वितरण पद्धति को "मिश्रित विध" कहा जाता है भारत एक मात्र ऐसा देश है जहां महिलाओं का बन्ध्यीकरण नलबन्दी करना एक प्रमुख विधि मानी जाती है जिसे अधिकांश दंपती अपने परिवार का वांछित आकार रखने के लिए इस विधि को पसंद कर रहे हैं तथा स्थायी विधि के रूप में इसे अपना रहे हैं।
हम अपने जनसंचार अभियानों के बावजूद भी लोगों के गर्भनिरोधक व्यवहार में परिवर्तन लाने में सफल क्यों नहीं हुए?
जनसंचार अभियान उत्पाद दिखाने, सूचना देने, रूचि पैदा करने और जनता की राय को प्रभावित करने का सामर्थ्य रखते हैं। वे लोगों को दुकान तक ले जा सकते हैं लेकिन वे उत्पाद खरीदने के लिए उन्हें मजबूर नहीं कर सकते। उत्पाद की अन्तर्निहित गुणवत्ता, विक्रयकला, उत्पाद प्रयोग करने के लिए प्रलोभन और विक्रय के बाद सेवाएं उपलब्ध कराना आदि ऐसे तत्व हैं जो अन्ततः उत्पाद खरीदने और सफलतापूर्वक उनका प्रयोग करने के निर्णय को प्रभावित करते हैं।
प्रायः जब गर्भनिरोधक के प्रयोग करने की बाद आती है तो इन मूलभूत तत्वों की उपेक्षा कर दी जाती है तथा उच्च स्तर के संचार कौशल की मांग की जाती है क्योंकि इस स्तर पर व्यक्तिगत रूप से संपर्क रखा जाता है और विकल्पों के बारे में सूचना उपलब्ध कराई जाती है। 1960 और 1970 के दशक के अत्यंत सफल जन संचार अभियानों ने गर्भनिरोधक के बारे प्राप्त विश्व का ज्ञान भारत में उपलब्ध कराया। तथापि, वे अभियान उस सूचना को कार्यरूप में बदलने में असफल रहे क्योंकि सेवाएं उपलब्ध कराने में स्वास्थ्य प्रणाली लड़खड़ा गई। परिवर्तन प्रक्रिया के भिन्न-2 चरणों में लोग भिन्न-2 प्रकार के संचार की मांग करते हैं। परिवर्तन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों (समझना, प्रयोग करना, अपनाना और समर्थन करना) में परामर्श देने, सेवा उपलब्ध कराने अनुवर्ती सेवा और अवसर सृजित करने की मांग की जाती है ताकि इन विधियों को अपनाया जा सके। ऐसी क्रमबद्ध संचार नीति को व्यवहार परिवर्तन संचार भी कहा जाता है जो एक दशक पूर्व तक उपलब्ध नहीं थी या प्रचालन में नहीं था।
भारत में अंतराल-विधि का प्रयोग इतना मंद क्यों हैं? अंतराल विधि के कम (मंद) प्रचलन के निम्नलिखित कारण हैं-
1. इन विधियों की जानकारी का अभाव/उन तक पहुंच का अभाव।
2. परामर्श देने और अनुवर्ती सेवाओं का स्तर बेहतर न होना।
3. महिला के स्वास्थ्य की स्थिति अच्छी न होने जैसे कि अरक्तता, जननली में संक्रमण और यौन संचारित बीमारियों के होने के कारण उत्पन्न जटिलताओं से संबंधित विधि का प्रभाव।
4. मां और बच्चे के स्वास्थ्य के साथ गर्भनिरोधक सेवाओं का सामंजस्य स्थापित करने के कारण कण्डोम का प्रयोग करना कठिन हो जाता है क्योंकि इस कार्य में पुरूष को शामिल किया जाना अपेक्षित है। तथापि, एच.आई. वी/एड्स के खतरे को देखते हुए दोहरी संरक्षण विधि के रूप में कण्डोम के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
5. दंपत्ती थोड़े समय में ही वांछित बच्चे पैदा करके नसबंदी/नलबंदी करा लेते हैं, जिससे अंतराल विधि की उनकी आवश्यकता कम हो जाती है।
6. परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत बन्ध्यीकरण पर अधिक ध्यान केन्द्रित करने से अंतराल विधियों को अपनाने के अवसर कम हो जाते हैं।
7. प्रतिवर्ती विधियों का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित विशेषतः उव युवतियों (15-30 वर्ष) को प्रोत्साहित करने में भारत का परिवार नियोजनः कार्यक्रम पूर्णतः असफल हो चुका है जो अपनी जनन अवधि के दौरान उन वर्षों में सबसे अधिक जननक्षमतारखती है। आज छोट परिवार के बारे में संचार अभियान चलाना आसान हो चुका है, बन्ध्यीकरण को अधिक वरीयता दिए जाने के कारण दो बच्चों के बीच पर्याप्त अंतर रखने की विधि सफल नहीं हुई।
जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए बच्चों के जन्म के बीच पर्याप्त अंतर रखना महत्वपूर्ण क्यों है?
बच्चे कितने हैं, इस तथ्य को ध्यान में रखे बिना, बच्चों के जन्म में अंतराल रखने का जनसंख्या स्थिरीकरण पर स्वतंत्र प्रभाव पड़ता है। दो क्रमिक गर्भों के बीच अंतराल या अंतर जनसंख्या वृद्धि के संवेग को कम करने में स्वभावतः सहायता करेगा क्योंकि जो बच्चे देर से पैदा होते हैं वे जनन स्तर पर भी देर से पहुंचते हैं।
अंतराल से मां और बच्चे का स्वस्थ रहना सुनिश्चित है जिससे बच्चे के जीवित रहने के अवसर बढ़ जाते हैं और इस प्रकार बड़े परिवार की इच्छा समाप्त हो जाती है। दो गर्भों के बीच अंतराल रखना केवल जन्म को कम करने के लिए महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि जनसंख्या के जीवन को सुधारने के लिए भी महत्वपूर्ण है। पर्याप्त अंतराल रखने और कम बच्चों को जन्म देने से केवल मां और बच्चे का स्वास्थ्य ही बेहतर नहीं होता बल्कि पुरूषों और महिलाओं को उपलब्ध विकास के अवसरों में भी सुधार होता है चाहे वे अवसर शिक्षा, रोजगार या सामाजिक सांस्कृति सहभागिता से संबंधित हो। इनसे वांछित जनन क्षमता अर्थात बच्चों की उस संख्या में कमी आ जाती है जो एक दंपत्ती अपने परिवार में रखना चाहते हैं। अतः परिवार नियोजन की अस्थायी विधियों के माध्यम से दो गर्भों के बीच पर्याप्त अंतराल रखने को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों और कार्यक्रमों को विस्तृत रूप से प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है।
अंतराल विधियों को किस प्रकार से प्रोत्साहित किया जा सकता है?
अंतराल विधियों के प्रयोग को बढ़ावा देने की कुंजी एक तरफ तो संचार साधनों को बढ़ाना है और दूसरी तरफ दक्ष सेवाएं उपलब्ध कराना है। संचार के महत्व का पता इस तथ्य से लगता है कि विवाहित महिलाओं में से 99 प्रतिशत महिलाएं कम से कम एक आधुनिक गर्भनिरोधक विधि से परिचित हैं। तथापि, सभी विधियों को जानकर जो कि ज्ञात विकल्प के लिए पूर्वापेक्षित हैं, केवल 58 प्रतिशत महिलाओं को है और केवल 42 प्रतिशत किसी एक आधुनिक विधि का प्रयोग करती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि परामर्श देने और व्यक्तिगत रूप से सूचना देने के कार्य को स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा अपनी सेवा का अनिवार्य भाग के रूप में नहीं माना जाता जबकि ऐसा करना ज्ञात विकल्प के लिए अत्यंत अनिवार्य है।
संचार व्यवस्था और परामर्श सेवाएं उन मनगढंत कथाओं और गलत अवधारणाओं पर प्रकाश डालने के लिए अनिवार्य हैं जो विधि से संबंधित समस्याओं को और गहरा बना देती है जिनके कारण लोग गर्भनिरोधक का प्रयोग करना अनिवार्यतः बंद कर देते हैं। महिलाओं का अधिक सम्मान किए जाने और उन्हें विभिन्न विधियों तथा संबंधित पार्श्वप्रभावों के बारे में बता कर सशक्त बनाए जाने के आवश्यकता है ताकि ज्ञात विकल्प का चयन कर सके। अनुवर्ती देखरेख, विशेषतः जटिलताओं से संबंधित विधि के मामले में भी निर्णायक है। इसके साथ- साथ, अच्छी गुणवत्ता वाले गर्भनिरोधकों की उपलब्धता में सुधार लाना भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके अभाव में कोई संचार संबंधी प्रयास सफल नहीं हो सकते। विभिन्न कार्यक्रमोम के अंतर्गत स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं समुदाय आधारित सेवा प्रबंधकों के माध्यम से सामाजिक फ्रेचाइज और कार्पोरेट के माध्यम से सामाजिक विपणन का देश में परीक्षण किया जा रहा है।
कुछ दंपत्ती पुरूष बन्ध्यीकरण का विकल्प क्यों चुनते हैं?
काफी समय से भारत में जनसंख्या कार्यक्रम महिला केन्द्रित हो चुका है। अब वे दिन विदा हो चुके हैं जब नसबंदी या पुरूष बन्ध्यीकरण को एक विधि माना जाता था। गर्भनिरोध की स्थायी विधि अपनाने का विकल्प चुनने वाले दंपत्तियों में से 67.3 प्रतिशत ने 1963 में नसबंदी कराने का विकल्प चुना। यह विकल्प 1976 - 1977 के दौरान 77 प्रतिशत तक पहुंच गया लेकिन इसमें बहुत तेजी से गिरावट आई और 1980 - 1981 में 21.4 प्रतिशत, 1990 - 1991 में 6.2 प्रतिशत और 2000 - 01 में 2.3 प्रतिशत लोगों नें ही नसबंदी कराई। इस गिरावट का प्रत्यक्ष कारण ज्यादतियों का होना था, जबकि लक्ष्य पूरा करने के लिए बिना सोचे समझे जबरदस्ती नसबंदी कराई गई। महिला बन्ध्यीकरण में लोपरोस्कोपिक तकनीकों के विकास एवं प्रोत्साहन ने इसे महिलाओं के लिए बहुत आसान बना दिया है। यद्यपि नसबंदी भी समान रूप से आसान है परन्तु फिर भी विभिन्न मनगढंत कथाओं और गलत धारणाओं के कारण इस विधि को वरीयता नहीं दी जा रही है। कामवासना और ताकत समाप्त हो जाने का भय, नसबन्दी का सफल न होना और जन्म पर नियंत्रण करना महिलाओं का उत्तरदायित्व मानना। इस प्रवृति के कारण इस विधि को बहुत कम लोगों द्वारा स्वीकार किया गया है। पुरूष बन्ध्यीकरण सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के स्तर पर एवं नियमित आधार पर अपलब्ध करा कर तथा उन तक पहुंचाने के साधनों में वृद्धि करने के अलावा, जन संचार अभियानों के जरिए क्षेत्रीय स्तर पर और वृहत स्तर पर कार्यक्रम को एक सुदृढ़ संचार सहायता की आवश्यकता है।
यदि लोग अन्य विधियों की अपेक्षा किसी विधि विशेष को पसंद करते हैं तो उस विधि को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित करने में क्या दोष है?
दंपत्तियों की गर्भनिरोधक आवश्यकताएं, उनकेजीवन की स्थिति पर निर्भर भिन्न-भिन्न होती हैं। उदाहरणार्थ- नव विवाहित दंपत्ति को अंतराल विधि की आवश्यकता हो सकती है। जबकि अपे परिवार का आकार पूरा कर चुके दंपत्ति को स्थायी विधि अपनाने की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार स्तनपान कराने वाली मां की आवश्यकताएं उस महिला से भिन्न होंगी जो कभी-कभी संभोग करती हैं। तार्किक दृष्टि से किसी भी विधि विशेष को बड़े स्तर पर अपनाना लोगों के लिए संभव नहीं है। आदर्शतः विभिन्न आयु वर्ग की और भिन्न पारिवारिक परिस्थितियों वाली महिलाओं और पुरूषों को उपलब्ध विभिन्न प्रकार की विधियों में किसी भी विधि को चुनने और उसे अपनाने का विकल्प प्राप्त होना चाहिए। किन्तु यदि सब विधियों में से किसी एक विधि को वरीयता दी जाती है तो यह अन्य विधियों के बारे अपर्याप्त सूचना और जानकारी होने, सेवा केन्द्रों तक सीमित पहुंच, लागत घटक या मनगढंत बातों और गलत धारणाओं के कारण होता है।
प्रायः यह कार्यक्रम के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संबंधित सेवा प्रबंधकों द्वारा किसी विधि विशेष को अत्यधिक प्रोत्साहन दिए जाने को भी दर्शाता है। जहां तक बन्ध्यीकरण का मामला है, यह अटल है, इसमें अनुवर्ती सेवा की सीमित आवश्यकता होती है और इसलिए अन्य विधियों की अपेक्षा बन्ध्यीकरण को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जाता है। इसका अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि बन्ध्यीकरण को लोग स्वतः ही अपना रहे हैं और सब विधियों से इसे अधिक वरीयता दे रहे हैं। किसी एक या कुछ विधियों को ही प्रोत्साहन दिए जाने से जीवन की कतिपय परिस्थितियों में केवल महिलाओं के लिए ही गर्भनिरोधक विकल्प सीमित हो जाते हैं। इस प्रकार भारत में महिला बन्ध्यीकरण पर बल दिया जाने का आशय है कि जो महिलाएं अपने परिवार का वांछित आकार पूरा कर चुकी हैं केवल वही महिलाएं गर्भ निरोध के साधनों का प्रयोग करने के लिए योग्य है। जननक्षमता दरों में निरंतर गिरावट आऩे के कारण यह अनिवार्य है कि हमें अत्यधिक संतुलित "मिश्रित विधि" का प्रयोग करना चाहिए।
इंजेक्शन द्वारा दिए जाने योग्य गर्भनिरोधकों के चलन का भारत में कुछ लोग विरोध क्यों करते हैं?
नई गर्भ निरोधक टेक्नोलॉजी जैसे कि इंजेक्शन द्वारा दिए जाने योग्य, और आरोपित किए जाने वाले (इम्प्लान्ट) हार्मोनल आक्रामक प्रवृति के होते हैं, दीर्घकाल तक क्रियाशील रहते हैं और जब विकासशील देशों में उनका उपयोग महिलाओं को लक्ष्य करके किया जाता है। तब इनके दुरूपयोग की अधिक संभावना रहती है। इसके अलावा इंजेक्शन से दिए जाने योग्य गर्भनिरोधकों से स्वास्थ्य के लिए जोखिम होता है जो भारत में कमजोर शरीर महिलाओं द्वारा सुगाता से सहन नहीं किया जा सकता, इस प्रकार, इसका उपयोग तो आसानी से किया जा सकता है परन्तु यह इसके साथ-2 स्वास्थ्य संबंधी नई-2 समस्याओं को जन्म देता है जिससे महिला कहीं की भी नहीं रहती।
