Monday, 13 April 2015

..ताकि बना रहे लाइफ में हॉर्मोंस का बैलेंस

हमारे शरीर में कुल 230 तरह के हॉर्मोंस होते हैं, जो शरीर में अलग-अलग कामों को कंट्रोल करते हैं। हॉर्मोन की छोटी-सी मात्रा ही कोशिका के काम करने के तरीके को बदलने के लिए काफी है। दरअसल, यह एक केमिकल मेसेंजर की तरह एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक सिग्नल पहुंचाते हैं। एक गलत मेसेज आपकी लाइफ का बैलेंस बिगाड़ सकता है, खुद को कैसे बचाएं इस समस्या से, एक्सपर्ट्स की मदद से हम बता रहे हैं आपको...
क्या है हॉर्मोन
हार्मोंस हमारी बॉडी में मौजूद कोशिकाओं और ग्रन्थियों में से निकलने वाले केमिकल्स होते हैं, जो शरीर के दूसरे हिस्से में मौजूद कोशिकाओं या ग्रन्थियों पर असर डालते हैं। इन हार्मोंस का सीधा असर हमारे मेटाबॉलिज्म, इम्यून सिस्टम, रिप्रॉडक्टिव सिस्टम, शरीर के डिवेलपमेंट और मूड पर पड़ता है।
हॉर्मोन असंतुलन का मतलब
हमारी बॉडी में हर तरह के हॉर्मोन का अलग-अलग रोल होता है। किसी भी तरह के हॉर्मोन का तय से ज्यादा या कम मात्रा में निकलने को हॉर्मोन असंतुलन कहा जाता है। वैसे तो पुरुषों और महिलाओं दोनों में ही कई तरह के हॉर्मोंस पाए जाते हैं, लेकिन कुछ का असर सीधे रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है।
पुरुषों में हॉर्मोंस
1.एंड्रोजेन
इस हॉर्मोन का मुख्य काम पुरुषों में दाढ़ी आना, सेक्सुअल लाइफ, अग्रेसिव बिहेवियर, मसल्स बनाने जैसे शारीरिक और मानसिक बदलावों के लिए जिम्मेदार होता है।
असंतुलित होने पर
बॉडी में यह हॉर्मोन कम होने पर मसल्स बनने में कमी, स्पर्म बनने में कमी, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, अपोजिट सेक्स के प्रति रुचि में कमी और इन्फर्टिलिटी जैसे लक्षण देखे जाते हैं।
2.इंसुलिन
इसका मुख्य काम बॉडी में ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल करना है। यह ब्लड में ग्लूकोज को बढ़ने से रोकता है। हमारी बॉडी में ग्लूकोज की नॉर्मल मात्रा फास्टिंग में 70-100 तक और नॉन फास्टिंग में 140 ग्राम/डेसीलीटर तक होनी चाहिए।
असंतुलित होने पर
ब्लड में इंसुलिन कम होने पर ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है इसका असर बॉडी के करीब सभी ऑर्गन्स पर पड़ता है। इसके असंतुलन से घाव जल्दी नहीं भरते। हाथ-पैरों में दर्द रहना शुरू हो जाता है। जल्दी-जल्दी पेशाब आना, वजन घटना, भूख का काफी कम हो जाना आदि इसके लक्षण हैं।
3.थायरॉयड
यह हमारे गले में मौजूद एक ग्रंथि का नाम है। इससे निकलने वाले हॉर्मोन को थायरॉयड हॉर्मोन कहते हैं, जिनके नाम हैं T3, T4, TSH। TSH हमारे दिमाग में मौजूद पिट्यूट्री ग्लैंड से निकलता है, जिसका काम T3 और T4 को कंट्रोल करना होता है। यह हॉर्मोन हमारी बॉडी की ग्रोथ रेग्युलेट करता है।
असंतुलित होने पर
इस हॉर्मोन के असंतुलित होने से दिमागी विकास धीमा हो जाता है। बच्चे में इस हॉर्मोन के असंतुलित होने पर विकास धीमा हो जाता है यानी जो काम बच्चा तीन महीने की उम्र में करने लगता है, वह 10 महीने में करता है । बड़ों में पांव फूलना, वजन बढ़ना, नॉर्मल तापमान में ठंड लगना जैसे लक्षण देखे जाते हैं।
4.पैराथायरॉयड
यह भी गले में मौजूद होती है और इसका काम हमारी बॉडी में कैल्शियम के लेवल को कंट्रोल करने का होता है।
असंतुलित होने पर
हड्डियां कमजोर हो जाएंगी। यह बूढ़े लोगों में ज्यादा होता है।
5.इपाइनेफ्राइन या एड्रेनेलिन
इसे 'फाइट ऑर फ्लाइट' हॉर्मोन भी कहा जाता है। यह बॉडी में रिजर्व एनर्जी की तरह होता है। इसका काम अचानक आ जाने वाली परेशानी को हैंडल करने की ताकत देना होता है। यह शरीर में मौजूद मिनरल्स को मेनटेन करता है।
असंतुलित होने पर
इसके कुछ केस में मौत होने तक की आशंका रहती है। एड्रेनेलिन फेल्योर की कंडिशन में बीपी तेजी से गिरता है। हालांकि ऐसे केस कम ही देखने को मिलते हैं।
महिलाओं में हॉर्मोंस
1.थायरॉयड
ज्यादातर महिलाओं में थायरॉयड हॉर्मोन के असंतुलन के कारण बीमारियां होती है। यह हमारी बॉडी में मौजूद एक ग्रंथि का नाम है।
असंतुलित होने पर
इस हॉर्मोन के असंतुलन का सबसे ज्यादा असर उनकी फर्टिलिटी (बच्चे पैदा करने की क्षमता) पर पड़ता है।
2.एस्ट्रोजेन और प्रॉजेस्ट्रॉन
ये दोनों ही सेक्स हॉर्मोन होते हैं, जो महिलाओं में फर्टिलिटी से जुड़े होते हैं। एस्ट्रोजेन का काम हड्डियों को मजबूत करना भी होता है। महिलाओं में मिनोपॉज के बाद हड्डियां का कमजोर हो जाने की वजह भी एस्ट्रोजेन की कमी ही होती है। इसके लिए डॉक्टर उन्हें कैल्शियम की गोलियां खाने को देते हैं। वहीं पॉजेस्ट्रॉन का काम महिलाओं में पीरियड्स के साइकल को सही रखना और पहले तीन महीने में मां के गर्भ में बच्चे के बढ़ने में मदद करना होता है।
असंतुलन होने पर
मेंसेस साइकल में गड़बड़ी होना, ज्यादा ब्लीडिंग होना। कभी-कभी महीने में तीन या चार बार ब्लीडिंग होना जैसी समस्याएं होती हैं। उम्र बढ़ने पर बच्चे पैदा करने में दिक्कत आने जैसी परेशानी हो सकती है।
3.इंसुलिन
इसका मुख्य काम बॉडी में ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल करना है। महिलाओं में भी ग्लूकोज की नॉर्मल मात्रा फास्टिंग में 70-100 और नॉन फास्टिंग में 140 ग्राम/डेसीलीटर होती हैं।
असंतुलित होने पर
पुरुषों जैसी समस्याएं ही होने लगती हैं।
क्यों होता है असंतुलन
- महिलाओं में हॉर्मोंस असंतुलित होने के कई कारण हैं : खराब लाइफस्टाइल, न्यूट्रिशन की कमी, एक्सरसाइज न करना, तनाव, पीसीओडी, थायरॉइड, ओवेरियन फेलियर आदि।
- लोग मानते हैं कि हॉर्मोन असंतुलन मेनोपॉज के बाद होता है, जबकि यह पूरी तरह गलत है। कई महिलाएं सारी उम्र हॉर्मोन असंतुलन से परेशान रहती हैं।
- जीवनशैली और खानपान से जुड़ी आदतों में बदलाव के कारण महिलाएं हॉर्मोन असंतुलन की शिकार पहले की तुलना में अब ज्यादा हो रही हैं।
- जंक फूड और दूसरे खाद्य पदार्थों में कैलरी की मात्रा तो बहुत ज्यादा होती है लेकिन पोषक तत्वों की मात्रा काफी कम होती है। इससे शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
- कॉफी, चाय, चॉकलेट और सॉफ्ट ड्रिंक आदि के ज्यादा सेवन के कारण भी कई महिलाओं की एड्रिनलीन ग्रंथि ज्यादा सक्रिय हो जाती है, जो हर्मोन के स्राव को प्रभावित करती है। - गर्भनिरोधक गोलियां भी हॉर्मोन के स्राव को प्रभावित करती हैं।
ये हैं बैलेंस बिगड़ने के लक्षण
महिलाओं में हर महीने फीमेल हॉर्मोन एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन बनता है।जब इन हॉर्मोंस के संतुलन में गड़बड़ी होती है तो महिलाओं में हेल्थ से जुड़ी बहुत-सी समस्याएं पनपने लगती हैं, जिनके लक्षण हैं :
- पीरियड्स अनियमित होना
- वजन बढ़ना
- इनफर्टिलिटी
- मूड स्विंग होना
- ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की परेशानियां)
-
यूटराइन फायब्रॉइड, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन
- स्किन से जुड़ी समस्याएं जैसे कील-मुंहासे आदि
- बालों का गिरना, फेशियल हेयर ग्रोथ
- डिप्रेशन, थकान, चिड़चिड़ापन,कमजोरी होना
- सेक्स इच्छा में कमी आदि
- भूख न लगना
- सही से नींद न आना
- ध्यान केंद्रित करने में समस्या
- अचानक वजन बढ़ जाना
बचाव ही बेहतर
हॉर्मोंस को बैलेंस रखने के 3 सबसे आसान उपाय हैं : वजन कंट्रोल में रखना, तनावरहित रहना और सही डाइट लेना। इसके अलावा भी कुछ जरूरी बातें हैं।
- हल्का भोजन करें, खासकर रात को सोने से पहले।
- ताजा और पौष्टिक भोजन ही खाएं।
- हरी सब्जियों, ताजे फलों और दालों को खाने में जरूर शामिल करें।
- पेट साफ रखें।
- 7-8 घंटे की नींद लें। नींद पूरी या सही से नींद न लेने पर भी बॉडी में हॉर्मोंन असंतुलन की समस्या हो जाती है।
- मन को हल्का रखें। खुश रहें और दिन में तीन से चार बार जोर-जोर से हंसें।
- सुबह या शाम के वक्त 25 से 30 मिनट की वॉक करें। पार्क में कुछ वक्त गुजारें
- चाहे तो पूरे दिन में एक टाइम (सुबह या शाम) वॉक करें और दूसरे वक्त योगासन का पूरा पैकेज करें।
- संतुलित, कम फैट वाले और ज्यादा रेशेदार भोजन का सेवन करें।
- ओमेगा-3 और ओमेगा-6 युक्त भोजन हॉर्मोन संतुलन में सहायक है। यह सूरजमुखी के बीजों, अंडे, सूखे मेवों और चिकन में पाया जाता है
- शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- रोज 7-8 घंटे की नींद लें।
- चाय, कॉफी, शराब के सेवन से बचें।
- पीरियड्स से जुड़ी गड़बड़ियों को गंभीरता से लें।
- हॉर्मोंस को संतुलित रखने के लिए विटामिन डी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए थोड़ी देर धूप में जरूर रहें।
डाइट का रोल
पौष्टिक तत्वों से भरपूर खानपान जहां एक तरफ हॉर्मोंस को संतुलित रखते हैं वहीं, दूसरी ओर रोगों से लड़ने की ताकत को भी बढ़ाते हैं।
क्या खाएं
- ताजे फल, सब्जियां, ड्राईफ्रूट्स (8-10 बादाम और 1-2 अखरोट रात भर पानी में भिगो कर) खाने में शामिल करें।
- अपनी डाइट में ज्यादा-से-ज्यादा ओमेगा 3 फैटी एसिड (ऑलिव ऑयल, फ्लैक्स सीड, नारियल का तेल और फिश) शामिल करें।
- नींबू, संतरा (विटामिन सी) चने की दाल और राजमा, बाजरा, ज्वार, मक्का, रागी, पालक, सरसों का साग, गुड़ और भुने चने आदि खाने से नेचरल तरीके से हॉर्मोंस को संतुलित रखने में मदद मिलती है।
- केला, नाशपाती और सेब जैसे फलों को डाइट का हिस्सा बनाएं।
-9-10 गिलास पानी पिएं, पानी शरीर में मौजूद टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है।
-हर्बल टी लेना अच्छा ऑप्शन हो सकता है।
- विटामिन डी के लिए टोंड मिल्क, योगर्ट, मशरूम खाएं।
- ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी और सरसों का साग खूब खाएं। इससे भी हॉर्मोंस संतुलित रहते हैं।
क्या न खाएं
- ऑइली फूड, जंक फूड, सॉफ्ट ड्रिंक, मैदा, वेजिटेबल ऑयल, सोया प्रॉडक्ट्स, स्टेरॉयड और ज्यदा एंटीबायोटिक लेने से हॉर्मोंस असंतुलित हो जाते हैं।
- ओमेगा 6, पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स जैसे वेजिटेबल ऑयल, मूंगफली का तेल, कनोला ऑयल, सोयाबीन का तेल आदि खाने से बचें।
- ज्यादा चाय, कॉफी, अल्कोहल और चॉकलेट आदि कैफीन मिली हुई चीजें खाने से बचें।
- पनीर, दूध से बनी और मीट जैसी फैट वाली चीजें कम लें।
इलाज से होगी मुश्किल आसान
अलोपथी में इलाज
पेशंट की उम्र और उसकी बॉडी में होने वाले हॉर्मोन असंतुलन, उससे होने वाली बीमारी के लक्षणों को पहचानकर ही दवाइयां दी जाती हैं।
होम्योपथी में इलाज
चाहे महिला पेशंट हो या पुरुष, पहले देखा जाता है कि किस तरह का और कौन-सा हॉर्मोन असंतुलित है। हॉर्मोन के असंतुलन की समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह पर ली जाने वाली कुछ कॉमन दवाइयां हैं :
- PULSATILLA-30 : 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।
- SPIA-30 : 5-5 गोली दिन में तीन बार, दो हफ्ते तक।
- SULPHUR-30 : 5-5 गोली दिन में तीन बार, दो हफ्ते तक।
योग से इलाज
हमारे शरीर की बहुत सी चीजें मन से जुड़ी होती हैं। अगर आपकी बॉडी में हॉर्मोंस असंतुलित होने पर योग के इस पैकेज को करें।
- कपालभाति
- कटिचक्रासन (लेटकर)
- पवनमुक्तासन
- भुजंगासन और धनुरासन
- मंडूकासन
- पश्चिमोत्तान आसन
- अनुलोम-विलोम प्राणायाम
- उज्जायी प्राणायाम
- धीरे-धीरे भस्त्रिका प्राणायाम
- ध्यान
- शवासन
आयुर्वेद में इलाज
पुरुषों के लिए
- अश्वगंधा चूर्ण 1 चम्मच रात में खाना खाने के आधा घंटे बाद दूध और मिस्री से लें।
- अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर में अश्वगंधारिष्ट और अमृतारिष्ट 3-3 चम्मच खाने के बाद दिन में दो बार 1 कप गुनगुने दूध के साथ पीने से पुरुष हॉर्मोन बैलेंस रहते हैं।
महिलाओं के लिए
-अशोकारिष्ट 2-2 चम्मच दिन में दो बार लेने से पीरियड नियमित रहते हैं। शतावरी चूर्ण महिलाओं में दूध को बढ़ाता है।
- साल में तीन महीने अशोकारिष्ट और दशमूलारिष्ट 3-3 चम्मच बराबर पानी के साथ खाने के 2 घंटे बाद दिन में दो बार लें। गर्भावस्था में इसे न लें।
नोट : इनमें से कोई एक दवा ही डॉक्टर की सलाह पर लें। योग पैकेज को सुबह खाली पेट करें और शाम के वक्त करना है तो डिनर से पहले करें। रोजाना आधा घंटा इस पैकेज को एक्सपर्ट की मदद से करें।