अधिकांश भारतीय महिलाओं के स्वास्थ्य की स्थिति और उनकी जानकारी का स्तर अच्छा नहीं होता तथा इन पर आक्रामक टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाता है तब उसके परिणाम खतरनाक हो सकते हैं। इस टेक्नोलॉजी के प्रभावी प्रयोग के लिए स्क्रीनिंग और फॉलोअप मूल सिद्धांत है। चूंकि इन दोनों को उस प्रणाली में सुरक्षित नहीं माना जा सकता जिस पर अवसंरचना और मानव संसाधनों के लिए अधिक दबाव डाला जाता है। बहुत से लोग यह तर्क देते हैं कि ऐसी विधियों को चलन से दिए जाने योग्य गर्भनिरोधक भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के स्वास्थ्य कार्यक्रम और परिवार कल्याण कार्यक्रम के भाग नहीं है परन्तु बाजार में उपलब्ध है। यौन और जनन स्वास्थ्य पर प्राय पूछे जाने वाले प्रश्नःअध्याय पढ़ने के बाद आप निम्नलिखित विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगेः1). औरतों और पुरूषों में जनन तंत्र 2). यौवनारम्भ 3). औरतों में जनन स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं 4). स्तनपरक समस्याएं 5). मर्दों में जनन तंत्र के स्वास्थ्य की समस्याएं 6). यौन सम्भोग से संक्रमित इन्फैक्शन- एचआईवी/एड्स सहित 7). गर्भ निरोधक . गर्भ धारण 9). अनुर्वरकता 10). यौनपरक स्वास्थ्य 11). गर्भपात 12). रजो निवृति 
औरतों और पुरूषों में जनन तंत्र
• 1. औरतों का जनन तंत्र कैसा होता है?
औरतों के जनन तंत्र में बाहरी (जननेन्द्रिय) और आन्तरिक ढाँचा होता है। बाहरी ढॉचे में मूत्राषय (वल्वा) और यौनि होती है। आन्तरिक ढांचे में गर्भाषय, अण्डाषय और ग्रीवा होती है। 
• 2. बाहरी ढांचे के क्या मुख्य लक्षण होते हैं?
बाहरी ढांचे में मूत्राषय (वल्वा) और योनि है। मूत्राषय (वल्वा) बाहर से दिखाई देने वाला अंश है जबकि योनि एक मांसल नली है जो कि गर्भाषय और ग्रीवा को शरीर के बाहरी भाग से जोड़ती है। ओनि से ही मासिक धर्म का सक्त स्राव होता है और यौनपरक सम्भोग के काम आती है, जिससे बच्चे का जन्म होता है।
• 3 आन्तरिक ढांचे के क्या मुख्य लक्षण हैं?
आन्तरिक ढांचे में गर्भाषय, अण्डाषय और ग्रीवा है। गर्भाषय जिसे सामान्यत% कोख भी कहा जाता है, उदर के निचले भाग में स्थित खोखला मांसल अवयव है। गर्भाषय का मुख्य कार्य जन्म से पूर्व बढ़ते बच्चे का पोषण करना है। ग्रीवा गर्भाषय का निचला किनारा है। योनि के ऊपर स्थित है और लगभग एक इंच लम्बी है। ग्रीवा से रजोधर्म का रक्तस्राव होता है और जन्म के समय बच्चे के बाहर आने का यह मार्ग है। यह वीर्य के लिए योनि से अण्डाषय की ओर ऊपर जाने का रास्ता भी है। अण्डाषय वह अवयव है जिस में अण्डा उत्पन्न होता है, यह गर्भाषय की नली (जिन्हें अण्वाही नली भी कहते हैं) के अन्त में स्थित रहता है।
• 4 पुरूषों का जनन तंत्र कैसा होता है?
पुरूषों के जनन तंत्र में बाहर दिखाई देने वाला ढांचा होता है जिसमें लिंग और पुरूषों के अण्डकोष हैं। आन्तरिक ढांचे में अण्डग्रन्थि, शुक्रवाहिका, प्रास्टेट, एपिडिडाईमस और शुक्राषय होता है।
• 5 बाहरी ढांचे के मुख्य लक्षण क्या हैं?
लिंग मर्दाना अवयव है जिसका उपयोग मूत्रत्याग एवं यौनपरक सम्भोग के लिए किया जाता है यह लचीले टिशू और रक्तवाहिकाओं से बना है। अण्डकोष में लिंग दोनों ओर स्थित बाहरी थैलियों की जोड़ी होती है जिसमें अण्डग्रन्थि होती है।
• 6 आन्तरिक ढांचे के मुख्य लक्षण क्या हैं?
आन्तरिक ढांचे में अण्डग्रन्थि, शुक्रवाहिका, एपिडिडाईमस और शुक्राषय होता है। अण्डग्रन्थि अण्डाषय में स्थित अण्डाकार आकृति के दो मर्दाना जननपरक अवयव है। इनसे वीर्य और टैस्टोस्ट्रोन नामक हॉरमोन उत्पन्न होते हैं। पूर्ण परिपक्वता प्राप्त करने तक वीर्य एपिडाइमस में संचित रहता है। शुक्रवाहिका वे नलियां हैं जो कि वीर्य को शुक्राषय तक ले जाती हैं जहां पर लिंग द्वार से बाहर निष्कासित करने से पहले वीर्य को संचित किया जाता है। प्रॉस्टेट पुरूषों की यौन ग्रन्थि होती है। यह लगभग एक अखरोट के माप का होता है जो कि ब्लैडर और युरेषरा के गले को घेरे रहता है- युरेथरा वह नली है जो ब्लैडर से मूत्र ले जाती है। प्रॉस्टेट ग्रन्थि से हल्का सा खारा तरल पदार्थ निकलता है जो कि शुक्रीय तरल का अंश होता है जिस तरल पदार्थ मे वीर्य / शुक्राणु रहता है।
• 1. यौवनारम्भ क्या होता है?
यौवनारम्भ वह समय है जबकि शरीरपरक एवं यौनपरक लक्षण विकसमत हो जाते हैं। हॉरमोन मे बदलाव के कारण ऐसा होता है। ये बदलाव आप को प्रजनन के योग्य बनाते हैं। 
• 2. यौवनासम्भ का समय कौन सा है?
हर किसी में यह अलग समय पर शुरू होता है और अलग अवधि तक रहता है। यह जल्दी से जल्दी 9 वर्ष और अधिक से अधिक 13-14 वर्ष की आयु तक प्रारम्भ हो जाता है। यौवन विकास की यह कड़ी सामान्यतः 2 से 5 वर्ष तक की होती है। कुछ किशोरियों में दूसरी हम उमर लड़कियों में यौवन के शुरू होने से पहले यौवन विकास पूरा भी हो जाता है।
• 3. लड़कों में यौवनारम्भ के क्या लक्षण है?
यौवनारम्भ के समय सामान्यतः लड़के अपने में पहले की अपेक्षा बढ़ने की तीव्रगति को महसूस करते हैं, विशेषकर लम्बाई में। कन्धों की चौड़ाई भी बढ़ जाती है। 'टैस्टोस्ट्रोन' के प्रभाव से उनके शरीस में नई मांसलता और इकहरेपन की आकृति बन जाती है। उनके लिंग में वृद्धि होती है और अण्डकोष की त्वचा लाल-लाल हो जाती है एवं मुड़ जाती है। आवाज गहरी हो जाती है, हालांकि यह प्रक्रिया बहुत धीरे-धीरे होती है फिर भी कोई आवाज फटने जैसा अनुभव कर सकता है। यह स्वाभाविक और प्राकृतिक है, इसमें चिन्ता की कोई बात नहीं होती। लिंग के आसपास बाल, दाड़ी और भुजाओं के नीचे बाल दिखने लगते हैं और बढ़ने लगते हैं। रात्रिकालीन निष्कासन (स्वप्नदोष या ^भीगे सपने') सामान्य बात है। त्वचा तैल प्रधान हो जाती है जिससे मुहासे हो जाते हैं।
• 4. लड़कियों में यौवनारम्भ के क्या लक्षण है?
शरीर की लम्बाई और नितम्बों का आकार बढ़ जाता है। जननेन्द्रिय के आसपास, बाहों के नीचे और स्तनों के आसपास बाल दिखने लगते हैं। शुरू में बाल नरम होते हैं पर बढ़ते- बढ़ते कड़े हो जाते हैं। लड़की का रजोधर्म या माहवारी शुरू हो जाती है जो कि योनि में होने वाला मासिक रक्तस्राव होता है, यह पांच दिन तक चलता है, जनन तंत्रपर हॉरमोन के प्रभाव से ऐसा होता है। त्वचा तैलीय हो जाती है जिससे मुंहासे निकल आते हैं।
• 5. यौवनारम्भ के दौरान स्तनों में क्या बदलाव आता है?
स्तनों का विकास होता है और इस्ट्रोजन नामक स्त्री हॉरमोन के प्रभाव से बढ़ी हुई चर्बी के वहां एकत्रित हो जाने से स्तन बड़े हो जाते हैं।
• 6. यौवनारम्भ के परिणाम स्वरूप औरत के प्रजनन अंगों में क्या बदलाव आता है?
जैसे ही लड़की के शरीर में यौवनारम्भ की प्रक्रिया शुरू होती है, ऐसे विशिष्ट हॉरमोन निकलते हैं जो कि शरीर के अन्दर के जनन अंगों में बदलाव ले आते हैं। योनि पहले की अपेक्षा गहरी हो जाती है और कभी कभी लड़कियों को अपनी जांघिया (पैन्टी) पर कुछ गीला- गीला महसूस हो सकता है जिसे कि यौनिक स्राव कहा जाता है। स्राव का रंग या तो बिना की जरूरत नहीं। गर्भाषय लम्बा हो जाता है और गर्भाषय का अस्तर घना हो जाता है। अण्डकोष बढ़ जाते हैं और उसमें अण्डे के अणु उगने शुरू हो जाते हैं और हर महीने होने वाली 'अण्डोत्सर्ग' की विशेष घटना की तैयारी में विकसित होने लगते हैं।
• 7. अण्डकोत्सर्ग क्या है?
एक अण्डकोष से निकलने वाले अण्डे के अणु को अण्डोत्सर्ग कहते हैं। औरत के माहवारी चक्र के मध्य के आसपास महीने में लगभग एक बार यह घटना घटती है। निकलने के बाद, अण्डा अण्डवाही नली में जाता है और वहां से फिर गर्भाषय तक पहुंचने की चार-पांच दिन तक की यात्रा शुरू करता है। अण्डवाही नली लगभग पांच इंच लम्बी है और बहुत ही तंग है इसलिए यह यात्रा बहुत धीमी होती है। अण्ड का अणु प्रतिदिन लगभग एक इंच आगे बढ़ता है।
• 8. उर्वरण क्या है?
यौन सम्भोग के परिणामस्वरूप जब पिता के वीर्य का अणु मां के अण्ड अणु से जा मिलता है तो उसे उर्वरण कहते हैं। जब वह अण्ड अणु अण्डवाही नली में होता है तभी यह उर्वरण घटित होता है। शिशु के सृजन के लिए अण्डे और वीर्य का मिलना और जुड़ना जरूरी है। जब ऐसा होता है, तब और गर्भवती हो जाती है।
• 9. रजोधर्म/माहवारी क्या है?
10 से 15 साल की आयु की लड़की के अण्डकोष हर महीने एक विकसित अण्डा उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। वह अण्डा अण्डवाही नली (फालैपियन ट्यूव) के द्वारा नीचे जाता है जो कि अण्डकोष को गर्भाषय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाषय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके। यदि उस अण्डे का पुरूष के वीर्य से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है।
• 10. माहवारी चक्र की सामान्य अवधि क्या है?
माहवारी चक्र महीने में एक बार होता है, सामान्यतः 28 से 32 दिनों में एक बार।
• 11. मासिक धर्म/माहवारी की सामान्य कालावधि क्या है?
हालांकि अधिकतर मासिक धर्म का समय तीन से पांच दिन रहता है परन्तु दो से सात दिन तक की अवधि को सामान्य माना जाता है।
• 12. माहवारी मे सफाई कैसै बनाए रखें?
एक बार माहवारी शुरू हो जाने पर, आपको सैनेटरी नैपकीन या रक्त स्राव को सोखने के लिए किसी पैड का उपयोग करना होगा। रूई की परतों से पैड बनाए जाते हैं कुछ में दोनों ओर अलग से (Wings) तने लगे रहते हैं जो कि आपके जांघिये के किनारों पर मुड़कर पैड को उसकी जगह पर बनाए रखते हैं और स्राव को बह जाने से रोकते हैं।
• 13. सैनेटरी पैड किस प्रकार के होते हैं?
भारी हल्की माहवारी के लिए अनेक अलग-अलग मोटाई के पैड होते हैं, रात और दिन के लिए भी अलग- अलग होते हैं। कुछ में दुर्गन्ध नाषक या निर्गन्धीकरण के लिए पदार्थ डाले जाते हैं। सभी में नीचे एक चिपकाने वाली पट्टी लगी रहती है जिससे वह आपके जांघिए से चिपका रहता है।
• 14. पैड का उपयोग कैसे करना चाहिए?
पैड का उपयोग बड़ा सरल है, गोंद को ढकने वाली पट्टी को उतारें, पैड को अपने जांघिए में दोनों जंघाओँ के बीच दबाएं (यदि पैड में विंग्स लगे हैं तो उन्हें पैड पर जंघाओं के नीचे चिपका दें)
• 15. पैड को कितनी जल्दी बदलना चाहिए?
श्रेष्ठ तो यही है कि हर तीन या चार घंटे में पैड बदल लें, भले ही रक्त स्राव अधिक न भी हो, क्योंकि नियमित बदलाव से कीटाणु नहीं पनपते और दुर्गन्ध नही बनती। स्वाभाविक है, कि यदि स्राव भारी है, तो आप को और जल्दी बदलना पड़ेगा, नहीं तो वे जल्दी ही बिखर जाएगा।
• 16. पैड को कैसे फेंकना चाहिए?
पैड को निकालने के बाद, उसे एक पॉलिथिन में कसकर लपेट दें और फिर उसे कूड़े के डिब्बे में डालें। उसे अपने टॉयलेट मे मत डालें - वे बड़े होते है, सीवर की नली को बन्द कर सकते हैं।
• 17. मुंहासे से क्या होता है?
मुंहासे - त्वचा की एक स्थिति है जो सफेद, काले और जलने वाले लाल दाग के रूप मे दिखते हैं। जब त्वचा पर के ये छोटे - छोटे छिद्र बन्द हो जाते हैं तब मुंहासे होते हैं। सामान्यतः हमारी तैलीय ग्रन्थियां त्वचा में चिकनापन बनाए रखती है और त्वचा के पुराने अणुओं को निकालने में मदद देती है। किशोरावस्था में वे ग्रन्थियां बहुत अधिक तेल पैदा करती हैं जिससे कि छिद्र बन्द हो जाते हैं, कीटाणु कचरा और गन्दगी जमा हो जाती है जिससे काले मस्से और मुंहासे पैदा होते हैं।
• 18. मुहांसों के प्रभाव को कैसे कम किया जा सकता है?
मुंहासों के प्रभाव को कम करने के लिए निम्नलिखित स्व- उपचार की प्रक्रिया को अपनाये- (1) हल्के, शुष्कताविहीन साबुन से त्वचा को कोमलता से धोयें (2) सारी गन्दगी अथवा मेकअप को धो दें, ताजे पानी से दिन में एक दो बार धोयें, जिसमें व्यायाम के बाद का धोना भी शामिल है। जो भी हो, त्वाचा को बार-बार धोने या ज्यादा धोने से परहेज करें। (3) बालों को रोज शैम्पू करें, खासतौर पर अगर वे तेलीय हों। कंघी करें या चेहरे से बालों को हटाने के लिए उन्हें पीछे खीचें। बालों को कसने वाले साधनों से परहेज करें। (4) मुंहासों को दबानेर, फोड़ने या रगड़ने से बचने का प्रयास करें। (5) हाथ या अंगुलियों से चेहरो को छूने से परहेज करें। (6) स्नेहयुक्त प्रसाधनों या क्रीमों का परहेज करें। (7) अब भी अगर मुंहासे तंग करें, डाक्टर आपको और अधिक प्रभावशाली दवा दे सकता है या अन्य विकल्पों पर विचार विमर्श कर सकता है।
पुरूषों में जनन स्वास्थ्य की समस्य़ाएं 
• हस्तमैथुन क्या होता है?