Saturday, 11 April 2015

दीर्घायु और स्वस्थ रखे ताम्र पात्र का जल

दीर्घायु और स्वस्थ रखे ताम्र पात्र का जल

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ताम्बे के बर्तन में रखा पानी पीने का अक्सर निर्देश
भारतीय बुजुर्ग और वैद्य देते हैं |इसके अनेकानेक
वैज्ञानिक कारण हैं |सभी धातुओं में से ताम्बे के पात्र में
रखा जल सर्वाधिक लाभप्रद होता है |

आयुर्वेद केअनुसार, तांबे के बर्तन में संग्रहीत पानी में आपके शरीर में
तीन दोषों (वात, कफ और पित्त) को संतुलित करने
की क्षमता होती है और यह ऐसा सकारात्मक पानी चार्ज
करके करता है। तांबे के बर्तन में जमा पानी 'तमारा जल'
के रूप में भी जाना जाता है और तांबे के बर्तन में कम 8
घंटे तक रखा हुआ पानी ही लाभकारी होता है।

जब
पानी तांबे के बर्तन में संग्रहित किया जाता है तब
तांबा धीरे से पानी में मिलकर उसे सकारात्मक गुण प्रदान
करता है। इस पानी के बारे में सबसे अच्छी बात यह है
कि यह कभी भी बासी (बेस्वाद) नहीं होता और इसे
लंबी अवधि तक संग्रहित किया जा सकता है।
तांबे को प्रकृति में ओलीगोडिनेमिक के रूप में
(बैक्टीरिया पर धातुओं की स्टरलाइज प्रभाव)
जाना जाता है और इसमें रखे पानी के सेवन से
बैक्टीरिया को आसानी से नष्ट किया जा सकता है।

तांबा आम जल जनित रोग जैसे डायरिया, दस्त और
पीलिया को रोकने में मददगार माना जाता है। जिन देशों में
अच्छी स्वच्छता प्रणाली नहीं है उन देशों में
तांबा पानी की सफाई के लिए सबसे सस्ते समाधान के रूप
में पेश आता है।

थायरेक्सीन हार्मोन के असंतुलन के कारण थायराइड
की बीमारी होती है। थायराइड के प्रमुख लक्षणों में
तेजी से वजन घटना या बढ़ना, अधिक थकान महसूस
होना आदि हैं। कॉपर थायरॉयड ग्रंथि के बेहतर कार्य
करने की जरूरत का पता लगाने वाले सबसे महत्वपूर्ण
मिनरलों में से एक है। थायराइड विशेषज्ञों के अनुसार,
कि तांबे के बर्तन में रखें पानी को पीने से शरीर में
थायरेक्सीन हार्मोन नियंत्रित होकर इस
ग्रंथि की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करता है। तांबे में
मस्तिष्क को उत्तेजित करने वाले और विरोधी ऐंठन गुण
होते हैं। इन गुणों की मौजूदगी मस्तिष्क के काम
को तेजी और अधिक कुशलता के साथ करने में मदद करते
है।

गठिया या जोड़ों में दर्द की समस्या आजकल कम उम्र के
लोगों में भी होने लगी है। यदि आप भी इस समस्या से
परेशान हैं, तो रोज तांबे के पात्र का पानी पीये। तांबे में
एंटी-इफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह गुण दर्द से राहत और
दर्द की वजह से जोड़ों में सूजन का कारण बने -
गठिया और रुमेटी गठिया के मामले विशेष रूप से फायदेमंद
होते है। त्वचा पर सबसे अधिक प्रभाव
आपकी दिनचर्या और खानपान का पड़ता है। इसीलिए अगर
आप अपनी त्वचा को सुंदर बनाना चाहते हैं तो रातभर तांबे
के बर्तन में रखें पानी को सुबह पी लें। ऐसा इसलिए
क्योंकि तांबा हमारे शरीर के मेलेनिन के उत्पादन का मुख्य
घटक है। इसके अलावा तांबा नई कोशिकाओं के उत्पादन में
मदद करता है जो त्वचा की सबसे ऊपरी परतों की भरपाई
करने में मदद करती है। नियमित रूप से इस नुस्खे
को अपनाने से त्वचा स्वस्थ और चमकदार लगने लगेगी।
पेट जैसी समस्याएं जैसे एसिडिटी, कब्ज, गैस आदि के
लिए तांबे के बर्तन का पानी अमृत के सामान होता है।
आयुर्वेद के अनुसार, अगर आप अपने शरीर से विषाक्त
पदार्थों को बाहर निकालना चाहते हैं तो तांबे के बर्तन में
कम से कम 8 घंटे रखा हुआ पानी पिएं। इससे पेट की सूजन
में राहत मिलेगी और पाचन की समस्याएं भी दूर होंगी।
अगर आप त्वचा पर फाइन लाइन को लेकर चिंतित हैं
तो तांबा आपके लिए प्राकृतिक उपाय है। मजबूत एंटी-
ऑक्सीडेंट और सेल गठन के गुणों से समृद्ध होने के कारण
कॉपर मुक्त कणों से लड़ता है---जो झुर्रियों आने के मुख्य
कारणों में से एक है---और नए और स्वस्थ
त्वचा कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है। ज्यादातर
भारतीय महिलाओं में खून
की कमी या एनीमिया की समस्या पाई जाती है। कॉपर के
बारे में यह तथ्य सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक है कि यह
शरीर की अधिकांश प्रक्रियाओं में बेहद आवश्यक
होता है। यह शरीर के लिए आवश्यक पोषक
तत्वों को अवशोषित कर रक्त वाहिकाओं में इसके प्रवाह
को नियंत्रित करता है। इसी कारण तांबे के बर्तन में रखे
पानी को पीने से खून की कमी या विकार दूर हो जाते हैं।
गलत खान-पान और अनियमित जीवनशैली के कारण कम
उम्र में वजन बढ़ना आजकल एक आम समस्या हो गई है।
अगर आप अपना वजन घटाना चाहते हैं तो एक्सरसाइज के
साथ ही तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना आपके लिए
फायदेमंद साबित हो सकता है। इस पानी को पीने से शरीर
की अतिरिक्त वसा कम हो जाती है। तांबे के बर्तन में
रखा पानी वात, पित्त और कफ की शिकायत को दूर करने
में मदद करता है। इस प्रकार से इस पानी में एंटी-
ऑक्सीडेंट होते हैं, जो कैसर से लड़ने की शक्ति प्रदान
करते हैं। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार तांबे कैंसर
की शुरुआत को रोकने में मदद करता है, कैसे इसकी सटीक
कारण अभी तक ज्ञात नहीं है, लेकिन कुछ अध्ययनों के
अनुसार, तांबे में कैंसर विरोधी प्रभाव मौजूद होते है।
तांबा अपने एंटी-बैक्टीरियल, एंटीवायरल और
एंटी इफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। इसलिए इसमें
कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए
कि तांबा घावों को जल्दी भरने के लिए एक शानदार
तरीका है। दिल के रोग और तनाव से ग्रसित
लोगों की संख्या तेजी बढ़ती जा रही है। यदि आपके साथ
भी ये परेशानी है तो तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से
आपको लाभ हो सकता है। तांबे के बर्तन में रखे हुए
पानी को पीने से पूरे शरीर में रक्त का संचार बेहतरीन
रहता है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है और दिल
की बीमारियां दूर रहती हैं