यौनपरक संवेदना के लिए जब व्यक्ति स्वयं उत्तेजना जगाता है तब उसे हस्तमैथुन कहा जाता है। हस्तमैथुन शब्द के प्रयोग से सामान्यतः यही समझा जाता है कि वह स्त्री या वह पुरूष जो कामोन्माद की चरमसीमा का तीव्र आनन्द पाने के लिए अपनी जननेन्द्रियों से छेड़छाड़ करता है। चरमसीमा का अभिप्राय उस परम उत्तेजना की स्थिति से है जिसेमें जननेन्द्रिय की मांस पेशयां चरम आनन्द देने वाली अंगलीला की कड़ी में प्रवेश करती हैं। 
• क्या हस्तमैथुन सामान्य बात है?
हां, हस्तमैथुन प्राकृतिक आत्म अन्वेषण की स्वभाविक प्रक्रिया और यौन भावाभिव्यक्ति है।
• क्या यह सत्य है कि हस्तमैथुन 'सही सम्भोग' नहीं है। और केवल असफल लोग हस्तमैथुन करते हैं?
नहीं, यह सत्य नहीं है। कुछ यौन विशेषज्ञों के अनुसार जो लोग हस्थमैथुन करते हैं वे साथी के साथ यौन - सम्भोग करते समय बेहतर कार्य करतें हैं क्योंकि अपने शरीर को जानते हैं और उनकी कामाभिव्यक्ति सन्तुष्ट होती है।
• क्या हस्तमैथुन से विकास रूक जाता है या गंजापन उम्र से पहले आ जाता है।
यह सही नहीं है।
• खड़पान किसे कहते हैं?
खड़ेपन का अभिप्राय लिंग के बढ़ने, सख्त होने और उठने से हैं।
• खड़पन क्यों होता है?
स्वभावतः पुरूषों में लिंग का खड़ा होना जीवनभर चलता रहता है। किशोरावस्था में लड़कों में यह खड़ापन जल्दी होता है। शारीरिक अथवा यौनपरक उत्तेजना से खड़पना हो सकता है और उसके बिना भी हो सकता है। सामान्यतः खड़ापन सपनों से जुड़ा रहता है, किशोरों को एक ही रात में कम से कम दो और अधिक से अधिक छह बार इसकी अनुभूत हो सकती है।
• क्या दिन के समया खड़ापन सामान्य माना जाता है?
हां, पुरूष के शरीर का यह लिल्कुल सामान्य कार्य है, विशेषकर किशोरावस्था से गुजरने वाले लड़कों के लिए। कई बार खड़ापन यौनपरक उत्तेजना से होता है जैसे कि कोई मूवी देखना या यौनपरक कल्पना करने से। कई बार बिना किसी कारण के भी हो सकता है।
• गीले सपने क्या होते हैं?
सोते समय लिंग से वीर्य का अनियन्त्रित रूप से निकल जाना गीला सपना कहलाता है। इस तरल पदार्थ का रंग क्रीम जैसा या रंगविहीन होता है।
• गीले सपने कैसे होते हैं?
सपनों में यौन उत्तेजना होने पर या कम्बल, पलंग अथवा भरे हुए मूत्राशय से रगड़ लगने पर शारीरिक उत्तेजना से गीले सपने आते हैं।
• क्या गीले सपनों का आना प्राकृतिक क्रिया है?
किशोरावस्था में शरीर में होने वाले बहुत से परिवर्तनों में गीले सपने भी स्वभाविक हैं। सभी लड़कों को ये नहीं आते और तो भी ठीक ही हैं। यदि किसी को गीले सपने ने आते हों तो इसका यह अर्थ नहीं कि कुछ गलत है।
• क्या लिंग के माप कुछ महत्व हैं?
बहुत से लड़के लिंग के माप के औचित्य से सम्बन्धित प्रश्न पूछते हैं। यह एक स्वभाविक और सामान्य बात है विशेषकर यदि वह यौन सम्भोग न करता हो या करने की सोच रहा हो। लिंग का माप तो जिन सम्बन्धों पर आधारित रहता है जो कि माता-पिता से ग्रहण किया जाता है।
• क्या लिंग के माप के सम्बन्ध में कोई कुछ कर सकता है?
लिंग को घटाने या बढ़ाने के लिए कोई कुछ नहीं कर सकता - किशोरावस्था से निकलकर जैसे ही आप एक लड़के से एक पुरूष के रूप में विकसित होते हैं लिंग भी विकसित हो जाता है।
• क्या लिंग का टेढ़ा होना सामान्य बात है?
खड़ा होने पर पुरूष के लिंग का हल्का सा दाएं या बाएं झुककर टेढ़ा होना अन्यन्त सामान्य बात है। कुछ पुरूषों के लिंग ऊपर की ओर भी मुड़ जाते हैं। यदि लिंग में अचानक कोई लम्प आ जाये जिससे वह अप्राकृतिक रूप से मुड़ जाये तो इसे डाक्टर ही देख पाएगा।
• क्या लिंग के माप का सम्भोग क्रिया पर कुछ प्रभाव पड़ता है?
सम्भोग परक या फिर प्रजनन के लिए किए जाने वाले कार्यों के लिए पुरूष के लिंग का माप काफी से बेहतर होता है। पुरूष को इस बात का पूरा भरोसा रखना चाहिए कि सम्भोग सुख या क्रिया से लिंग के माप का कोई सम्बन्ध नहीं होता। क्रिया का सम्बन्ध तो पुरूष की खड़ापन पाने और बनाये रखने की क्षमता या खड़ेपन अथवा बिना खड़ेपन के अपने आपको और अपने साथी को यौन परक सम्भोग का सुख देने में है अतः क्रिया, वस्तुतः माप पर नहीं - मांसपेशियों और प्रजनन अंगों की नाड़ी एवं रक्त आपूर्ति पर निर्भर रहती है। वास्तव में, यौन सम्भोग का सुख व्यक्ति की मनःस्थिति पर निर्भर करता है, अपनी और अपने साथी की जरूरतों के प्रति सम्मान पर निर्भर करता है। सम्भोग के दौरान, योनि का छिद्र किसी भी लिंग के लिए न तो बहुत छोटा होता है और न ही बहुत बड़ा क्योंकि यह एक 'खाली जगह' है जो कि मांसल तंतुओं से घिरी रहती है और सामान्यतः सभी माप के लिंगों को ग्रहण कर सकती है।
• अण्डग्रन्थि के क्षेत्र में पीड़ा के सामान्य कारण क्या हैं?
पीड़ा के सामान्य कारण हो सकते हैं 
(1) घाव 
(2) अण्डग्रन्थि में ऐंठन 
(3) अण्डग्रन्थि में कैंसर।
• अण्डग्रन्थि का ऐंठन क्या होता है?
यह वह स्थित है जब कि वीर्य नली कहलाने वाली जिस सहारा देने वाली नली से अण्डग्रन्थि जुड़ी होती है उसी पर वे मुड़ जाती है जिससे कि अण्डग्रन्थि मे रक्त की आपूर्ति कट जाती है। ऐसे में अण्डकोश नीलवर्ण से बैंगनी रंग में बदल जाता है और बहुत पीड़ा देता है। यह रोग की आपातस्थिति होता है, एक दम बताना चाहिए।
• अण्डग्रन्थि में कैंसर में कौन सी चीजें खतरा पैदा करती है?
निम्नलिखित बातों से अण्डग्रन्थि में कैंसर की सम्भावना बढ़ जाती है। इनमें (1) जन्मजात समस्या जैसे कि नीचे न होने वाली अण्डग्रन्थि (2¬) पारिवारिक इतिहास (3) अण्डकोश में चोट लगने का इतिहास शामिल हैं।
• अण्डग्रन्थि में कैंसर के क्या सम्भावित प्रारम्भिक संकेत होते हैं?
प्रारम्भिक स्थिति में हो सकता है कि कोई संकेत न मिले क्योंकि इसमें दर्द नहीं होता। कई रोगी उसे हानिविहीन भी समझ सकते हैं और अपने फिजिशियन का ध्यान उधर ले जाने में देर हो सकती है। लक्षणों में शामिल है - (1) अण्डग्रन्थि मे छोटा, दर्द विहीव लम्प, (2) अण्डग्रन्थि का बढ़ना (3) अण्डग्रन्थि में या उरूमूल में भारीपन (4) अण्डग्रन्थि में पीड़ा (5) अण्डग्रन्थि की अनुभूति में बदलाव (6) पुरूष की छातियों और निप्पलों का बढ़ जाना (7) अण्डकोश में अचानक तरल पदार्थ या रक्त का भर जाना।
जन्म दर को कम करके जनसंख्या वृद्धि में कटौती करने को ही आम तौर पर जनसँख्या नियंत्रण माना जाता है. प्राचीन ग्रीस दस्तावेजों में मिले उत्तरजीविता के रिकॉर्ड जनसँख्या नियंत्रण के अभ्यास एवं प्रयोग के सबसे पहले उदाहरण हैं. इसमें शामिल है उपनिवेशन आन्दोलन, जिसमे भूमध्य और काला सागर के इर्द-गिर्द यूनानी चौकियों का निर्माण किया गया ताकि अलग- अलग राज्यों की अधिक जनसँख्या को बसने के लिए पर्याप्त जगह मुहैया कराई जा सके. कुछ यूनानी नगर राज्यों में जनसँख्या कम करने के लिए शिशु हत्या और गर्भपात को प्रोत्साहन दिया गया. अनिवार्य जनसंख्या नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की एक ही बच्चे की नीति जिसमें एक से ज्यादा बच्चे होना बहुत बुरा माना जाता है. इस नीति के परिणाम स्वरुप जबरन गर्भपात, जबरन नसबंदी, और जबरन शिशु हत्या जैसे आरोपों को बढ़ावा मिला. देश के लिंग अनुपात में 114 लड़कों की तुलना में सिर्फ 100 लड़कियों का जन्म ये प्रदर्शित करता है कि शिशु हत्या प्रायः लिंग के चुनाव के अनुसार की जाती है.
यह बात उपयोगी होगी अगर प्रजनन नियंत्रण करने को व्यक्ति के व्यक्तिगत निर्णय के रूप में और जनसंख्या नियंत्रण को सरकारी या राज्य स्तर की जनसंख्या वृद्धि की विनियमन नीति के रूप में देखा जाए. प्रजनन नियंत्रण की संभावना तब हो सकती है जब कोई व्यक्ति या दम्पति या परिवार अपने बच्चे पैदा करने के समय को घटाने या उसे नियंत्रित करने के लिए कोई कदम उठाये. अन्सले कोले द्वारा दिए गए संरूपण में, प्रजनन में लगातार कमी करने के लिए तीन पूर्वप्रतिबंध दिए गए हैं: (1)प्रजनन के मान्य तत्व के रूप में परिकलित चुनाव को स्वीकृति (भाग्य या अवसर या दैवीय इच्छा की तुलना में), (2)कम किये गए प्रजनन से ज्ञात लाभ, और (3) नियंत्रण के प्रभावी तरीकों का ज्ञान और उनका प्रयोग करने का कुशल अभ्यास. प्राकृतिक प्रजनन पर विश्वास करने वाले समाज के विपरीत वो समाज जो कि प्रजनन को सीमित करने की इच्छा रखते हैं और ऐसा करने के लिए उनके पास संसाधन भी उपलब्ध हैं. वो इन संसाधनों का प्रयोग बच्चों के जन्म में विलम्ब, बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने, या उनके जन्म को रोकने के लिए कर सकते हैं. संभोग (या शादी) में देरी, या गर्भनिरोध करने के प्राकृतिक या कृत्रिम तरीके को अपनाना ज्यादा मामलों में व्यक्तिगत या पारिवारिक निर्णय होता है, इसका राज्य नीति या सामाजिक तौर पर होने वाले अनुमोदनों से कोई सरोकार नहीं होता है. दूसरी ओर, वो व्यक्ति, जो प्रजनन के मामले में खुद पर नियंत्रण रख सकते हैं, ऐसे लोग बच्चे पैदा करने की प्रक्रिया को ज्यादा योजनाबद्ध बनाने या उसे सफल बनाने की प्रक्रिया को और तेज़ कर सकते हैं.
सामाजिक स्तर पर, प्रजनन में गिरावट होना महिलाओं की बढती हुई धर्मनिरपेक्ष शिक्षा का एक अनिवार्य परिणाम है. हालाँकि, यह ज़रूरी नहीं है कि मध्यम से उच्च स्तर तक के प्रजनन नियंत्रण में प्रजनन दर को कम करना शामिल हो. यहां तक कि जब ऐसे अलग अलग समाज की तुलना हो जो प्रजनन नियंत्रण को अच्छी खासी तरह अपना चुके है, तो बराबर प्रजनन नियंत्रण योग्यता रखने वाले समाज भी काफी अलग अलग प्रजनन स्तर (जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या के सन्दर्भ में)दे सकते हैं, जो कि इस बात से जुड़ा होता है कि छोटे या बड़े परिवार के लिए या बच्चों की संख्या के लिए व्यक्तिगत और सांस्कृतिक पसंद क्या है. 
प्रजनन क्षमता पर नियंत्रण के विपरीत, जो मुख्य रूप से एक व्यक्तिगत स्तर का निर्णय है, सरकार जनसँख्या नियंत्रण करने के कई प्रयास कर सकती है जैसे गर्भनिरोधक साधनों तक लोगों की पहुँच बढाकर या अन्य जनसंख्या नीतियों और कार्यक्रमों के द्वारा. जैसा की ऊपर परिभाषित है, सरकार या सामाजिक स्तर पर 'जनसंख्या नियंत्रण' को लागू करने में "प्रजनन नियंत्रण" शामिल नहीं है, क्योंकि एक राज्य समाज की जनसंख्या को तब भी नियंत्रित कर सकता है जबकि समाज में प्रजनन नियंत्रण का प्रयोग बहुत कम किया जाता हो. जनसंख्या नियंत्रण के एक पहलू के रूप में आबादी बढाने वाली नीतियों को अंगीकृत करना भी ज़रूरी है और ज़रूरी है कि ये समझा जाए की सरकार जनसँख्या नियंत्रण के रूप में सिर्फ जनसख्या वृद्धि को रोकना नहीं चाहती. जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार न केवल अप्रवास का समर्थन कर सकती है बल्कि जन्म समर्थक नीतियों जैसे कि कर लाभ, वित्तीय पुरस्कार, छुट्टियों के दौरान वेतन देना जारी रखने और बच्चों कि देख रेख में मदद करने द्वारा भी लोगों को अतिरिक्त बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है. उदाहरण के लिए हाल के सालों में इस तरह की नीतियों फ्रांस और स्वीडन में अपनाई गयीं. जनसंख्या वृद्धि बढ़ने के इसी लक्ष्य के साथ, कई बार सरकार ने गर्भपात और जन्म नियंत्रण के आधुनिक साधनों के प्रयोग को भी नियंत्रित करने की कोशिश की है. इसका एक उदाहरण है मांग किये जाने पर गर्भनिरोधक साधनों और गर्भपात के लिए वर्ष 1966 में रोमानियामें लगा प्रतिबन्ध.
पारिस्थितिकी में, कई बार जनसंख्या नियंत्रण पूरी तरह सिर्फ परभक्षण, बीमारी, परजीवी और पर्यावरण संबंधी कारकों द्वारा किया जाता है. एक निरंतर वातावरण में, जनसंख्या नियंत्रण भोजन, पानी और सुरक्षा की उपलब्धता द्वारा ही नियंत्रित होता है. एक निश्चित क्षेत्र अधिकतम कुल कितनी प्रजातियों या कुल कितने जीवित सदस्यों को सहारा दे सकता है उसे उस जगह की धारण क्षमता कहते हैं. कई बार इसमें पौधों और पशुओं पर मानव प्रभाव भी इसमें शामिल होता है. किसी विशेष ऋतू में भोजन और आश्रय की ज्यादा उपलब्धता वाले क्षेत्र की ओर पशुओं का पलायन जनसंख्या नियंत्रण के एक प्राकृतिक तरीके के रूप में देखा जा सकता है. जिस क्षेत्र से पलायन होता है वो अगली बार के लिए पशुओं के बड़े समूह हेतु भोजन आपूर्ति जुटाने या पैदा करने के लिए छोड़ दिया जाता है. 
भारत एक और ऐसा उदाहरण है जहाँ सरकार ने देश की आबादी कम करने के लिए कई उपाय किये हैं. तेज़ी से बढती जनसँख्या आर्थिक वृद्धि और जीवन स्तर पर दुष्प्रभाव डालेगी, इस बात की चिंता के चलते 1950 के दशक के आखिर और 1960 के दशक के शुरू में भारत ने एक आधिकारिक परिवार नियोजन कार्यक्रम लागू किया; विश्व में ऐसा करने वाले ये पहला देश था.

Tuesday, 1 October 2013

अपने बेस्‍ट फ्रेंड से कैसे करें प्यार?----

अपने बेस्‍ट फ्रेंड से कैसे करें प्यार?----
आपका सबसे अच्छा रोमांटिक साथी आपका सबसे अच्छा दोस्त भी होता है। जिससे आप किसी भी चीज के बारे में बात कर सकते हैं, जिस पर आप पूरी तरह विश्वास कर सकते हैं, और जिसके साथ आप एक एक क्षण का आनंद उठा सकते हैं। अधिकांश लोगों की ज़िन्दगी में ऐसा कोई व्यक्ति अवश्य होता है - उनका सबसे अच्छा दोस्त यानी की बेस्‍ट फ्रेंड! परन्तु यदि आप और आगे जाना चाहते हैं, विशेषत: तब जब आपका सबसे अच्छा दोस्त आपसे प्यार करता हो, तो इस मौके का फायदा उठाना चाहिए!
जब दोस्‍त से प्‍यार हो जाए तो
समस्या यह है कि कभी कभी लोग अपने दिमाग में यह बात बैठा लेते हैं कि उनका अच्छा दोस्त सिर्फ एक दोस्त है और कुछ नहीं। यह लेख आपको इस मानसिकता को दूर करने में सहायक होगा जिससे आप अपने अच्छे दोस्त से प्यार कर पाएंगे। यदि आप अपने दोस्त से प्यार करते हैं और अपने संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो याद रखें, उनकी भावनाओं की कद्र करें और उन पर दबाव न डालें। इससे आप दोनों के बीच अच्छे संबंध बन सकते हैं।
अपने बेस्‍ट फ्रेंड से कैसे करें प्यार?