Wednesday, 1 April 2015

Sex-relax: पुरुषों के लिए सेक्स करने के कामोत्तेजक तरीके

बेडरूम में सेक्स को जंगली रवैए की तरह अपनाइए और इस शानदार ड्राइव का दोनों पार्टनर जमकर आनंद उठाइये। आप अपनी सेक्स क्षमता का पूरा और सही प्रयोग करें। शेयर सेक्स नॉलेज के इन बिन्दुओं पर करें विचार-  कैसे बहकाएं पत्नी को- महिला को बहकाना हमेशा पुरुषों के लिए चुनौती होता है। किन्तु किसी अवसर पर जीवन साथी को बहकाने का अच्छा प्रतिफल मिलता है। शादी के कुछ सालों बाद कुछ जोड़े पाते हैं कि सेक्स और दृढ़ता अपनी वास्तविक चमक खोती जा रही है। अक्सर बच्चे के जन्म के बाद महिला विशेषतः अनसेक्सी महसूस करती है। एक आदमी इस परिस्थिति को समझते हुए तरीके से अपने पार्टनर को आकर्षक और सेक्सी बना सकता है। इसका सबसे बेहतर तरीका है कि पॉजिटिव प्रयासों से अपने पार्टनर को बहकाएं। दिन का समय- शाम के बेहतर बहकावे के लिये अपरान्ह में दोनों के बीच कोई गैर सेक्सुअल हरकत अच्छे वार्म- अप का काम करती है। कोई रोमांटिक फिल्म देखने जाएं या फिर मौका मिलने पर पैदल साथ-साथ बाजार घूमने निकल जाएं। सुहानी शाम और डिनर- कैंडल लाइट डिनर से की जा सकती है, जो कि या तो किसी मनपसंद रेस्टोरेंट में हो सकता है या फिर घर में ही इसकी तैयारी की जा सकती है, वह भी बगैर घर की किचन में बगैर समय गवांए। भोजन करने के दौरान न तो ज्यादा खाएं न ही ज्यादा पियें और न ही एक दूसरे को ज्यादा के लिये प्रेरित करें।साथ ही इस बात का ख्याल रखना चाहिये कि क्या खा रहे हैं. निश्चित मात्रा का भोजन खाने में काफी सेक्सी होता है। इस दौरान अपनी पत्नी को अपनी डिश चखाएं और उसकी डिश का भी आनंद ले। बस यहीं से बहकाने का सेक्सुअल पार्ट शुरू होता है।  आपस में छेड़छाड़ करें- आपसी छेड़छाड़ दो प्रेमियों के बीच का महत्वपूर्ण फोरप्ले(fore play) होती है। इस दौरान धीमी लाइट जलाकर कोई पसंदीदा संगीत चालू कर लें। छेड़छाड़ के बीच-बीच में एक दूसरे को किस करने का मौका न गंवाएं, सीधे सहवास के लिए उन्मुख हो जाएं।  उसके कपड़े उतारें- छेड़छाड़ के दौरान धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारें और उसके सुंदर शरीर की तारीफ करने से न चूके। उसे यह बताएं की उसकी वजह से आप किस तरह ऑन होते हैं। यही वह प्वांइट होगा जब आप दोनों को एक दूसरे की गर्मी और उत्तेजना का अहसास होना शुरू हो जाएगा। उसके बदन में नाम मात्र के कपड़े बचे हों तो उसे भी इस क्रिया में सहभागी बनने को कहें। यह उसके लिये भी एक वास्तविक टर्न ऑन होगा, ठीक उसी तरह जैसे की आपका जब वह पूरी तरह कपड़े उतार चुकी हो। इसस दौरान के सेक्सी कमेंट उसे शारीरिक रूप के अलावा मानसिक रूप से भी उत्तेजित करते हैं। 

Saturday, 28 March 2015

सुहागरात को बनाना चाहते हैं यादगार तो यह लेख आपके लिए..

.अक्सर हम शादी से ठीक पहले सुहागरात के सपनों को मन ही मन बिखेर कर बैठ जाते हैं। कैसे होगा, क्या होगा, कितनी देर होगा और किस हद तक होगा। इन सवालों के जवाब रोमांच और हिचक में कभी-कभार भटक जाते हैं व हम अपनी बेशकीमती रात को यूं ही गंवा देते हैं। का जानें क्या करें जब आए आपकी सुहागरात-  अब दूल्हे को चाहिए कि वह अपने सुहागसेज की तरफ धीरे धीरे आगे बढ़े। इसके बाद दुल्हन अपने पति के अभिवादन करने के लिए सेज से उतरने की कोशिश करे। इसके बाद दूल्हे को चाहिए कि वह अपनी पत्नी को बैठे रहने के लिए सहमति दें और इसके साथ ही थोड़े से फासले पर बैठ जाए। अब दूल्हा दुल्हन का घूंघट धीरे-धीरे उठाए तथा मुंह दिखाई की रस्म को पूरा करते हुए कोई उपहार जैसे अंगूठी, चेन, हार आदि दुल्हन को देना चाहिए। इसके बाद पति को चाहिए कि वह पत्नी के साथ कुछ मीठी-मीठी बातें करते हुए परिचय बढ़ाएं। पति को चाहिए कि हल्के हाथ से अपनी पत्नी के हाथों को स्पर्श करे। उसे अपने हंसमुख चेहरे तथा बातों से हंसाने की कोशिश करें। इसके बाद धीरे-धीरे जब पत्नी की शर्म कम होती जाए तो उसे आलिंगन में भर लें और उसके गालों पर चुंबन करें। इसके लिए धीरे धीरे पत्नी के दोनों गालों पर, फिर गर्म जलते हुए होठ पर, फिर होठों से फिसलते हुए उसके गर्दन पर और फिर छाती पर चूमें। जब लगे कि वह आपके और करीब आना चाहती है तो उसे पूरा सुख धीरे-धीरे देने की कोश‍िश करें। यदि पत्नी आपके साथ आलिंगन-चुंबन में सहयोग देने लगे तो पुरुष को चाहिए कि वह उसके शरीर के कई उत्तेजक अंगों को छूने का प्रयास करें जैसे- स्तनों का स्पर्श करें, धीरे-धीरे उनको सहलाएं तथा बाद में धीरे-धीरे दबाएं। इसके बाद आपको चाहिए कि उसकी कमर, जांघ तथा नितंब आदि की तारीफ करें और धीरे-धीरे अपने हाथों से उसके कपड़े को उठाकर, हाथों को अंदर डालकर जंघाओं को सहलाएं। इस क्रिया के समय में उसकी सांसे भी तेज चलने लगेंगी और कांपने लगेंगी। जब इस प्रकार की क्रिया पत्नी करने लगे तो पुरुष को समझ लेना चाहिए कि वह अब सेक्स के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। अधिकतर सुहागरात के दिन पुरुष अपनी कामोत्तेजना को शांत करने के बाद यह नहीं देखता है कि मेरी पत्नी भी संतुष्ट हुई है या नहीं। यदि स्त्री संतुष्ट हो जाती है तो उसका शरीर ढीला पड़ जाता है, पसीना आने लगता है, आंखे बंद हो जाती हैं और लज्जा उसके चेहरे पर दुबारा से दिखाई देने लगती है।

सेक्स करने से पहले याद रखीं ये बातें तो आप पाएंगे 100% 'चरम सुख

सेक्स करने से पहले याद रखीं ये बातें तो आप पाएंगे 100% 'चरम सुख' ------आप हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि आपकी पार्टनर का भग शिश्न (क्लिटरिस) कहां है? यह बिलकुल आपके सामने होता है। यदि सेक्स के आनंद को बढ़ाना चाहते हैं तो आप इसे ना पहचानने का जोखिम बिलकुल न लें। हमेशा ध्यान रखें कि यह ठीक कहां है, न इसके ऊपर है और न ही इसके नीचे। अपना ध्यान पूरी तरह से इस पर केन्द्रित करें और इसके साथ लम्बे समय तक खेलने का मजा लें। साथी के साथ बिस्तर पर आने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि आपके पैरों में मोजे नहीं होने चाहिए क्योंकि ऐसे समय पर गंदे मोजे या इनकी बदबू आपके साथी को नाराज कर सकती है।  चिकनाई ... चिकनाई .... और चिकनाई। हो सकता है कि आप अपने द्रव से ही सराबोर हो रहे हों, लेकिन आपका जो मुख्य काम है वह चिकनाई बिना नहीं हो सकता है। इसलिए आपको चिकने पदार्थों, द्रवों की जरूरत होगी तभी आपका असल काम असल अर्थ में शुरू हो सकेगा। कुछ डर्टी टाक हो जाए.... कुछ महिलाएं तब बहुत अधिक उत्तेजित होती हैं अगर वे अपनी कल्पनाओं में भी कामुक होने लगती हैं। इसलिए इस बात को लेकर कुछ डर्टी टाक करें कि आप दोनों मिलकर क्या करने वाले हैं। हो सके तो इस काम के लिए अपने साथी को भी प्रोत्साहित करें क्योंकि ऐसा करने से आप दोनों का ही सबसे बड़ा सेक्स आर्गन 'आपका ‍मस्तिष्क' सेक्स के लिए सक्रिय हो जाएगा और पूरी तरह से उत्तेजित भी हो जाएगा। कई महिला और पुरुष ऑरल सेक्स भी पसंद करते हैं। अत: पुरुष यदि ऐसा करते हैं तो पहले गीले हो जाएं क्योंकि सूखा रहना आपके साथी को परेशान ही नहीं वरन तकलीफ भी दे सकता है। यह सुनिश्चत करें ‍कि अगर आप अपनी जीभ को साथी की योनि में डाल रहे हैं तो यह आपकी लार से पर्याप्त गीली हो। आपकी सूखी जीभ साथी की योनि में खुजली पैदा कर सकती है या इसे घायल कर सकती है। अपने हाथों पर गौर करें.... यह बात ध्यान रखें कि आप और आपकी साथी के बीच हाथ हैडलाइट का काम करते हैं...हाथ ऐसे लगाएं मानो रोशनी डाल रहे हों। आमतौर पर जो बात हमें पसंद नहीं होती है उसे भी हम अपने हाथ के इशारों से बताते हैं कि ऐसा न करें। इसलिए ध्यान रखें कि आप कितने ही उत्तेजित क्यों न हो गए हों, लेकिन महिला के निपल्स को ना तो जोर से भींचें, ना दबाएं और ना ही मुंह से काटें। एक महिला का यह सबसे ज्यादा संवेदनशील हिस्सा होता है इसलिए इन्हें इतनी ही संवेदनशीलता के साथ प्यार करें। कभी-कभी हल्का सा स्पर्श आपके पार्टनर में उत्तेजना का संचार कर देता है। ...और उसकी शारीरिक क्रियाओं से आप इस सुखद स्पर्श का अनुमान भी लगा सकते हैं। रगड़ने की कोशिश तो बिलकुल न करें। सेक्स के दौरान हलके हाथ से नाजुक अंगों को सहलाना बहुत अधिक प्रभावी होता है। आपके होठों का एक हल्का सा चुम्बन बेहतर है। इसलिए लैब्राडोर रिट्रीवर की तरह से अपनी जीभ से चाटने का काम नहीं करें। इससे तो आपका साथी गुस्सा भी हो सकता है। बहुत ही हल्के से कुतरने जैसा कुछ करें। अर्थात कहीं-कहीं आप हलके से अपने दांतों का उपयोग भी कर सकते हैं। पर ध्यान रहे यह उत्तेजना बढ़ाने के लिए है दर्द बढ़ाने के लिए नहीं। आप जानते हैं कि महिला साथी को सबसे अच्छा क्या लगता है? वह उस आदमी को प्यार ही नहीं करती वरन पूजती है जो कि उसकी हाथ की अंगुलियों या पैरों की अंगुलियों को बारी-बारी प्यार से चूमें और चूंसे। पुरुषों को ऐसा करना चाहिए मानो उनका मुंह एसबेस्टस का बना हो और महिला प्यार की आग में जल रही हो। जब आप सेक्स के लिए तैयार हो रहे हों तो उस समय अपने ऊपर तनाव को हावी न होने दें। अगर आप किसी महिला को गहरे और एकाग्रचित्त होकर देखने लगेंगे तो ऐसा उसे ऐसा लगेगा मानो आप अपने दिमाग में कुछ योजनाएं बना रहे हैं, उसे प्यार नहीं कर रहे हैं। इसलिए अपने साथी पर जब भी निगाह डालें, हल्की-सी मुस्कान के साथ। उसे प्यार से निहारें। आपके देखने के अंदाज में इतना असर होना चाहिए कि आपके पार्टनर के पूरे शरीर में सनसनी फैल जाए। फिर देखिए कि उसे कितना अच्छा लगता है। अपनी प्रेयसी के स्तनाग्रों (निप्पल्स) को कभी ना भूलें। वैसे भी स्त्री के सबसे आकर्षक अंगों में जहां मर्द की नजर सबसे अधिक ठहरती है, वे स्तन ही तो हैं। आपके हाथों को स्त्री की योनि तक पहुंचाने से पहले इन्हें निपल्स पर रखें यानी आपके प्यार का पहला स्टॉप। ... और फिर धीरे-धीरे चलते हुए अंतिम स्टॉप तक पहुंचें। इसके साथ ही ध्यान रखें कि कोई भी स्टॉप न छूटे। प्रत्येक स्टॉप को आप उसके हिस्से का 'प्यार का ईंधन' देते जाने का काम करें। तभी आपके के सेक्स का सुहाना सफर पूरा होगा और अंत में आपको ऐसा लगेगा कि आप दो नहीं एक शरीर और एक जान हैं। बेहतर सेक्स के लिए महिलाओं को उपाय पुरूष सेक्स का जितना आनंद लेते हैं, महिलाएं भी सेक्स को उतना ही आनंद लेती हैं। हां ये बात अलग है महिलाओं का सेक्स को फील करने और उसे एंज्वाय करने का अंदाज अलग होता है। महिलाएं भावनात्क रूप से पहले जुडना पसंद करती हैं यानी वे फोरप्ले को अधिक एन्जॉय करती हैं। जैसे पुरूषों को सेक्स में प्रयोग करने में आनंद है, ठीक वैसे ही महिलाओं को भी कई सेक्स पोजीशंस पसंद आती है। फर्क इतना ही कि महिलाएं उन सेक्स पोजीशंस को अधिक पसंद करती हैं जिससे वह जल्दी ही चरमोत्कर्ष तक पहुंच जाती हैं। अकसर महिलाएं अपने दिल की बात छुपाती हैं और सेक्स को भरपूर एन्जॉय नहीं कर पाती। यदि आप भी सेक्स को एन्जॉय करना चाहती हैं तो इन टिप्स को आजमाएं। किस करें : आपको यदि अपने पुरूष पार्टनर को किस करने का मन है तो आप उसे खुलकर किस करें। पुरूषों को उत्तेजित करने की बेहतरीन चाबी है किस। इससे आपका पार्टनर आपकी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ पाएगा। बातें करें : पुरूष आमतौर पर çस्त्रयों की निजी भावनाओं के प्रति कन्फ्यूज रहते हैं। इसलिए बातें करना जरूरी है। यदि आप अपने पार्टनर से सामने खुलकर बात नहीं कर पाती हैं तो आपको चाहिए कि आप अपने पार्टनर से फोन पर बात करें। फोन पर एरोटिक बातचीत से आपकी झिझक काफी कम होगी। सेक्स बुरा नहीं : कई बार महिलाओं के मन में सेक्स के प्रति गलत धारणाएं बैठ जाती हैं और वे इस प्रक्रिया को खुलकर एंज्वाय नहीं कर पातीं। इसलिए जरूरी है कि आप कभी सेक्स को गंदा या बुरा ना समझें बल्कि इसे भी लाइफ का महत्वपूर्ण हिस्सा मानें और खुलकर एन्जॉय करें। सकारात्मक सोच :सेक्स के प्रति सकारात्मक सोच जरूरी है। यदि आपको पार्टनर सेक्स को अधिक प्राथमिकता देता है तो इसे गलत समझने की बजाय पॉजिटिव रूप में लीजिए। पार्टनर की सेक्स में दिलचस्पी अंत में आपके प्रति प्यार में ही बदलने वाली है। यदि आप सेक्स में पार्टनर का साथ देंगी तभी उससे अधिक खुल पाएंगी। प्रयोग करें : आपको चाहिए कि आप सेक्&प्त8205;स के लिए नए-नए प्रयोगों को आजमाएं। इससे आपमें आत्मविश्वास बढेगा। ओरल सेक्स या साथ बैठकर कोई इरोटिक फिल्म देखने से परहेज न करें। यह आपकी सेक्स लाइफ में न सिर्फ नयापन लाता है बल्कि आपके बीच सेक्स संबंधी झिझक को खत्म करते हुए नजदीकियों को बढाता है। निडर बनें : सेक्स लाइफ को एन्जॉय करने के लिए महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे मन में शंका ना पालें। ना ही ये सोचें कि उनका पार्टनर उनके बारे में क्या सोचेगा। 

Friday, 27 March 2015

क्या सेक्स के वक्त आप अपने पार्टनर को पूरी खुशी नहीं दे पाती हैं? क्या आपको पता है मर्दों के वो नाजुक अंगस्थल जहां छूने से वे हो जाते हैं चरम सुख देने को बेताब? पुरुषों के 10 ऐसे संवेदनशील अंग, जहां पर हल्का-सा स्पर्श भी उन्हें रोमांचित कर देता है..-------नेक- यहां हल्की-सी छुअन भी उनके शरीर में झनझनाहट पैदा कर सकती है। अगली बार उनकी गर्दन पर गर्म सांसे फेंकते हुए किस करिए, उसके बाद का अहसास आप भूल नहीं पाएंगी। कान कान में ही फुसफुसाने और उसको चूमने तक ही सीमित न रहें, बल्कि कान के पीछे का हिस्सा भी काफी संवेदनशील होता है। उनके कान के टॉप को अपने दांतों से हल्का-सा काटें और वहां पर जोर-जोर से सांसे लें। सेक्स का मजा दोगुना हो जाएगा। हिप मर्दों के हिप काफी सेंसिटिव होते हैं। जब वे आपके उपर छाए हों, या जब भी मौका मिले, उनके हिप्स को जरूर ध्यान में रखें। वहां पर हल्का-सा मसाज भी पुरुषों को बहुत उत्तेजित करता है। त्वचा स्किन मर्दों को उत्तेजित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सेक्स में सबसे ज्यादा यही अंग शामिल रहता है। त्वचा को चूमने, उसे रगड़ने से ब्लड सर्कुलेशन तेज हो जाती है और पुरुषों को उत्तेजित होने में मदद मिलती है। तो अगली बार उन हसीन लम्हों के लिए पूरी तैयारी करके जाइए। एड़‍िया- अपने पार्टनर के पैरों का हल्का-सा मसाज करें, यह न सिर्फ उन्हें जोश दिलाएगा, बल्कि उनकी परफॉर्मेंस को भी कई गुना बढ़ाने में मदद करेगा। और वैसे भी, जब वह ऑफिस से थक-हार कर घर आएंगे, तो एक हल्का सा फुट मसाज उनके लिए बड़ी राहत की वजह बनेगा। फिर तो आराम से खेलिए प्यार वाला खेल। जीभ यह बताने की जरूरत नहीं है कि एक लंबा और प्यारा-सा किस सेक्स के दौरान कितना जरूरी होता है। यह आपके पार्टनर को उत्तेजित करने का सबसे आसान तरीका है। हां, किस करते वक्त यह याद रखें कि हर मूव के बाद इसमें कुछ नयापन हो। पहले हल्का किस, फिर धीरे-धीरे गहरे किस करते रहना चाहिए। और हां, इस दौरान अपनी जीभ का जमकर इस्तेमाल करें। होंठ जैसा कि हमने पहले ही कहा, किस करना प्यार में तड़का लगाने का सबसे कारगर तरीका है। आप अपने पार्टनर के होठों को चूसकर, उन्हें चूमकर उन्हें काफी उत्तेजित कर सकते हैं। उसके बाद तो सेक्स के खूबसूरत अहसास के लिए तैयार रहिए। जांघों का भीतरी हिस्सा यह आपके पार्टनर के लिंग के पास का सबसे करीबी हिस्सा होता है, और यहां हल्की-सी छुअन भी काफी जोश दिला सकती है। तो अगली बार एक कमाल के सेक्स अनुभव के लिए तैयार रहिए। चेहरा क्या आपने कभी नोटिस किया है कि जब आप अपने पार्टनर के चेहरे को छूती हैं, तो उसके चेहरे पर कितनी चमक आ जाती है? मर्दों को लड़कियों द्वारा चेहरा छूना बहुत ही अच्छा लगता है।

सेक्स के वक्त अपनाए यह तरीके तो आपकी गर्लफ्रेंड आजीवन सिर्फ आपके साथ ही बनाएगी सम्बंध