1. इस बात की चिंता न करें कि दोस्ती खराब हो जाएगी। आप पहले से ही अच्छे दोस्त हैं और आप जानते हैं कि समस्याओं को कैसे दूर किया जा सकता है और लडाई को कैसे रोका जा सकता है। यदि आप वास्तव में एक दूसरे के निकट हैं और आगे के संबंध नहीं चल सकते तो आप फिर से दोस्त बनकर रह सकते हैं।
2. अपने सबसे अच्छे दोस्त से अपने वर्तमान संबंध और संभावनाओं पर बात करें और आप देखेंगे कि आप दोनों ही एक दूसरे में रूचि रखते हैं।
3. अपने सपने शेयर करें (बांटें)। अक्सर अपने भविष्य के बारे में बात करके आप यह महसूस कर सकते हैं कि आप अपना भविष्य एक साथ बिताना चाहते हैं।
4. सोचें कि किस प्रकार आप अपने अच्छे दोस्त के निकट जा सकते हैं, और इससे आपको यह संकेत मिल सकता है कि आप इसका कितना आनंद उठाते हैं।
5. रोमांटिक मूड बनाएं और दोस्त बनकर साथ में कुछ करें, जैसे बीच पर जाना, डांस करना या अकेले केंडल लाईट डिनर करना। आप देखेंगे कि जब वातावरण सही होगा तब नई भावनाएं उभरकर आएंगी।
6. अपना समय लें। प्यार होना कोई जल्दबाज़ी का काम नहीं है और आपको अपने संबंध आगे बढ़ाने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप अपने दोस्त के साथ इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। उसे कहें कि आप उससे प्यार करते हैं। हम आपकी सफलता की कामना करते हैं।
सलाह
अक्सर जो चीज़ें आप साथ साथ करते हैं वे रोमांटिक नहीं होती (चाहे भले ही वह रोमांटिक संबंधों में हो)। जब आप अपने संबंधों को अगले स्तर पर ले जाते हैं, तो वे चीज़ें न करें जो आप हमेशा करते थे, उन स्थानों पर न जाएं जहाँ आप अक्सर जाते थे और मान लें कि आपकी दोस्ती बदल जाएगी: आपको अन्य दूसरी रोमांटिक चीज़ों के लिए प्रयत्न करना चाहिए।
चेतावनियां
यदि आपका अच्छा दोस्त आपसे प्यार नहीं करता, तो इस प्रकार व्यवहार करें कि आप सदा उनके आसपास रहें। अपने आप को बदलने का प्रयत्न न करें। यदि वह आपका सच्चा अच्छा दोस्त है तो आप जैसे हैं वह आपको उसी रूप में प्यार करेगा न कि बदले हुए रूप में।

जब दोस्‍त से प्‍यार हो जाए तो..------------

जब दोस्‍त से प्‍यार हो जाए तो..------------------ दोस्‍ती एक बहुत ही मजबूत रिश्‍ता होता है और जब यह प्‍यार में बदलने लगता है, तो अपने दिल का हाल बता पाना काफी मुशकिल होता है। कई लोग इस बंधन को जल्‍दी हजम नहीं कर पाते हैं और बीच में ही अपनी पक्‍की दोस्‍ती को तोड़ बैठते हैं, लेनिक ऐसे लोग जिनकी दोस्‍ती प्‍यार में बदल चुकी है, उनका रिलेशन काफी मजबूत होता है। आइये जानते हैं कि इस प्‍यार के अहसास को किस तरह से ठीक से समझा जाए। ऐसे पहचानिये प्‍यार के अहसास को: 1. उसके पास होने पर आपको अच्‍छा लगने लगता है- जब भी वह आपके आस-पास मौजूद होता है तब आपको उसके अलावा और कोई नहीं दिखाई देता और आप उसकी बातों में खो जाते हैं। साथ ही अगर आपका दोस्त कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर गया हो, तो आपको बेचैनी होती है, और आप उसके वापस लौटने का इंतजार करते हैं। 2. हर बात पर उसकी सलाह जरूरी है- अब आप अपनी हेयर और ड्रेसिंग स्टाइल बदलने के लिए भी अपने उस दोस्त से मशविरा लेते हैं। चाहे वह कितनी ही छोटी बात क्‍यों ना हो, आप उसकी सलाह लेना कभी नहीं भूलेगे। उसकी हर बात, हर सलाह आपको अच्छी लगने लगती है। 3. आप उसकी लाइफस्टाइल अपनाने लगते हैं- उसे क्‍या करना अच्‍छा लगता है, वह क्‍या खाता है, वह क्‍या पीता है आदि, बातों में आपका इंट्रेस्‍ट बढने लगता है। अब आपको अपनी पसंद का खाना नहीं, बल्कि उसकी पंसद का खाना अच्छा लगता। आप काफी कुछ उसकी लाइफस्‍टाइल को अपनाने लगते हैं तथा इस बात का ख्‍याल रखते हैं कि आप दोनों की पसंद मिले। 4. दिन-रात वही छाया रहता है- अगर आपकी दोस्‍ती प्‍यार में बदल रही है, तो आपको नींद नहीं आएगी, आँखें बंद करते ही वो सामने आ जाएगा। पूरी रात करवटें बदल कर ही बीतने लगती हैं। चार लोगो के बीच में बैठ कर भी आप केवल उसी के बारे में सोंचते रहेंगे। उसके ख्‍याल में आप सब कुछ भूल जाएंगे। आधी रात को भी अगर आपका फोन बजे तो आपको लगता है कि उसी का फोन है। 5. उसकी हर बातें अच्‍छी लगने लगती है- उसके घिसे-पिटे जोक्स पर भी आपको बहुत हँसी आती है। उसकी हर बेवकूफी, और गलती अब आपको अच्छी लगती है। उसकी बेतुकी, बचकानी बातें भी अच्छी लगने लगती हैं, और उन पर भी प्यार आने लगता है। 6. वो हमेशा पास रहे- अब आपको सिर्फ उसका साथ ही अच्छा लगता है। बस इस बात का इंतजार रहता है, कि किसी भी तरह से उस से मिलना हो जाए।जब वो साथ होता है, तो जिंदगी हसीन सी लगने लगती है। जिंदगी की हर बात उससे जुड़ी-सी लगती है।

लड़कियां फर्स्‍ट डेट पर कैसे रखें खुद को सुरक्षित---

लड़कियां फर्स्‍ट डेट पर कैसे रखें खुद को सुरक्षित---
पहली डेट हम सभी के लिए एक्‍साइटमेंट से भरी नहीं होती है? एक नए इंसान से मिलना, नए तरीके से रोमांस और नए रिश्‍ते की प्‍यारी सी शुरूआत होना। किसी भी लड़की के लिए फर्स्‍ट डेट सबसे ज्‍यादा रोमांचक होती है। लेकिन आजकल के बढ़ते क्राइम और ऑनलाइन डेटिंग स्‍कैंडल के कारण हर लड़की को पहली डेट पर जाते समय कुछ सावधानियों को बरतने की आवश्‍यकता है।
हम आपको पहली डेट पर जाने के कई दमदार तरीके बता चुके हैं साथ ही हमने आपको यह भी बताया है कि पहली डेट पर जाने के लिये कौन सी जगह चुनें, जिससे आपके पैसे ज्‍यादा न खर्च हों। हमने आपको ऑनलाइन डेटिंग टिप्‍स भी दिये हैं पर अगर फर्स्‍ट डेट पर खुद को सुरक्षित रखने की बात आती है तो, इस आर्टिकल में आपको डेट पर सुरक्षित रहने के तरीके भी हम ही बताएगें क्‍योंकि हमें आपकी सुरक्षा का पूरा ख्‍याल है। तो वे लड़कियां जो फर्स्‍ट डेट को रोमांचक बनाना चाहती हों और साथ साथ खुद को सुरक्षित भी रखना चाहती हों, वे नीचे दिये बिन्‍दुओं पर खास ध्‍यान दें।
1-गलत मैसेज पर रोक लगाएं अगर आपको ऐसा लगता है कि आपका दोस्‍त आपको अनुचित मैसेज लिखता है या कोई भी टेक्‍स्‍ट सही नहीं है तो उसे इग्‍नोर न करें। यह बेहद आवश्‍यक है कि पहली डेट पर आप, अपनी सुविधा और निजता बनाएं रखें। अनुचित लिखना, उस वंदे के वास्‍तविक इरादों को व्‍यक्‍त करता है, आप उसे समझाएं या उससे ऐसा घटिया लिखने का कारण पूछे। बाद में उसे सही तरीके से डील करें।
2-इंटरनेट पर उसके बारे में जानकारी एकत्र कर लें आजकल के दौर में किसी को भी इंटरनेट पर सर्च करना बहुत आसान हो गया है। सुनिश्चित कर लें कि फेसबुक, ट्वीटर व अन्‍य सोशल साइट्स पर उसके दोस्‍त बनने से पहले ही आप उसके बारे में जानकारी हासिल कर लें। कोशिश करें कि उसकेकिसी दोस्‍त या जानने वाले से उसके बारे में कुछ जानकारी हासिल हो सके।
3-पहली डेट पर किसी सार्वजनिक स्‍थल पर जाएं यह बात हमेशा ध्‍यान में रखें कि पहली डेट पर किसी सुनसान या अंजान जगह पर कतई न जाएं। हमेशा ऐसी जगह मिलें जहां काफी भीड़ - भाड़ हो और आप मुश्किल के समय लोगों से मदद मांग सकें। सार्वजनिक स्‍थल हमेशा सबसे उपयुक्‍त होते है क्‍योंकि पहली डेट में आप किसी पर आंख मूंदकर विश्‍वास नहीं कर सकते है।
4-अपने दोस्‍तों को जानकारी दें अपने कुछ नजदीक दोस्‍तों को अपनी पहली डेट के बारे में जरूर बताएं और उन्‍हे डेट करने वाली जगह और टाइम को भी बताकर जाएं। समय - समय पर उन्‍हे मैसेज करते रहें। ऐसे में अगर आप कभी मुश्किल में फंस जाती है तो वह आपकी मदद कर सकते है।
5-शॉर्ट्स और खुले - खुले कपड़े न पहने हम हमेशा चाहते है कि पहली डेट पर सेक्‍सी दिखें। लेकिन क्‍या पहली डेट पर सेक्‍सी दिखना जरूरी होता है। पहली डेट पर जब भी जाएं तो हमेशा अच्‍छे से फिट और स्‍मार्ट ड्रेस ही पहनें, ज्‍यादा सेक्‍सी ड्रेस को प्राथमिकता न दें। शॉर्ट्स कपड़े, सामने वाले को आपके बारे में गलत संदेश दे सकते है, क्‍योंकि कपड़े सोच बयां करते है न कि आपकी भावनाएं।
6-अपना बिल खुद अदा करें ध्‍यान रखें कि जब भी पहली डेट पर जाएं, अपना बिल खुद अदा करें। हो सकता है कि अगला व्‍यक्ति आपको ऐसा करने से मना करे लेकिन आप पूरा प्रयास करें कि बिल दें। इससे आपकी छवि उसके दिमाग में आत्‍मनिर्भर और समझदार लड़की की बनेगी। बिल देने से आप उसे अप्रत्‍यक्ष रूप से यह संदेश भी दे देगी कि आप उस पर पूर्णत: निर्भर नहीं हैं।
7-अजीब लगने पर उसे इग्‍नोर न करें कई बार किसी व्‍यक्ति से पहली बार मिलने पर आप सहज महसूस नहीं करती है या कुछ असुरक्षित सा महसूस करती है। अगर कभी ऐसा लगे तो आप वॉशरूम जाने के बहाने से अपनी किसी दोस्‍त को कॉल करके पूरी बात और पता दें। साथ ही अगर आपको वह इंसान असुरक्षित लगता है तो एलर्ट रहें और आसपास से हमेशा बचकर भाग निकलने का रास्‍ता देखती रहें।
8-भविष्‍य के बारे में कोई बात न करें पहली डेट पर जाएं लेकिन ध्‍यान रखें कि आप अपनी सीमा न भूलें। अपने भविष्‍य के प्‍लान के बारे में न बताएं। अगर किसी को फ्यूचर प्‍लान के बारे में बताना हो, तो उससे पहले उसे अच्‍छी तरह जान लें। कम से कम पहली डेट पर भूल से भी ऐसा न करें।
9-उसके घर जाने से बचें किसी के भी साथ पहली डेट पर उसके घर जाने से बचें। बल्कि डेट पर किसी भी सूनसान जगह न जाएं। हो सकता है कि अकेला पाकर वह आपका फायदा उठाने की कोशिश करे। या फिर आपको ड्रिंक के बहाने उसमें कुछ मिलाकर दे और आपके साथ कुछ गलत करे। भूल से भी पहली डेट पर किसी के बेडरूम तक न पहुंच जाएं।