सेक्स के वक्त अपनाए यह तरीके तो आपकी गर्लफ्रेंड आजीवन सिर्फ आपके साथ ही बनाएगी सम्बंध ----सेक्स के लिए सिर्फ उत्साहित और उत्तेजित ही ना हों, उसे जानें, समझें फिर करें। सेक्स की शुरुआत स्पर्श द्वारा होती है। स्पर्श मात्र से ही स्त्री-पुरुष दोनों उत्तेजना का अनुभव करने लगते हैं। सेक्स विशेषज्ञों का कहना है कि सही तरीके से किया गया स्पर्श स्त्री को अत्यंत सुख देता है। शेयर योर सेक्स नॉलेज कहता है कि स्त्री को मैथुन के बजाए स्पर्श से अधिक सुख मिलता है। सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स क्रिया के पहले स्त्री को विशेष रुप से किया गया स्पर्श उसे सेक्स के चरम आनंद का अनुभव कराता है। •सेक्स क्रिया करने से पहले स्त्री के कामुक अंगों के छूने से उनमें उत्तेजना पैदा होती है। •सेक्स क्रिया में स्त्री को उत्तेजित करने के लिए आप अपने हाथों, चेहरे और होंठों से भी उसके कामुक अंगों को स्पर्श कर सकते हैं। •सेक्स क्रिया को सफल और आनंदित बनाने के लिए अपने हाथों से स्त्री के यौन उत्तेजक अंगों को हल्के हाथों से स्पर्श करना चाहिए। •चेहरे से स्त्री के उत्तेजक अंगों को स्पर्श करते हुए लम्बी-लम्बी गर्म सांस छोड़नी चाहिए। अपने होठों से भी स्त्री के यौन उत्तेजक अंगों को स्पर्श करना चाहिए। •सेक्स क्रिया से पहले काम इच्छा को तेज करने के लिए स्त्री को पहले हल्के से अपनी बांहों में भरना चाहिए। इसके बाद जैसे-जैसे स्त्री में उत्तेजना बढ़ती जाए वैसे-वैसे अपनी बांहों को कसते जाए। इस तरह बांहों में भरने से जब उसमें भरपूर उत्तेजना आ जाए तो फिर सेक्स क्रिया करनी चाहिए। •स्त्री को अपनी छाती से लगाकर अपनी दोनों बांहों से आलिंगन में भरने से भी उसमें उत्तेजना तेज होती है। इस तरह स्त्री को बांहों में भरने से वह काफी रोमांचित और उत्तेजित हो जाती है। •सेक्स के प्रति उत्तेजना पैदा करने के लिए स्त्री को अपनी बांहों में भरते हुए उसके स्तनों को हल्के से दबाना व सहलाना भी स्त्री में सेक्स उत्तेजना बढ़ाने की अच्छी क्रिया है। •स्त्री को उत्तेजित करने के लिए उसे दोनों पैरों से जकड़कर उसकी कमर को अच्छी तरह दबाना चाहिए। •सेक्स क्रिया का अधिक आनन्द पाने के लिए आप अपने एक हाथ से स्त्री के गर्दन को आलिंगन करें और दूसरे हाथ से यौनांग को हल्के-हल्के सहलाएं। इस तरह सेक्स से पहले स्त्री के अंगों को छूने एवं सहलाने से भी स्त्री को बेहद आनन्द का अनुभव होता है। •इसके अतिरिक्त स्त्री के स्तनों पर चेहरा रखकर अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को जकड़ने से भी स्त्री की कामोत्तेजना तेज होती है और फिर सेक्स करने से शारीरिक व मानसिक आनन्द का अनुभव होता है। •स्त्री को बांहों में भरने और गोद में उठाने से भी कामोत्तेजना तेज होती है जिसके बाद सेक्स क्रिया में स्त्री-पुरुष दोनों को ही शारीरिक व मानसिक सुख प्राप्त होता है। •सेक्स क्रिया का सही सुख प्राप्त करने के लिए स्त्री को पूरी तरह से बांहों में भरकर दबाना भी सेक्स सुख के लिए अच्छी क्रिया है। ऐसा करने से स्त्री की उत्तेजना तेज हो •सेक्स संबंध बनाने से पहले स्त्री को चुंबन करना चाहिए। पुरुष को चाहिए कि स्त्री के होंठों को पहले हल्के से छूकर चुंबन करें। •स्त्री को बांहों में भरकर उसके होंठों पर लंबा चुंबन लें। इस तरह किये जाने वाले चुंबन से स्त्री में तेज उत्तेजना पैदा होती है। •सेक्स क्रिया करने से पहले स्त्री को बांहों में भरकर अंग-अंग चूमें और बीच-बीच में हाथों से यौनांग को सहलाएं। •स्त्री के बंद होंठों का भरपूर चुंबन लेने से सेक्स उत्तेजना बढ़ती है। •स्त्री के होंठों को अपने मुंह में लेकर चुंबन करने से सेक्स उत्तेजना होंठों की त्वचा और श्लैष्मिक झिल्ली द्वारा सीधे यौनांग तक पहुंच जाती है। •यदि स्त्री के किसी खास अंगों को छोड़कर उसके पूरे शरीर का बार-बार चुंबन लें तो वह भरपूर उत्तेजित हो जाएगी। उसे सेक्स का खूब आनन्द मिलेगा। •आंखों को बन्द करके चुंबन लेने से सेक्स का रोमांच बढ़ता है। इसलिए सेक्स क्रिया में अधिक रोमांच के लिए आंखों को बन्द करके चुंबन करना चाहिए। •स्त्री का भगांकुर सबसे संवेदनशील अंग होता है और इस अंगों में चुंबन लेने से भरपूर सेक्स आनन्द मिलता है। इसके अलावा स्त्री के पूरे शरीर में गुदगुदी करने से भी उत्तेजना बढ़ती है।

सेक्स को दें 'टाइमिंग' का तोहफा, पाएं चुटकियों में चरम सुख

 कहावत भी है कि इंतजार का फल मीठा होता है लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि यह सेक्‍स के दौरान भी लागू होती है। सेक्‍स में इंतजार का फल बेहतर संबंधों के रूप में सामने आता है। सेक्‍स के लिए तड़पाने का भी मजा है, इसलिए थोड़ा उनसे दूर-दूर भी रहें। दूर रहने का मतलब यह नहीं है कि आपको उनसे अलग हो जाना है, या घर के किसी और रूम में चले जाना है। इस दूरी का मतलब है कि वो जितना आपके पास आएं, आप उतनी ही चंचल हो जाएं। इस दौरान थोड़ी-बहुत शरारतें और नोंक-झोंक भी कर सकती हैं। आमतौर पर पार्टनर जब सेक्‍स के मूड में आते हैं, तो बहुत जल्‍दी में रहते हैं। बेड पर जाते ही शुरू होते हैं और अपना सबकुछ तुंरत ही गंवा देते हैं। पार्टनर को थोड़ा इंतजार कराएं और फिर बेड पर जाएं। ऐसा न हो कि जब तक भावनाएं अपने चरम पर न पहुंचे, उससे पहले ही आप बेड पर हों। पार्टनर से सेक्‍स में फोरप्‍ले इंपॉर्टेंट रोल निभाता है। इसलिए सेक्स से पहले फोरप्‍ले में कोई कंजूसी न दिखाएं। इस दौरान आपको एक-दूसरे के इतना करीब होना चाहिए कि आप उनकी सांसे खुद महसूस कर सकें। अच्छा होगा अगर आप दोनों साथ शॉवर लें। इस दौरान पानी में आपकी उंगलियां उनके शरीर के उन हिस्सों को छूती रहेंगी, जिनसे उत्तेजना बढ़ती है। शॉवर के दौरान जी भरकर एक-दूसरे को निहारें, किस करें, आलिगंनबद्ध होकर बिताएं समय साथ। यह बेचैनी प्यार के लिए नजर आनी चाहिए। एक-दूसरे के साथ खेलते हुए आपको कपड़े उतारने हैं। ध्यान रहे कि इसमें से एक भी कदम ऐसा न हो जिससे यह लगे कि आपको बेड पर जाने की कुछ ज्यादा ही बेकरारी है। तभी आप सेक्स का चरम सुख प्राप्त कर पाएंगे व खुद व पार्टनर के बीच 'तृप्त‍ि' का अनुभव हो सकेगा।

Tuesday, 24 March 2015

सेक्‍स टिप्‍स, जो बना देंगे आपको चैंप!

वैसे तो सेक्‍स एक अहसास है जिसे महसूस किया जाता है, लेकिन इस दौरान अगर आप कुछ टिप्‍स अपनाएं तो इसका मजा दुगुना हो जाता है। ये छोटे-छोटे सेक्‍स टिप्‍स हैं, लेकिन इनका असर बहुत ज्‍यादा होता है।


सेक्‍स के दौरान स्‍त्री के ऊपर पुरुष वाला कॉन्‍सेप्‍ट बहुत पुराना और कारगार है, लेकिन हर बार अगर पुरुष ही स्‍त्री के ऊपर रहे तो यह बोरिंग हो जाता है। ऐसे में ज्‍यादा मजा लेने के लिए जरूरी है कि स्त्रियों को ऊपर की स्थिति में लाया जाए। इस पोजिशन में महिलाएं खुद को इस गेम में कंट्रोलर महसूस करती हैं। इससे मस्‍ती में भरपूर इजाफा होता है।


हालांकि इस दौरान यह ध्‍यान रखें कि आप कंफर्टेबल हैं या नहीं। अगर फीमेल पार्टनर ऊपर की पोजिशन में हो, तो वह इस गेम की 'स्‍पीड' को खुद ही कंट्रोल कर सकती है। ऐसे में वह खुद तय कर सकती है कि उसे क्‍या अच्‍छा लग रहा है।


कामक्रीडा के दौरान छूने का विशेष महत्‍व होता है। इसलिए आप पहले ही यह पता कर लें कि शरीर के किस भाग को सहलाने या रगड़ने से आपके पार्टनर को ज्‍यादा उत्तेजना महसूस होती है। इसी के अनुसार कामक्रीडा की शुरुआत करें, इससे आप चरम सुख तक पहुंचते हुए एक अलग ही तरह का अनुभव महसूस करेंगे।


बेडरूम में चॉकलेट सॉस रखें, जिस अंग की ओर अपने पार्टनर का ध्‍यान खींचना हो, इस सॉस को उसके ऊपर अच्‍छे तरीके से लगा लें। इससे बाद अपने हाथों से नहीं जीभ से चॉकलेट सॉस हटाएं। हमेशा बेडरूम में ही सेक्‍स नीरसता ला देता है, इसलिए बीच-बीच में बालकनी, वॉशरूम या गार्डेन जैसी जगहों पर भी खुले तरीके से यौन-संबंध का आनंद लें।


अपने पार्टनर का पूरा फोकस अपनी ओर लाने के लिए सेक्‍सी अंदाज में कराहना या सी-सी की आवाज निकालना भी एक बेहतर तरीका है। वात्‍स्‍यायन ने कामसूत्र में इसे 'सीत्‍कार' कहा है। हर बार एक ही पोजिशन में सेक्‍स न करें. हर बार कुछ न कुछ नया करने की कोशिश करें। अपने पार्टनर से खूब प्‍यार भरी बातें करें. इन प्‍यार भरी बातों में सेक्‍स का नशा घुला हो, तो बात ही क्‍या है।


संबंध बनाने से पहले अगर नहा-धोकर तरोताजा हो लें, तो सेक्‍स का मजा दोगुना हो जाएगा। अपनी आंखें बंद कर लें, इसके बाद ख्‍वाबों की दुनिया में खो जाएं। कल्‍पना करें कि आप उससे संभोग कर रहे हैं, जिससे आपका मन चाह रहा हो।


स्‍त्री के गर्दन पर कोमलता के साथ किस करें। यह भाग भी संवेदनशील होता है. महिलाओं को इस पर चुंबन खूब भाता है। फीमेल पार्टनर को चार्ज होने का पूरा मौका दें। इसके लिए आप चाहे कोई भी तरीका अपना सकते हैं। चीभ के अगले भाग और उंगलियों का पूरा इस्‍तेमाल कर सकते हैं। लगातार संभोग करने की बजाए बीच-बीच में थोड़ी देर का ब्रेक लें। इससे तरोताजा होने का मौका तो मिलेगा ही, सेक्‍स की तलब भी बढ़ेगी।