क्‍या आपकी पार्टनर सेक्‍स करना चाहती है? ----

क्‍या आपकी पार्टनर सेक्‍स करना चाहती है? ---- हो सकता है ये सवाल आपको अजीब लगे, क्‍योंकि महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अक्‍सर ये सवाल सुनने में आते हैं कि "मुझे हमेशा सेक्‍स करने का मन करता है" लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि केवल आप ही हैं जो ऐसा सोंचते हैं लेकिन हमेशा सेक्‍स के बारे में सोंचना ये सहीं नहीं है। लोग इस तरह की बातें अपने देस्‍तों से भी छुपाते हैं। दरअसल ये कोई बीमारी नहीं बस दिमाग का एक वहम है। जिसे आप चाहें तो निकाल सकते हैं फिर आप चाहें पुरुष हों या फिर महिला कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर ये लत आपकी निजी लाइफ में दिक्‍कत कर रही है तो ये आपके लिए बाद में खतरनाक हो सकता है। लत क्‍या हर महिला या फिर पुरुष को देखकर उसके साथ सेक्‍स करने का मन होता है। अंतवस्‍त्रों को देखकर सेक्‍स करने का मन करता है। क्‍या आप हस्‍तमैथून करते हैं ऑफिस में भी काम करते समय सेक्‍स करने का मन करता है। क्‍या करें ये कोई शारीरिक बीमारी नहीं है बल्‍कि दिमाग का बस एक वहम या फिर कहें आदत है जिसे आप खुद ठीक कर सकते हैं बस इसके लिए आप अपने पाटर्नर से सेक्‍स को लेकर अपनी बात रखें। अगर आप शादीशुदा है तो इसके लिए आप अपने परिवार की ओंर ध्‍यान दें, साथ ही अपने पाटर्नर से हो सके तो इस बात को शेयर करें। सेक्‍स करने के बाद आप इस बात को समझे की अब अगला टर्न एक समय के बाद ही आएगा। अगर आप शादीशुदा नहीं है तो अपने करियर और आगे आने वाले भविष्‍य के बारे में सोंचे और इस बात को समझे कि हर चीज का एक समय होता है।

संभोग के लिए पांच पसंदीदा जगह--

संभोग के लिए पांच पसंदीदा जगह----- बंद कमरे में बिस्‍तर पर तो हर कोई संभोग करना पसंद करता है, लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं जिन्‍हें अलग-अलग तरीके से और अलग-अलग जगहों पर संभोग करने में मज़ा आता है। बात अगर संभोग के स्‍थान की आयी है तो यौन संबंध स्‍थापित करने के लिए हमने छह पसंदीदा स्‍थानों को चुना है, हो सकता है आपको भी इन जगहों पर सेक्‍स करने में मजा आता हो। यदि आपने बिस्‍तर के अलावा किसी अन्‍य स्‍थान पर सेक्‍स ट्राई नहीं किया है तो आज ही ट्राई करें- 1. किचन: अगर आपकी पार्टनर भोजन पका रही है और अचानक आपके अंदर प्‍यार का भूत जाग उठा है। आप उसे देख कर उत्‍तेजित हो उठते हैं तो अपनी पार्टनर को स्‍लेप पर बिठा दें और वहीं पर शुरू हो जायें। ऐसा करने में आपको न केवल मजा आयेगा, बल्कि आप रोमांच का अहसास करेंगे। हालांकि हम आपको बता दें कि साफ-सफाई की दृष्टि से किचन में संभोग नहीं करना चाहिये। 2. ड्राइंग रूम: यदि आप अपने ड्राइंग रूम में बैठे अपनी पार्टनर के साथ टीवी का मजा ले रहे हैं और अचानक आप उसके करीब चले जाते हैं। तो यह नहीं कि आप पहले उसे बेडरूम में ले जायें और फिर आलिंगन करें, बल्कि बेहतर होगा आप वहीं सोफे पर संभोग का मजा लें। यहां पर प्रेम की अनुभूति इसलिए भी ज्‍यादा होती है, क्‍योंकि सोफे पर सेक्‍स की पोजीशन बिस्‍तर पर पोजीशन से एकदम अलग होती हैं और यही कारण है कि यहां मज़ा ज्‍यादा आता है। 3. स्‍वीमिंग पूल: यदि आप अपनी पार्टनर के साथ स्‍वीमिंग पूल में अकेले हैं और बिकनी में वो ज्‍यादा आकर्षक लग रही है। तो यौन क्रियाओं के लिए इससे अच्‍छी जगह नहीं हो सकती। यह जगह आमतौर पर लोगों को बहुत पसंद होती है। 4. बाथरूम: यदि आपके बाथरूम में शावर चल रहा है और आप अपनी पार्टनर के साथ वहां हैं। तो पानी की बूंदों के बीच संभोग करने पर प्‍यार की अलग ही अनुभूति होती है। और अगर आपके बाथरूम में बाथ टब है तब तो समझिये सोने पर सुहागा। 5: डाइनिंग रूम: संभोग की एक पोजीशन जिसमें पुरुष कुर्सी पर बैठा हो और उसके ऊपर स्‍त्री, काफी पसंद की जाती है और इस पसंदीदा पोजीशन का असली मज़ा डाइनिंग रूम में ही है। तमाम लोग यहां संभोग करना पसंद करते हैं।

गर्भधारण के लिए कैसे करें सेक्‍स ----

गर्भधारण के लिए कैसे करें सेक्‍स -----पति-पत्‍नी के बीच यौन संबंध का एक लक्ष्‍य माता-पिता बनना भी होता है। वात्‍सयायन के कामसूत्र में संभोग की स्थितियों यानी पोजीशंस के बारे में बताया गया है। इसी में ऐसी पोजीशन भी बताई गई हैं, जिनमें संभोग करने से गभीधारण आसान हो जाता है। आज हम आपको कुछ पोजीशंस बताएंगे, जो गर्भधारण में सहायक होती हैं। साथ ही हम आपको कुछ टिप्‍स भी देंगे- गर्भधारण के लिए दो पोजीशन में सेक्‍स करना फलदायक रहता है- मिशनरी पोजीशन: इस स्थिति में संभोग के समय पुरुष ऊपर की ओर होता है। इस पोजीशन में संभोग करने से पुरुष का वीर्य सीधे स्‍त्री के गर्भाशय तक सीधा पहुंचता है। पुरुष के ऊपर रहने से गर्भधारण आसान हो जाता है। इसके विपरीत यदि स्‍त्री ऊपर की ओर रहती है, तो गर्भधारण की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं। हैंड एण्‍ड नी पोजीशन (डॉगी स्‍टाइल): इस पोजीशन में स्‍त्री घुटनों और हाथ के बल लेट जाती है और पुरुष पीछे की ओर से संभोग करता है। ऐसी स्थिति में वीर्य आसानी से महिला के गर्भाशय तक आसानी से पहुंचता है। कुछ देर आराम करें यदि आप गर्भधारण करना चाहती हैं, तो उपर्युक्‍त दोनों पोजीशंस पर संभोग करने के बाद कुछ देर आराम करें। बेड पर कूदें नहीं। चाहे जितने जरूरी काम क्‍यों न हों, संभोग के तुरंत बाद बिस्‍तर से उठने की जरूरत नहीं। यदि आपने मिशनरी पोजीशन में सेक्‍स किया है, तो संभोग करते समय या फिर संभोग के बाद स्‍त्री अपनी कमर के नीचे तकिया लगा लें, ताकि वीर्य गुरुत्‍वाकर्षण बल के जरिए नीचे की ओर आसानी से पहुंच सके। यदि संभोग के समय ही तकिया लगा लिया है तो अच्‍छा रहता है। ऐसे में कम से कम आधे घंटे तक स्‍त्री को शांतिपूर्वक लेटे रहना चाहिए। कुछ लोग मानते हैं कि संभोग के बाद यदि स्‍त्री पीठ के बल लेटकर अपने पैर ऊपर कर के थोड़ी देर लेटी रहे तो गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा करना फलदायक हो सकता है। हालांकि यह बात अभी तक सिद्ध नहीं हुआ है। कौन स समय सही कुछ लोगों का मानना है कि दिन के समय सेक्‍स करने गर्भधारण की संभावना अधिक रहती है। इसके पीछे उनका तर्क यह होता है कि रात्रि की तुलना में दिन में वीर्य में शुक्राणु की संख्‍या अधिक होती है। वहीं हाल ही में हुए एक शोध में पता चला है कि गर्भधारण के लिए सेक्‍स का सही समय शाम पांच से सात बजे के बीच का होता है। इस दौरान वीर्य में शुक्राणु की संख्‍या करीब 35 प्रतिशत तक ज्‍यादा होती है। शाम का यह समय ऐसा होता है, जब महिला के अंडाशय ज्‍यादा जल्‍दी क्रिया करते हैं। हालांकि यहां स्‍त्री को मासिक धर्म का ध्‍यान रखें। इन पोजीशन में न करें सेक्‍स यदि आप गर्भधारण चाहती हैं, तो इन बातों को जरूर ध्‍यान रखें, जो आपको नहीं करनी हैं। पहली यह कि संभोग के दौरान महिला ऊपर नहीं हो। ऐसे में शुक्राणु सर्विक्‍स के पास जमा हो जाते हैं। और थोड़ी ही देर में वापस लौट आते हैं, जिस कारण वो अंडाशय तक पहुंच नहीं पाते। इसके अलावा बैठकर, बगल में लेटकर और खड़े होकर सेक्‍स नहीं करें। इन सभी स्थितियों में शुक्राणुओं के गर्भाशय के पास जमा होने की संभावना ज्‍यादा होती है। हां कई बार वीर्य के निकलते समय शुक्राणु की गति अधिक होती है और ज्‍यादा संवेग होने के कारण शुक्राणु अपने लक्ष्‍य तक पहुंच जाते हैं और गर्भधारण हो जाता है।

चुंबन के समय क्‍या सोचते हैं पुरुष? ---

चुंबन के समय क्‍या सोचते हैं पुरुष? -----कामसूत्र के अंतर्गत चुंबन प्‍यार जताने का एक महत्‍वपूर्ण अंदाज है। इसमें पुरुष और महिला एक दूसरे के काफी करीब महसूस करते हैं। वैसे चुंबन कई प्रकार के होते हैं, जो दोनो को शारीरिक रूप से करीब लाने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी करीब लाते हैं। बंद कमरे में जब पुरुष और महिला चुंबन में खो जाते हैं, तब पुरुष के मन में क्‍या चलता है? क्‍या आपने कभी जानने की कोशिश की है। शायद नहीं। तो चलिये हम आपको बताते हैं- 1. चुंबन की शुरुआत से ठीक पहले पुरुष अपने मुंह की सफाई के बारे में सोचते हैं। कहीं किसी प्रकार की दुर्गंध तो नहीं आ रही। क्‍योंकि उसे पता है, कि मुंह की दुर्गंध पार्टनर को दूर कर सकती है। 2. पुरुष हमेशा सोचते हैं कि वो महिलाओं की अपेक्षा बेहतर ढंग से किस कर सकते हैं। वो सोचते हैं कि उनकी पार्टनर की किसमत अच्‍छी है, जो वो उन्‍हें किस कर रहे हैं। वे खुद को महिला से आगे समझते हैं। 3. अधिकांश पुरुष जब चुंबन में डूब जाते हैं, तो सोचते हैं, जल्‍दी वे बिस्‍तर पर लेटें और संभोग की शुरुआत हो। यही कारण है कि चुंबन के दौरान वे अपनी पार्टनर के विभिन्‍न अंगों पर हाथ फेरते हैं, ताकि वो संभोग के लिए उत्‍तेजित हो सके। 4. चुंबन के दौरान पुरुष के मन में हमेशा चलता रहता है, कि इसके बाद वे संभोग जरूर करेंगे। कई बार चुंबन को वो सिर्फ एक फॉर्मेलिटी के रूप में लेते हैं। यही कारण है कि पुरुष ज्‍यादा देर तक चुंबन नहीं ले पाते हैं। 5. चुंबन कई प्रकार से लिये जा सकते हैं, लेकिन पुरुष जब चुंबन की शुरुआत करते हैं तो वो यह नहीं सोचते हैं, कि उनकी पार्टनर उसमें सहज है या नहीं। 6. लिप किस के दौरान पुरुष यह जताने की कोशिश करते हैं, कि वो अपनी पार्टनर को सबसे ज्‍यादा प्रेम करते हैं। उनके मन में यह बात हमेशा रहती है और यही कारण है कि लिप किस से पहले और बाद में पुरुष स्‍त्री के माथे पर किस करते हैं। 7. लिप किस के दौरान पुरुष के मन में स्‍त्री के सौंदर्य को लेकर भी कई प्रकार की बातें चलती हैं। यही कारण है कि वो उसके विभिन्‍न अंगों पर भी किस करके यह जताने की कोशिश करते हैं कि उनके लिए उससे सुंदर कोई स्‍त्री नहीं है।