बेडरूम में भी कलाकारी दिखालाने का मौका न चूकें। चित्रकारी के लिए इस्‍तेमाल किया जाने वाला पेंट ब्रेश लें और इसे अपने पार्टनर के सभी संवेदनशील अंगों पर फिराएं। अच्‍छी तरह स्‍नान करने के बाद बिस्‍तर पर जाकर देह पर शहद की कुछ बूंदे गिरा दें। इसके बाद देखें कि आगे क्‍या-क्‍या होता है। अल्‍कोहल की थोड़ी-सी मात्रा सेक्‍स में जान डाल देती है। यह उत्तेजना बढ़ाने का काफी मददगार साबित होता है. बस इतना ध्‍यान रखें कि कभी भी ज्‍यादा मात्रा में इसका सेवन न करें, नहीं तो मजा किरकिरा हो सकता है।


सेक्‍स के दौरान गहराई से सांस लें। इससे आपको वातावरण खुशनुमा बनाने में मदद मिलेगी। पार्टनर के सभी संवेदनशील अंगों पर जीभ फिराएं और फिर लगातार ऐसी ही शरारतें करें। इसे मजा और बढ़ जाता है।


अगर मौसम गर्म हो, तो बर्फ के कुछ टुकड़े लेकर अपने पार्टनर के संवेदनशील अंगों पर डाल दें। इससे रोमांच और बढ़ जाएगा। इसके अलावा बर्फ का एक टुकड़ा मुंह में रखकर उनके संबेदनशीन अंगों पर फिराए। फिर देखिए कैसे वो बर्फ पहले पिछलकर आपकी बांहों में सिमट जाएगी।

Friday, 20 March 2015

ऐसे पुरूष महिलाओं के आकर्षण का केंद्र होते हैं

महिलाओं के आकर्षण का केंद्र बनने के लिए जो पुरुष अपने रख रखाव को लेकर अधिक चौकन्नें रहते हैं वो जानें क्या सच में महिलाएं आकर्षित हो पाती हैं। आस्ट्रेलिया में हुए एक शोध के अनुसार प्रचलन से अलग अंदाज़ रखने वाले पुरुषों की ओर महिलाएं अधिक आकर्षित होती हैं।
सबसे जुदा दिखने के हैं बहुत से फायदे
अध्ययनकर्ताओं ने अपने अध्ययन के दौरान पाया कि जिस स्थान पर क्लीन शेव पुरुषों की अधिकता होती है उस स्थान पर महिलाएं दाढ़ी अथवा मूंछ वाले पुरुषों को अधिक पसंद करती हैं जबकि जिस स्थान पर मूंछ या दाढ़ी वाले पुरूषों की अधिकता होती है वहां क्लीन शेव पुरुषों को महिलाएं अधिक पसंद करती हैं।
इसके अतिरिक्त यह भी माना गया कि अक्सर महिलाएं अपने रख रखाव को लेकर कम से कम सजग पुरुषों की ओर अधिक खिंची चली जाती हैं।
इससे पूर्व हुए यूरोपीय परिवेश पर आधार‌ित कुछ अन्य शोधों में यह भी पाया गया कि गहरे भूरे रंग के बालों वाले पुरुष महिलाओं के आकर्षण का केंद्र अधिक बनते हैं जबकि पुरुषों के आकर्षण का केंद्र वह महिलाएं अधिक होती हैं जिनका रूप लावण्य उनके किसी परिचित से मिलता जुलता न हो।
पुरुषों के रख रखाव को लेकर यह अपने आप में पहले तरीके का अध्ययन है। यह अध्ययन रॉयल सोसायटी जर्नल बायोलॉजिकल पेपर में प्रकाशित हुआ है।

सेक्स से जुड़े कुछ सच-झूठ

सेक्स ऐसा विषय है जिस पर लगभग हर व्यक्ति बात करने से कतराता है लेकिन एक समय के बाद सेक्स व्‍यक्ति की जरूरत बन जाता है। सेक्स को लेकर लोगों में बहुत से भ्रम व्याप्त है। कुछ लोग सेक्स को बहुत खराब और गंदा मानते हैं तो कुछ सेक्स को अच्छा व मनोरंजन का साधन मानते हैं। कुछ लोग विवाह के बाद सेक्स को अच्छा मानते है तो कुछ के लिए सेक्स मूड की तरह है। सेक्स से जुड़े कई आश्चर्यजनक तथ्य है।
कहते हैं सेक्स स्वास्‍थय के लिए अच्छा होता है, यह सही भी है। लेकिन जरूरी नहीं कि सेक्स हमेशा अच्छा होता है।सेक्स सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक सुख भी देता है इसीलिए जरूरी है कि सेक्स से पहले मानसिक जुड़ाव हो।कहते हैं कि नशे में सेक्स का आनंद दुगुना हो जाता है जबकि यह भ्रम के सिवा कुछ नहीं।यह सच है कि समय से पहले यौन संबंध बनाने से शारीरिक और मानसिक विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता है।एक भ्रम यह भी है कि शादी से पहले सेक्स का वैवाहिक जीवन पर कोई असर नहीं पड़ता लेकिन सच तो यह है शादी से पहले सेक्स करने से वैवाहिक जीवन की खुशी छिनने का खतरा रहता है। यह अवधारणा कि शादी से पहले सेक्स आपको शादी के लिए तैयार करता है, भी बिलकुल गलत है।आपने अक्सर सुना होगा कि जो लोग अपनी सेक्स इच्छाओ को पूरी तरह से खुलकर नहीं बता पाते यानी उनके इस संकोच का कोई अहम कारण है , वो वह किसी बीमारी से ग्रस्त होते है या फिर उनमें कोई कमी है। यह बात भी एक भ्रम है। सेक्स के दौरान खुद पर संयम रखना बेहद जरूरी है।जहां सेक्स के प्रति खुलापन बढ़ा है और युवावर्ग भी विवाहपूर्व संबंध बनाने में कोई गुरेज नहीं करता। ऐसे में उन्हें सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही ली जाने वाली प्रिकॉशंस और कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के बारे में अधिक जानकारी होना भी जरूरी है।यह सही है कि यौन-संबंध एक व्यक्तिगत अधिकार है और इसमे किसी एक के लिए प्रतिबद्धता होना जरूरी है, लेकिन वर्तमान में इस बात का महत्व कम रह गया है।रिश्तों में सेक्स ही प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए बल्कि भावनात्मक जुड़ाव के साथ-साथ आत्मीय संबंध होना भी जरूरी है तभी आप सेक्स के महत्व को समझ सकते हैं।
कहने का अर्थ है कि सेक्स को लेकर किसी भी तरह का भ्रम या आशकांए मन में नही रहनी चाहिए। विवाह के बाद सेक्स करना चाहिए , लेकिन सेक्स के लिए मूड का होना भी जरूरी है।

बैडरूम में कामसूत्र अपनाने के टिप्स

ि आप भी सेक्स करने जा रहे हैं और आप कामसूत्र ग्रंथ के टिप्स को अप्लाई करने जा रहे हैं तो उसमें दिए कुछ टिप्स जरूर अपनाएं। आइए जानें कामसूत्र के तरीके से सेक्स की शुरूआत करने के टिप्स के बारे में।

कमरे की साफ-सफाई- सेक्स की शुरूआत से पहले जरूरी है कि कमरे की अच्छी तरह से साफ-सफाई की गई हो। इतना ही नहीं बैड पर धुली हुई चादर बिछी होनी चाहिए।

* सुगंधित कमरा- यदि आप सेक्स करने जा रहे हैं तो वैसा माहौल भी होना चाहिए जिससे दोनों पार्टनर उस माहौल में अच्छी तरह से रम सकें। ऐसे में कमरे का खुशबूदार होना जरूरी है। कमरे में भीनी-भीनी खुशबू आनी चाहिए। आप चाहे तो आरोमा प्रोडक्ट या फिर परफ्यूम इत्यादि का इस्तेमाल कर सकते हैं।

* सजावट भी है जरूरी - आपको चाहिए‌ कि आप कमरे को अच्छे से सजाएं। कमरे को कैंडल और फूलों से सजाएं। कमरे में सुंदर पेटिंग्स लगी होनी चाहिए। इतना ही नहीं कमरे में लाइट एकदम मंदिम होनी चाहिए। जिससे आप अपने पार्टनर से अपने बेइंतहा प्यार का इजहार कर सकें।

* नहाना है जरूरी- दोनों पार्टनर के लिए कामसूत्र में यह खास हिदायत दी गई है कि माहौल बनाने के साथ-साथ दोनों पार्टनर्स का मन से तैयार होना भी जरूरी है। इसके लिए दोनों को अपने शरीर की साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है। आप दोनों को नहाकर ही कमरे में दाखिल होना चाहिए। इतना ही नहीं पहले पुरूष कमरे में आए और उसके बार महिला को इन्वाइट करें।

* ड्रेस का रखें ख्याल- कामसूत्र के अनुसार महिला और पुरूष दोनों को ही आकर्षक ड्रेस में होना जरूरी है जिससे दोनों एक-दूसरे की तरफ आकर्षित हों साथ ही ऐसे समय में तारीफ करने से ना कतराएं।

* म्यूजिक भी लगाएं- आप चाहे तो कोई इंस्टूमेंट म्यूजिक बजा सकते हैं लेकिन बहुत ही हल्के स्वर में या फिर कोई भी थीम बेस्ड गाना चला सकते हैं। जो कि रोमां‌टिक हो।

बातचीत करें- कामसूत्र के अनुसार, पुरूष को महिला को पहले प्‍यार से बैड पर बैठाना चाहिए उसके बाद बातचीत का सिलसिला आरंभ करना चाहिए। ताकि दोनों की ही झिझक एकदम गायब हो जाए। बातचीत रोमांटिक या फिर एक-दूसरे के बारे में भी हो सकती है। साथ ‌ही पुरूष को पहले महिला के कंधे पर अपना हाथ रखना चाहिए, उसके बाद ही धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए जिससे महिला सहज हो सकें।

* उपहार दें- पुरूष को महिला पार्टनर से प्यार का इजहार करने के लिए कोई उपहार लेकर आना चाहिए और ये भी ख्याल रखें कि आप दोनों के अलावा रूम में कोई तीसरा व्यक्ति प्रवेश ना कर पाएं।

इन टिप्स से आप अपने प्यार का इजहार भी कर सकते हैं और सेक्स की शुरूआत भी शानदार तरीके से कर सकते हैं।

Tuesday, 17 March 2015

संभोगरत स्‍त्री अपनी यौन उत्‍तेजना नाखुनों के खरोंच और गहरे दबाव से दर्शाती है

 आचार्य वात्‍स्‍यायन ने कामसूत्र में नखक्षेद अर्थात संभोग के दौरान नाखुनों से खरोंचने और इसमें निहित उसकी उद्दाम काम भावना का वर्णन किया है। वात्‍स्‍यान का मत है कि काम वासना जब उफान पर होता है तो स्‍त्री-पुरुष उत्‍तेजनावश एक-दूसरे को नोचने-खसोटने से बाज नहीं आते। स्‍त्री की उत्‍तेजना और उसका लज्‍जाजनक स्‍वभाग उनके नाखुनों के तेज खरोंच और गहरे दबाव से पता चल जाता है। पुरुष भी अधिक उत्‍तेजना में अपने नाखुनों व दांत का प्रयोग करता है।

संभोग जब उफान पर होता है और स्‍त्री-पुरुष चर्मोत्‍कर्ष की ओर बढ़ रहे होते हैं तो उनका एक-दूसरे में समा जाने का भाव बढ़ता चला जाता है। नाखुन एक-दूसरे के शरीर में धंसते चले जाते हैं। बाद में दोनों जब अपने इस निशान को देखते हैं तो उनके अंदर फिर से काम वासना भड़क उठती है। प्रेम और काम की बारंबारता के लिए ऐसे निशानों को आचार्य वात्‍स्‍यायन ने जरूरी कहा है।

पुरुष और स्त्रियों द्वारा किन अंगों पर नाखुन गड़ाना चाहिए

* संभोग की तीव्र उत्‍तेजना के क्षण में स्त्रियां अक्‍सर पुरुष की पीठ पर अपने नाखुन का निशान बनाती हैं। वह चरमोत्‍कर्ष के समय विह्वल हो उठती है और आनंदविभोर होकर पुरुष की पीठ, गर्दन, कंधे पर अपने नाखुनों को धंसाती चली जाती हैं। कान और होंठ पर भी वह नाखुन व दांत का निशान बनाने से नहीं चूकती।

* वहीं वासनाग्रस्‍त पुरुष स्त्रियों के स्‍तन, स्‍तन के चुचूक, स्‍तरों के ऊपर की छाती, गर्दन, पेट, जांघ, नितंब, दोनों जांघों के जोड़, पेड़ू और कमर के चारों ओर नाखुनों के निशान बनाता है।

नखक्षत व दांतों के काटने आदि का विधान प्रेम में नयापन लाता है
* आचार्य वात्‍स्‍यायन का मत है कि प्रेम में हमेशा नयापन होना चाहिए ताकि प्रेम कभी पुराना न पड़े। एक-दूसरे के प्रति चाहत हमेशा बरकरार रहे। इसीलिए संभोग के क्षण में नित नए-नए प्रयोग करते रहना चाहिए। नखक्षत व दांतों के काटने आदि का विधान प्रेम में नयापन लाता है।

* आचार्य का मत है कि परदेस यात्रा या लंबे समय के लिए बाहर जाने से पूर्व पुरुष-स्‍त्री गहरे संभोग में उतरें। उस वक्‍त पुरुष अपनी यादगार के रूप में स्‍त्री की जंघाओं, योनि व स्‍तनों पर तीव्र नाखुन का खरोंच लगाना चाहिए। पति के जाने के बाद स्त्रियां जब अपने गुप्‍त स्‍थानों पर नाखूनों के निशान देखती हैं तब वह फिर से प्रेम से भर उठती हैं।

लंबे समय तक वियोग रहने के बाद भी यह निशान उन्‍हें उस रात की याद दिलाता है और उनका प्रेम एक बार फिर से नया हो उठता है। पत्र और आज के समय मोबाइल या फोन के जरिए दोनों उस रात और उस रात पड़े निशान की आपस में चर्चा कर फिर से उस गुदगुदी का अहसास कर सकते हैं। इससे दूरी भी नजदीकी में बदल जाती है। उनका स्‍पष्‍ट मत है कि यदि प्रेम की याद कराने वाला नखक्षत नहीं होता तो बहुत समय के लिए बिछड़े हुए प्रेमियों के प्रेम में कमी आती चली जाएगी।

* यदि कोई अपरिचित स्‍त्री दूर से जब पियाप्‍यारी उस स्‍त्री के स्‍तनों के ऊपर छाती या होंठ पर ऐसे निशान देखती है तो वह समझ जाती है कि यह स्‍त्री अपने पिया की कितनी प्‍यारी होगी। हो सकता है उस स्‍त्री को देखकर उस अजनबी स्‍त्री के अंदर वासना भड़क उठे और वह भी अपने दांपत्‍य जीवन में प्रेम के नएपन की ओर अग्रसर हो।

* कोई युवती जब किसी पुरुष के छाती या पीठ पर नाखुनों के ऐसे निशान देखती है तो उसका मन भी चंचल हो उठता है और वह भी अपने प्रेम भरे जीवन में अनोखपन लाने को उतावला हो उठती है।

* आचार्य का स्‍पष्‍ट मत है कि वासना के भड़कने पर संभोग के क्षण में उसकी अभिव्‍यक्ति के लिए नाखूनों से खरोंचने और दांत गड़ाने के अलावा कोई दूसरा रास्‍ता नहीं है। प्रेम का यह प्रकटीकरण स्‍त्री पुरुष को एक-दूसरे के बेहद नजदीक लाता है।

नुकीले और तेज नाखुन उत्‍तेजना को सही प्रदर्शित करते हैं

कामसूत्र में कहा गया है कि जिन स्‍त्री पुरुष की काम वासना तीव्र होती है, उन्‍हें अपने बाएं हाथ के नाखून नोकीले, ताजा कटे हुए, मैल रहित और फटे हुए नहीं होने चाहिए। संभोग का मजा तभी है, जब नाखुन नुकीले, चिकने व चमकीले हों।

महाराष्‍ट्र की महिलाएं खूब करती हैं नखक्षत का प्रयोग
* आचार्य के अनुसार, गौड़ प्रांत अर्थात मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, गाजियाबाद एवं पूर्व प्रदेश बिहार, बंगाल आदि की महिलाओं के नाखून बड़े-बड़े, हाथ की शोभा बढाने वाले एवं देखने में मोहक होते हैं।

* दक्षिण भारतीय नारियों के नाखुन छोटे, लेकिन गहरे घाव बनाने लायक होते हैं।

* महाराष्‍ट्र की स्त्रियों के नाखुन मझोले होते हैं। महाराष्‍ट्र की महिलाएं संभोग के समय नखक्षत का प्रयोग खूब करती हैं।

सेक्‍स के दौरान स्‍त्री को कब और कैसे होता है चरम तृप्ति का अहसास?

यौन उत्‍तेजना का पहला अनुभव मस्तिष्‍क में होता है। इसके बाद सभी तंत्रिकाओं (नर्व्‍स) में खून तेजी से दौड़ने लगता है। इस कारण संभोगरत स्‍त्री का चेहरा तमतमा उठता है। कान, नाक, आंख, स्‍तन, भगोष्‍ठ व योनि की आंतरिक दीवारें फूल जाती हैं। भगांकुर का मुंड भीतर की ओर धंस जाता है और ह़दय की धड़कने बढ़ जाती हैं। योनि द्वार के अगलबगल स्थित बारथोलिन ग्रंथियों से तरल पदार्थ निकल कर योनि पथ को चिकना बना देता है, जिससे पुरुष लिंग का गहराई तक प्रवेश आसान हो जाता है। डाक्‍टर किंसे के अनुसार, जब तक पुरुष का लिंग स्‍त्री योनि की गहराई तक प्रवेश नहीं करता, तब तक स्‍त्री को पूर्ण आनंद नहीं मिलता है।

उत्‍तेजना के कारण स्‍त्री के गर्भाशय ग्रीवा से कफ जैसा दूधिया गाढ़ा स्राव निकल आता है। गर्भाशय ग्रीवा के स्राव के कारण गर्भाशय मुख चिकना हो जाता है, जिससे पुरुष वीर्य और उसमें मौजूद शुक्राणु आसानी से तैरते हुए उसमें चले जाते हैं।
काम में संतुष्टि का अनुभव
यौन उत्‍तेजना के समय स्‍त्री की योनि के भीतर व गुदाद्वार के पास की पेशियां सिकुड़ जाती हैं। ये रुक-रुक कर फैलती और सिकुड़ती रहती है। यह इस बात का प्रमाण है कि स्‍त्री संभोग में पूरी तरह से संतुष्‍ट हो गई हैं। पुरुष अपने लिंग के ऊपर पेशियों के फैलने सिकुड़ने का अनुभव कर सकता है।
स्‍त्री आर्गेज्‍म की कई अवस्‍था
* संभोग काल में हर स्‍त्री की चरम तृप्ति एक समान नहीं होती है। हर स्‍त्री के आर्गेज्‍म अनुभव अलग होता है। डॉ विलि, वैंडर व फिशर के अनुसार, चरमतृप्ति या आर्गेज्‍म प्राप्ति काल में स्‍त्री की योनि द्वार, भगांकुर, गुदापेशी व गर्भाशय मुख के पास की पेशियां तालबद्ध रूप में फैलने व सिकुड़ने लगती है। कभी-कभी ये पांचों एक साथ गतिशील हो जाती है, उस समय स्‍त्री के आनंद की कोई सीमा नहीं रह जाती है।
* कोई स्‍त्री अनुभव करती है कि उसका गर्भाशय एक बार खुलता फिर बंद हो जाता है। इसमें कई स्त्रियों के मुंह से सिसकारी निकलने लगती है।
* कुछ स्त्रियों में संपूर्ण योनि प्रदेश, गुदा से लेकर नाभि तक में सुरसुराहट की तरंग उठने लगती है। कई बार यह तरंग जांघों तक चली जाती है। उस समय स्‍त्री के चरम आनंद का ठिकाना नहीं रहता।
* कुछ स्त्रियों को लगता है कि उनकी योनि के भीतर गुब्‍बारे फूट रहे हैं या फिर आतिशबाजी हो रही है। यह योनि के अंदर तीव्र हलचल का संकेत है, जो स्‍त्री को सुख से भर देता है।
आर्गेज्‍म काल में स्‍त्री की दशा
डॉ विलि, वैंडर व फिशर के अनुसार, जिस वक्‍त संभोग में स्‍त्री को आर्गेज्‍म की प्राप्ति होती रहती है उस वक्‍त उसकी आंखें मूंद जाती है, स्‍तन के कुचाग्र फड़कने लगते हैं, कानों के अंदर झनझनाहट उठने लगती है, शरीर में हल्‍कापन महसूस होता है, मन सुख की लहर दौड़ पड़ती है, प्रियतम के प्रति प्रेम से मन भर उठता है और कई बार हल्‍की भूख का भी अहसास होता है। कई स्त्रियों को पेशाब लग जाता है।
पुरुष में वीर्यपात तो स्‍त्री में क्‍या?
पुरुष के आर्गेज्‍म काल में उसके लिंग से वीर्य का स्राव होता है, जिसमें उसे आनंद की प्राप्ति होती है। लेकिन आर्गेज्‍म की अवस्‍था में स्‍त्री में ऐसा कोई स्राव होता है या नहीं, कामकला के विद्वानों में इस बात को लेकर मतभेद है। डॉ विलि, वैंडर व फिशर के मतानुसार, अधिक कामोत्‍तेजना के समय स्‍त्री का गर्भाशय सिकुड़ता है, जिससे गर्भाशय का श्‍लैष्मिक स्राव योनि में गिर पड़ता हैा बहुत से स्त्रियों के गर्भाशय से कफ जैसा पदार्थ निकलता है और संपूण योनि पथ को गीला कर देता है। इस स्राव में चिपचिपाहट होती है।