पेनिस के बारे में इन तथ्‍यों से आप हैं अंजान --

पेनिस के बारे में इन तथ्‍यों से आप हैं अंजान --- हाथ को कोहनी से उलटा खींचने से टूट सकता है, पैर मुड़ जाने से मोच आ सकती है, ऊंचा तकिया लगा लेने से गर्दन में लचक आ सकती है, ये सभी बातें आप जानते हैं इसलिये आप संभालकर काम करते हैं। लेकिन क्‍या आपने ऐसी कोई भी आशंका अपने लिंग के लिये व्‍यक्‍त की है? या फिर आपके मन में आयी है? शायद नहीं,क्‍योंकि हम सोचते हैं कि हमारा लिंग बहुत मजबूत और सुरक्षित है। लिंग की बात आती है तो ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग सिर्फ साफ-सफाई पर ध्‍यान देते हैं। नहाते वक्‍त लिंग को अच्‍छी तरह साफ करना बचपन से सिखाया जाता है, लेकि बाकी की बातें ध्‍यान में नहीं रहतीं। हम आपको लिंग के बारे में वो पांच बातें बताने जा रहे हैं, जिनसे हो सकता है आप अनजान हों। इन पांच बातों का ध्‍यान आप कभी रखें न रखें, लेकिन संभोग के वक्‍त जरूर रखें, नहीं तो आप आगे चलकर मुसीबत में पड़ सकते हैं। और हां शरीर के तमाम अंगों के बारे में हम बहुत कुछ जानते हैं, लेकिन लिंग के बारे में कई बातें हैं जो शायद कम ही लोग जानते हैं। हालांकि इसके पीछे कारण झिझक है। आम तौर पर लोग झिझक में ये सब बातें नहीं बताते। लिंग से जुड़े पांच अहम तथ्‍य-
1-हो सकता है फ्रैक्‍चर-- लिंग में कोई हड्डी नहीं होती। इसमें एक ऐसी मांसपेशियां होती हैं, जो आलिंगन के वक्‍त काफी सख्‍त हो जाती हैं और सामान्‍य रूप पर बहुत मुलायम रहती हैं। ऐसी मांसपेशियां शरीर के किसी भी अन्‍य अंग में नहीं होतीं। हम आपको बता दें कि संभोग के दौरान जोर-जबर्दस्‍ती करने से या बेतरतीब हस्‍त-मैथुन करने से लिंग में फ्रैक्‍चर हो सकता है। ऐसा होने पर आप नपुंसक हो सकते हैं।
2-ठंडा पानी लिंग का दुश्‍मन-- नहाते वक्‍त या कभी भी जरूरत से ज्‍यादा ठंडा पानी सीधे लिंग पन मत डालें, इससे आपके लिंग के नीचे का भाग अचानक ठंडा पड़ सकता है और ऐसा होने पर वीर्य बनना बंद हो जाता है, इससे आप नपुंसकता के शिकार हो सकते हैं।
3-लिंग का खुद का दिमाग-- यह बात शायद ही किसी को पता होगी। हमारे दिमाग का एक भाग एकदम अलग है, जो सीधे हमारे लिंग से जुड़ा हुआ है। लिंग हमारे नर्वस‍ सिस्‍टम के माध्‍यम से यहीं से कंट्रोल होता है। यानी जब व्‍यक्ति उत्‍तेजक होता है, तो दिमाग का वही भाग उसे नियंत्रित करता है।
4-लिंग में कड़ापन नहीं आना यानी बीमार हैं-- आप आम तौर पर लिंग में कड़ापन तब नहीं आता है, जब आपका संभोग या आलिंगन का मूड नहीं होता है, लेकिन अगर ऐसा रोज-रोज हो, तो यह गंभीर बात है। इसे इरेक्‍टाइल डाइसफंशन कहते हैं। ऐसा होना बीमारी के संकेत भी देता है। यदि आप हृदय रोगी हैं, हाईपरटेंशन के शिकार हैं, मधुमेह, आदि की शुरुआत है, तब भी आपके लिंग में कड़ापन आना बंद हो जाता है।
5-मुड़ा हुआ लिंग आम बात नहीं-- यदि आपका लिंग केले की तरह मुड़ा हुआ है, तो इसे हलके में मत लें। यह बीमारी के संकेत हैं। इससे आपको संभोग करने में परेशानी होती है। इस बीमारी का नाम पेयरोनी होता है।

मुख मैथुन से महिलायें होती हैं ज्‍यादा उत्‍तेजित, कैसे करें मुख मैथुन -

मुख मैथुन से महिलायें होती हैं ज्‍यादा उत्‍तेजित, कैसे करें मुख मैथुन ---मुख मैथुन के बारे में बहुत लोगों के जेहन में ढेर सारे सवाल होते हैं। मसलन क्‍या ऐसा करना सही होगा या फिर ऐसा करने से आपके स्‍वास्‍थ पर कोई बुरा असर तो नहीं पड़ेगा। लेकिन आपको बता दें काम शाष्‍त्र में भी मुख मैथुन का विधिवत वर्णन। शाष्‍त्र के अनुसार सेक्‍स के दौरान ऐसी स्थिती जिससे आपको ज्‍यादा उत्‍तेजना और बेहतरीन संतुष्‍टी प्राप्‍त हो उससे बेहतर तरीका और कोई नहीं हो सकता है। जहां, तक महिलाओं की बात है तो, महिलाओं को मुख मैथुन बहुत ही पसंद होता है। ऐसा कई बार होता है कि महिलायें अपने साथी से खुलकर इस बारे में बता नहीं पाती है। लेकिन ऐसा कत्‍तई नहीं है कि वो इसे पसंद नहीं करती है। जी हां, अपने साथ के मनोभावों को जानना सबसे पहला काम होता है। यदि आपका साथी मुख मैथुन की इच्‍छा रखता है तो आप ऐसा करने में देर न करें और पूरे प्‍लेजर के साथ सेक्‍स लाईफ का आनंद उठायें। Photos• Sexy And Hot Babes SHARE THIS STORY 0 जब आप अपने महिला साथी के योनि को अपनी जीभ और होठों से सहलाकर उत्तेजित करते हैं तो उसे मुख मैथुन करना कहते हैं। ऐसा करने से महिला बहुत ज्‍यादा यौन उत्तेजना महसूस करती है और वे चरम आनंद (आर्गैज़्म) महसूस कर सकती हैं। आज हम आपको अपने इस लेख में मुख मैथुन करने के तरीकों के बारें में बतायेंगे। सेक्‍स लाईफ को इंज्‍वॉय करना एक स्‍वस्‍थ जीवन का मुख्‍य बिंदू होता है। मुख मैथुन के लिए के टिप्‍स, कैसे करें महिला साथी के साथ मुख मैथुन: 01- मुख मैथुन के लिए बेहतर पोजीशन का होना बेहद जरूरी होता है। आपकी महिला साथी सीधे पीठ के बल लेटी हो और उसके पैर फैले व खुले हों। आप उनके पैरों के बीच लेट जायें ताकि आप उनके गुप्तांग के किसी भी हिस्से को आसानी से चूम, चाट और चूस सकें। यहां एक परेशानी गर्दन दर्द की हो सकती है, इसके लिए उसके नितंब के नीचे तकिया रख दें। इससे उसकी योनि ऊपर उठ जाएगी और एक बेहतर पोजीशन में आ जाएगी। यह पोजीशन भगशिश्न को चूमने और चाटने के लिये बेहतर होती है। 02- ठीक प्रकार से पोजिशन बनाने के बाद आप अपने साथी के अन्‍त: वस्‍त्र (पैंटी) को अपने दांतों में फंसा कर धीमें-धीमें नीचे की तरफ लेकर जायें। इस दौरान आपके उपर वाले होंठ उनके गुप्‍तांग पर रगड़ खाते हुए नीचें जायेंगे। इस समय आप एक बार उनकी आखों में देखना ना भूलें। पैंटी निकालने के बाद आप आसानी से बैठकर अपने जीभ को गुप्‍तांग के उपर सहलायें, और अपने उंगलियों के सहारे से गुप्‍तांग पर दबाव बनाये। यह बेहद ही शानदार पोजिशन होती है। 03- इस पोजीशन के दौरान यहां एक परिवर्तन किया जा सकता है। आपकी साथी उसी तरीके से लेटी रहे, लेकिन आप घूम जाएं और आपका चेहरा पैरों की ओर हो जाए, अर्थात आप उनके उपर उसकी उल्टी दिशा में लेट जाए। इस अवस्था में आपका गुप्तांग उनके के चेहरे के उपर होंगा और वह आसानी से आपके लिंग को चूम और चूस सकती है। इससे दोनों मुख मैथुन का आनंद ले सकते हैं। 04- यदि आपकी साथी नहीं चाहती तो आप थोड़ा सा अपने शरीर को घुमा सकतें है। जिससे आपका गुप्तांग महिला के चेहरे से दूर हो जाएंगा। इसके आद आप अपने शरीर को कोहनी का सहारा देकर अपने पार्टनर के भग और भग शिश्न को आसानी से चूम चुमना शुरू करें। लेकिन यहां यह सावधानी बरतनी पड़ेगी कि साथी के शरीर पर ज्यादा भार न पड़े। इस पोजीशन में आप अपने पार्टनर की जांघों तक पहुंच सकतें हैं। इस दौरान वह जांघों को फैला कर बाह्य भगोष्ठ को खोल सकता है। 05- एक पोजीशन के रूप मे इसे भी आजमाया जा सकता है जब महिला अपने नितंब के बल बेड के एक किनारे लेटी हो, उसके पांव फर्श पर फैले हों। इस वक्त पुरुष उसकी जाघों के बीच अपने घुटनों के बल बैठ कर उसके गुप्तांगों का चुंबन आदि ले सकता है। इस दौरान जब महिला उत्तेजित हो जाए तो वह अपनी जांघों को खींच कर टांगे फैलाकर अपने तलवे पार्टनर के कंधे, पीठ पर रख सकती है। इस दौरान उसका भग क्षेत्र और खुल जाता है। यह पोजीशन उन महिलाओं के लिये सबसे बेहतर होती है जो यह चाहती हैं कि उनका पार्टनर उसकी योनि के अन्दर अपनी जीभ को प्रवेश कराए। यह पोजीशन महिला को टेबल पर लिटा कर भी की जा सकती है। इस पोजीशन में पुरुष ज्यादा आराम दायक स्थिति में रहता है क्योंकि इस दौरान उसे बहुत कम झुकना पड़ता है। 06- आप मुख मैथुन के लिये महिला को उपर करके भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिये पुरुष अपनी पीठ के बल सीधे लेट जाए और महिला घुटनों के बल उसके सीने के ऊपर आ जाए और अपने गुप्तांगों को पुरुष के चेहरे के पास ले जाकर अवसर दे। इसमें महिलाओं को फायदा यह होता है कि वह मुख मैथुन की प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में रख सकती है साथ ही इस दौरान वह उसके लिंग के साथ भी खेल सकती है। 07- इसी प्रक्रिया को आगे और बढ़ाया जा सकता है। इसमें महिला टांगे फैलाकर खड़ी हो जाए और पुरुष घुटनों के बल बैठकर उसके भग क्षेत्र पर अपने होंठों से दबाव डाल सकता है। कल्पनाशील युगल के लिये एक और बेहतर पोजीशन है। इसमें पुरुष अपनी पीठ के बल सीधे लेट जाए और पैर मोड़कर घुटने ऊपर उठा ले। अब महिला घुटनों के बल पुरुष के चेहरे के ऊपर आ जाए। इस दौरान पैर काफी फैले हुए हों, उसका भग क्षेत्र पुरुष के मुंह के ठीक उपर हो। इस दौरान महिला की पीठ पुरुष के चेहरे की ओर हो। अब महिला घुटनों के बल सीधे लेट जाए। ऐसे में महिला का सिर पुरुष के घुटनों पर टिक जाएगा। इस अवस्था में महिला का भगक्षेत्र पूरी तरह से चौड़ाई में खुल जाता है. अब पुरुष चाहे तो वह अपनी जीभ महिला की योनि में प्रवेश करा सकता है.

महिलाओं के पसंदीदा टॉप 5 बेहतरीन सेक्‍स पोजिशन -

महिलाओं के पसंदीदा टॉप 5 बेहतरीन सेक्‍स पोजिशन --- सेक्‍स जीवन का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा होता है। एक सु‍खी वैवाहिक जीवन के लिए बेहतर सेक्‍स लाईफ का होनेा उतना ही महत्‍वपूर्ण है जितना कि एक मजबूत शरीर के लिए उचित खान-पान। कामशाष्‍त्र के अनुसार सेक्‍स लाईफ को महिला और पुरूष दोनों ही बराबर पसंद करते हैं। एक बेहतर सेक्‍स लाईफ के लिए जीवन में नित नये प्रयोगों का होना भी बेहद ही आवश्‍यक होता है। जिससे कि सेक्‍स लाईफ में निरसता ना आये। ऐसा कई बार देखा जाता है कि पुरूष सोचते हैं कि वो सेक्‍स के बेहतरीन पोजिशन आदि के लिए केवल वो ही लालायीत रहते हैं। लेकिन ऐसा कत्‍तई नहीं है जिस प्रकार पुरुषों को विशेष क्रियाओं या पोजीशन में सेक्‍स करना पसंद होता है, उसी प्रकार महिलाओं को भी। एक बेहतर सेक्‍स लाईफ के लिए बेहतर सेक्‍स पोजिशन भी बहुत मायने रखता है। तो आइेय आज हम आपको अपने इस लेख में कुछ ऐसे सेक्‍स पोजिशन के बारें में बतातें हैं जो निश्‍चय ही आपके महिला पार्टनर को बेहद पसंद आयेंगे। ये सेक्‍स पोजिशन महिलाओं को करते हैं सबसे ज्‍यादा आनंदित:---- पुरूष महिला के उपर: पहली क्रिया जिसमें संभोग के दौरान पुरुष महिला के ऊपर होता है। यह सबसे पुरानी क्रिया है, जिसे महिलाएं सबसे ज्‍यादा पसंद करती हैं। इस क्रिया में महिलाओं को प्रेम और सेक्‍स दोनों का बराबर से अनुभव होता है। इस दौरान पुरूषों को अपने वजन का खास ध्‍यान रखना चाहिऐ और दबाव को सही और ठीक प्रकार से ही बनान चाहिए। पुरूष के जांघ पर महिला:---- सेक्स की इस बेहतरीन क्रिया में पुरुष की जांघों पर उसकी पार्टनर बैठ जाती है। इस क्रिया में बैठकर संभोग किया जाता है। इसमें सीधे दिल से दिल का संपर्क होता है। यदि इस क्रिया के साथ चुंबन भी लिया जाए तो प्‍यार का अहसास कई गुना बढ़ जाता है। महिला पुरूष के उपर: इस पोजिशन में जिसमें महिला अपने पार्टनर के ऊपर बैठ जाती है। आम तौर पर महिलाओं को हावी होना पसंद होता है और इस पोजीशन में उसी बात का अहसास ज्‍यादा होता है। इस पोजीशन में महिलाएं बहुत जल्‍द चरम सीमा यानी रति निष्‍पत्ति की अवस्‍था में पहुंच जाती हैं। इस दौरान पुरूष को महिला का पुरा सहयोग करना चाहिए, और नीचे से उपर की तरफ दबाव भी बनाना चाहिए। पोजिशन 66:---- यह पेाजिशन बेहद ही कारगर और रोमांचक माना जाता है। जैसा कि हम आपको पूर्व में बता चुके हैं कि, महिलाओं को अलग-अलग तरह से सेक्‍स करना पसंद होता है। पोजीशन '66′ प्‍यार और सेक्‍स का अलग अहसास कराता है। इसमें महिला अपने पुरुष पार्टनर के ऊपर पीठ करके बैठ जाती है। इस पोजीशन में अगर पुरुष अपनी पार्टनर की छाती पर मसाज करे तो ज्‍यादा सहायक सिद्ध हो सकता है। स्‍पून फिटिंग पोजीशन:---- महिलाओं को स्‍पून फिटिंग पोजीशन भी काफी पसंद होती है। इस पोजीशन में जिस प्रकार दो चम्‍मच एक दूसरे में फिट हो जाते हैं, उसी प्रकार महिला, पुरुष एक दूसरे के आलिंगन में खो जाते हैं। पुरुष पीछे की तरफ रहता है और महिलो को आनंद के चरमोत्‍कर्ष पर पहुंचाता है।

बेहतर सेक्स लाइफ के 20 टिप्स:-

बेहतर सेक्स लाइफ के 20 टिप्स:-
1. अक्सर ऎसा सोचा और कहा जाता है कि बच्चो के जन्म के बाद पत्नी को सेक्स में रूचि नही रह जाती, जो कि सरासर गलत है रिसर्च बताते है कि बच्चो के जन्म के बाद क्लाइमेक्स (चरमोत्कर्ष) की तीव्रता बढ़ जाती है इसका कारण है नर्व एंडिग का ज्यादा सेंसिटिव होना।
2. कम्युनिकेशन (संवाद) बनाए रखे, यह आपसी प्यार और रिश्ते की मजबूती के लिए बहुत जरूरी है, इससे सेक्स लाइफ में भी सुधार होता है, क्योकि बातचीत आपको करीब लाती है इनके अभाव में रिश्ता पनप नही पाता।
3. कभी-कभार आप भी सेक्स के लिए पहल करें, अक्सर महिलाएं ऎसा करने से हिचकिचाती है पर ध्यान रहे, आपका पहल करना उन्हें सुखद एहसास में डुबा देता है यदि बच्चे छोटे है तो सेक्स लाइफ में मुश्किलें भी आती है और महिलाएं इतनी खुली व रिलैक्स भी नही रह पाती, ऎसे में बच्चों के सोने का इंतजार करने से अच्छा है जब भी मौका लगे, प्यार में खो जाएं।
4. कई बार महिलाएं समझ नही पाती कि कौन सी चीज उन्हें उत्तेजित करती है,पहले खुद ही पता लगाएं कई बार वे जानकर भी बताने से शरमाती है अत: खुद ही कल्पना करें व एन्जॉय करें, जब सहज लगे, तब पति को बताएं इससे फोरप्ले में आसानी होती है।
5. शरीर का बेडौल होना या शेप में न होना कई बार महिलाओं में हीनता की भावना भर देता है, इसका एक कारण टीवी तथा फिल्मों में जीरों फिगर को महत्व दिया जाना है, याद रखें वास्तविक जीवन फिल्मों से बहुत अलग है आत्मविश्वास बनाए रखें तभी आप पति से जुड पाएंगी हां बैलेस्ड डायट व व्यायाम के जरिए सुडौल शरीर पाने की कोशिश अवश्य करें।
6. बच्चें होने के बाद उनकी देखभाल व घर के कामकाज महिलाओं को बहुत थका देते है उन्हे सेक्स की इच्छा ही नही रह जाती, अपने आराम के लिए अवश्य समय निकालें, तभी आपका सेक्स जीवन संतुष्टिपूर्ण होगा, चि़डचि़डाहट नही होगी और आप खुश रहेंगी।
7. सेक्स मे आप क्या चाहती है, आपको क्या अच्छा लगता है, ये पति को बताएं, पंरतु सेक्स के दौरान नही जब आप दोनों रिलैक्स हो, सही समय हो और मूड भी हो, क्योंकि इन बातो के लिए सही समय होना बहुत जरूरी है।
8. एक-दूसरे की कंपनी एन्जॉय करें, धीरे-धीरे प्यार की ओर बढ़ें, सेक्स से पूर्व काफी देर तक किया गया फोरप्ले दोनों को चरम संतुष्टि देता है।
9. आजकल अलग-अलग रंगो व खुशबुओं में कंडोम मिलते है ये कई प्रकार के होते है, जैसे लुब्रिकेटेड,रिंड व डॉटेड, इससे फोरप्ले के दौरान उत्तेजना और आनंद बढ़ता है अत: इसका उपयोग करें।
10. सेक्स संबंधी किताबों,फिल्मों,कहानियों में सेक्स को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। सत्य यह है कि सामान्य कपल्स हफ्ते में 1 या 2 या इससे भी कम बार सेक्स करते है। अतिशयोक्ति पर विश्वास न करें, ध्यान रखें, क्वांटिटी की अपेक्षा क्वालिटी महत्वपूर्ण होती है।
11. क्लाइमेक्स, चरमोत्कर्ष या ऑर्गेज्म एक आनंददायी संतुष्टिपूर्ण अनुभव है कई जोडे इस बात से नाराज रहते है कि दोनों एक साथ चरमोत्कर्ष पर नही पहुंचते ऎसा हो सकता है परंतु इससे कोई फर्क नही प़डता महिलाएं एक से अधिक बार ऑर्गेज्म का अनुभव करती है।
12. अच्छी सेक्स लाइफ के लिए आपका शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है, इसके लिए महत्वपूर्ण बैलेंस्ड डाइट, थो़डी बहुत एक्सरसाइज भरपूर नींद और ज्यादा चाय,कॉफी,सिगरेट या शराब का सेवन न करना।
13. सस्ती सेक्स किताबों, पोर्नोग्राफिक फिल्मों और समाचार पत्रों मे आए दिन कई विज्ञापनों मे पेनिस(लिंग)के आकार या लंबाई को बढ़ा-चढ़ाकर एवं कम लंबाई को एक समस्या के रूप में दिखाया जाता है जिससे युवावर्ग भ्रमित हो जाता है और तनावग्रस्त होकर उल्टे-सीधे उपाय करने लगता है ये सब गलत है छोटे आकार से ऑर्गेज़्म में कोई फर्क नही प़डता, क्योंकि योनि का केवल एक तिहाई भाग ही सेंसिटिव होता है अत: सही सेक्स पोजीशन में छोटा लिंग भी पूरी तरह चरमोत्कर्ष दे सकता है।
14. सेक्स करते समय किसी और पुरूष की कल्पना उत्तेजित करती है और सेक्स का आंनद बढ़ाती है अत: कल्पना करें,इसके लिए मन में किसी तरह का अपराधबोध न आने दे. इसमें कोई बुराई नही है।
15. यदि पति-पत्नी दोनों वर्किग है, व्यस्त है, रात को देर से आते है, तो उनकी सेक्स लाइफ न के बराबर होती है। ऎसे में बेहतर होता है कि सुबह उठकर फ्रेश मूड में सेक्स का आनंद उठाएं।
16. कुछ सालों के बाद सेक्स लाइफ बोरिंग हो जाती है, इसलिए एक्सपेरिमेंट करते रहे, अलग-अलग पोजीशन ट्राई करें. कुछ ऎसा जो जिंदगी में रंग भर दे।
17. सेक्स दोनों को शारीरिक ही नही मानसिक रूप से भी करीब लाता है यही जु़डाव दांपत्य जीवन की नींव है. खुद का ध्यान रखना, संवरना, खूबसूरत दिखना जरूरी है।
18. बढ़ती उम्र के साथ-साथ सेक्स लाइफ को जीवंत रखना एक चुनौती है. इसके लिए फोरप्ले का समय बढ़ाएं नए तरीके आजमाएं, अपने पुराने दिनों को याद करें, परंतु सेक्स करना बंद ना करें।
19. यदि सेक्स की इच्छा है परंतु आप बहुत थके हुए व तनावग्रस्त महसूस कर रहे है तो डरावनी फिल्म या हॉरर शो देखें या 1 कप कॉफी पीएं, आपका दिल जोरों से ध़्ाडकने लगेगा इससे शरीर में एड्रीनलीन की मात्रा बढ़ जाएगी, यही वह केमिकल है, जो सेक्सुअल एक्साइटमेंट (उत्तेजना)पैदा करता है।
20. रिसर्च बताते है कि सिगरेट व शराब सेक्स कि क्रिया को प्रभावित करते है, क्योंकि इनका सीधा संबंध आपके ब्लड सर्कुलेशन और नर्वस सिस्टम पर प़डता है इससे उत्तेजना, योनि की चिकनाहट और सेसेशन कम होता है. शराब व सिगरेट पुरूषों व महिलाओं दोनों पर समान असर डालती है।

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