Monday, 16 March 2015

खेलें प्‍यार में चुंबन का जुआ

स्‍त्री पुरुष जब संभोग के आनंद से सराबोर होने के क्षण में होते हैं तो उस क्षण में नाखुन गड़ाने, चुंबनों की बौछार करने आदि से वे नहीं हिचकते। यह सब स्‍वत: चरमोत्‍कर्ष के निकट जाने के क्रम में होता चला जाता है। वात्‍स्‍यायन का मत है कि चुंबन, नखछेद, दशनछेद, प्रहणन और संभोग के समय पुरुष लिंग और योनि से घर्षण की वजह से मुंह से निकलने वाले सीत्‍कार पर किसी का जोर नहीं रहता है। इनके वशीभूत होकर स्‍त्री पुरुष बस आनंद के नाव में हिलकोरे लेना चाहते हैं।
वात्‍स्‍यायन एवं अन्‍य काम कला विद्वानों ने अधर (निचले होंठ) चुंबन के कई भेद बताए हैं, जिन्‍हें यहां वर्णित किया जा रहा है-
* प्रथम संभोग में चुंबन का अधिक प्रयोग नहीं हो पाता है क्‍योंकि उस वक्‍त तक पुरुष नारी का विश्‍वास नहीं हासिल कर पाता है और उनके बीच एक झिझक की दीवार खड़ी रहती है।
* संभोग की बारंबारता के दौरान हर अंग पर तरह-तरह से चुंबन अंकित करना चाहिए, जिससे प्रेम की आग भड़क उठे और संभोग आनंददायक बन जाए।
* मस्‍तक, गाल, पुरुष का सीना, नारी के स्‍तन, होंठ, मुख का भीतरी भाग, जिह्वा, दोनों जांघों के जोड़, बगल (कांख), नाभि आदि ऐसे केंद्र हैं, जहां चुंबन की बारंबारता से उत्‍तेजना बढ़ती है।
स्त्रियों के लिए चुंबन के तीन प्रकार बताए गए हैं
निमित्‍तक- शुरुआती मुलाकात में जब प्रेमी प्रेमिका से चुंबन का आग्रह करे और प्रेमिका को शर्म आ रही हो तो वह केवल निमित्‍त बन जाए। प्रेमिका आंखें बंद कर अपना होठ धीरे से बढ़ा दे ताकि प्रेमी उसके अधर पर अपने होंठ रख सके। पुरुष को पहला चुंबन हल्‍के अंदाज में ही लेना चाहिए ताकि पहले चुंबन की गुदगुदी का अहसास आजीवन बनी रहे।
स्‍फुरितक- जब प्रेमिका की लज्‍जा थोड़ी कम हो जाए तो दोनों चुंबन का खेल शुरू कर सकते हैं। प्रेमी अब अपना होंठ प्रेमिका के मुख में डाले तो प्रेमिका को चाहिए कि उसके होंठ को अपने दोनों होठों के बीच लेकर उसे हल्‍के से दबाए। इस बीच वह अपने निचले होठों को हल्‍का फड़काए और ऊपरी होंठ को स्थिर रखे। इससे प्रेमी को ऐसा अहसास होता है कि प्रेमिका उस पर अहसान कर रही है। और पुरुष की यह खासियत है कि जब स्‍त्री प्रेम के दौरान उस पर अहसान जताती है तो वह उस पर मर मिटता है।
घट्टितक- यह उस प्रेमिका के लिए है जिसकी लज्‍जा अपने प्रेमी के समक्ष समाप्‍त हो चुकी है और उसमें प्रेम में पहल करने की उमंग हिलकोरे ले रही है। वह अपने होंठ से पुरुष के होंठ पूरी तरह से दबा लेती है। वह अपनी आंखें बंद कर लेती है और पुरुष की आंखें अपने हाथों से ढंक लेती है और फिर कभी होठों को चूसती है तो कभी जिह्वा की नोक से उसके होठों व जिह्ववा को रगड़ती रहती है। वैज्ञानिकों का मत भी है इसमें यौन हार्मोन का जबरदस्‍त स्राव होता है और दोनों एक-दूसरे में पिघलने के लिए व्‍याकुल हो उठते हैं। चुंबन की यह प्रक्रिया शराब से भी अधिक नशीली होती है।
स्‍त्री पुरुष दोनों की सहभागिता वाला चुंबन
* सम- इसमें स्‍त्री पुरुष दोनों एक दूसरे के अधरों को सामन रूप से चूसते हुए आनंद पाते हैं
* तिर्यक- प्रेमी प्रेमिका थोड़े तिरछे होकर अपने होठों को गोलाई में लाकर चुंबन करते हैं
* उदभ्रांत- दोनों एक दूसरे का सिर व टोढी पकड़ कर मुंह को अपनी ओर घुमाकर चूमते हैं
* पीडि़तक- अधर व जिह्वा की नोक का प्रयोग करते हुए एक दूसरे को चूमना व चूसना। इसमें प्रेमपूर्ण पीड़ा का अहसास होता है। ऐसा अत्‍यधिक उत्‍तेजना के क्षण में स्‍वत: होता चला जाता है। इस पीड़ा में भी दोनों को मजा आता है।
* अवपीडि़तक- प्रेमी प्रेमिका एक दूसरे के निचले होठों को अंगूठे व तर्जनी उंगली से पकड़ कर गोल बना दें और फिर उसे अपने होंठ से दबाएं।
चुंबन का जुआ
संभोग के क्षणो में छेड़छाड़ संभोग को आनंद दायक बना देता है। वैसे आज अधिकांश दांपत्‍य जीवन में छेड़छाड़ व प्‍यार की कमी और एकरसता व नीरसता का जोर है। प्रेम व संभोग के क्षण भी रूटीन होकर रह गए हैं। पुरुष केवल वीर्यपात और संतान प्राप्ति के लिए और महिलाएं पुरुष साथी की इच्‍छा रखने के लिए संभोग क्रिया को अंजाम देती हैं, जिससे न प्रेम व संभोग की वास्‍तविक पहचान हो जाती है और न ही उन्‍नत श्रेणी की आत्‍मा वाली संतान ही पैदा हो रही है।
आचार्य वात्‍स्‍यायन का मत है कि संभोग की शुरुआत करते हुए चुंबन आदि का जुआ खेलना चाहिए। स्‍त्री पुरुष एक-दूसरे से छेड़छाड़ करते हुए एक दूसरे के निचले होठ को अपने होठ से पकड़ने का प्रयास करे और जो सबसे पहले निचले होंठ को पकड़ ले उसे जीता हुआ माना जाए। फिर उसकी आज्ञा के अनुसार दूसरा संपूर्ण यौन क्रिया में व्‍यवहार करे।
हारने वाले का भी अपना मजा है। यदि प्रेमिका हार जाए तो वह प्रेमी पर बेईमानी का आरोप लगाए, उसके होठों को दांत से काट कर भागे, अपना होंठ उसके जकड़न से छ़ड़ाने के लिए मनुहार करे, पीठ फेर ले-ऐसे गुण प्रेम को हजार गुना बढ़ा देते हैं और दोनों का संबंध प्रगाढ़तम होता चला जाता है।

संभोग में सीधे प्रवेश की जगह करें चुंबन से शुरुआत


संभोग में सीधे प्रवेश की जगह दंपत्तियों के एक-दूसरे को चूमना, सहलाना और छेड़छाड़ करने से प्‍यार प्रगाढ़ होता है। फिर संभोग केवल एक वासना नहीं होकर, प्‍यार बन जाता है। कामसूत्र में प्‍यार में गहरे उतरने से पहले चुंबन की सलाह दी गई हैा ऊपरी होंठ व अधर (निचले होंठ) के चुंबन में एक नशा सा छाता जाता है और स्‍त्री पुरुष प्‍यार में सरोबार होते चले जाते हैं। जब नशा धीरे-धीरे बढ़ने लगात है तो चुंबन का दायरा, होंठ, मस्‍तक, आंख और गाल से नीचे उतरते हुए स्‍तन, उसके चुचूक, बगलों, नाभी, जांघों के जोड़ और फिर उसके नीचे सरकता चला जाता है। बदन के हर हिस्‍से में किया गया चुंबन, प्रेमियों के अंदर प्‍यार की ज्‍वार उत्‍पन्‍न कर देता है जो आखिर में संभोग में स्‍खलन के बाद ही उतरता है।

वात्‍स्‍यायन ने लिखा है कि होंठों व मुख के अलावा किए जाने वाले चुंबन का चार भेद है (kissing tips)-
*सम- यह चुंबन दोनों जांघों के जोड़, नितंब, बगलों और स्‍त्री द्वारा पुरुष के सीने पर किया जाता है
*पीडि़त- यह चुंबन स्‍तनों, दोनों गालों, नाभी और नाभी के नीचे पेड़ू पर किया जाता है
*अंचित- यह स्‍तनों और दोनों बगलों(कांख) पर किया जाता है
*मृदु- यह ललाट एवं आंखों पर किया जाता है
चुंबन भड़काती है वासना की आग- यह स्‍त्री या पुरुष में से कोई सो रहा हो और उसके दूसरे साथी का मन प्‍यार के लिए मचल रहा हो तो वह सोते हुए साथी पर चुंबनों की बौछार करते हुए उसे जगाने की चेष्‍टा करता है। इससे सोए हुए साथी के अंदर भी वासना भड़क उठती है और दोनों प्‍यार में सराबोर हो जाते हैं।

काम में मशगुल साथी को रिझाए- जब एक साथी काम में मशगुल हो और दूसरे का मन प्‍यार करने के लिए तड़प रहा हो तो वह उस पर सवार होकर चुंबनों की बौझार कर सकता है। इससे दूसरा साथी समझ जाता है कि उसका साथी क्‍या चाह रहा है। आज के संदर्भ में लैपटॉप और फेसबुक पर व्‍यस्‍त साथी को बिस्‍तर पर लाने के लिए चुंबन से बेहतर कोई हथियार नहीं हो सकता। यह चुंबन हर तरह के मर्यादा को तोड़ने वाली हो तो कितना ही व्‍यस्‍त साथी हो, संभोग के लिए मचल उठेगा।
संभोग के प्रति उदासीन साथी में भी भरता है रोमांच- संभोग के प्रति यदि एक साथी काफी दिनों से उदासीनता भरा बर्ताव कर रहा हो तो उसके अंदर इच्‍छा जागृत करने के लिए पहले उसके शरीर की मालिश से शुरुआत करनी चाहिए। फिर मसाज के साथ-साथ एक-एक अनावृत अंग पर गर्म होठों की तपिश उसके अंदर चिंगारी भड़काना शुरू कर देता है।
ऐसे क्षण में जांघों पर किया जाने वाला चुंबन सीधे तीर की तरह सारे बदन में उतर जाता है और सिहरन पैदा कर देता है। फिर पैर, उसकी ऊंगलियों व उसके पोरों पर चुंबन और उसे मुंह में भरकर चूसने की प्रक्रिया उदासीन साथी को संभोग के लिए आतुर कर देगा।
सेक्स में कैसे आती है उत्तेजना

पेनिस (लिंग) में इरेक्शन विचार से होता है, स्पर्श से होता है। दिमाग में एक सेक्स सेंटर है। जब वह उत्तेजित होता है तो संदेश लिंग की तरफ जाता है। बदन में खून का प्रवाह तेज हो जाता है। पूरे शरीर में पेनिस में खून का प्रवाह सबसे ज्यादा तेज होता है। इसी वजह से लिंग में उत्तेजना ओर स्त्रियों की योनि में गीलापन आता है। पेनिस के इरेक्शन के लिए योग्य हॉर्मोन का होना जरूरी है। पुरुषों में 60 साल के बाद और महिलाओं में 45 साल के बाद हॉर्मोन की कमी होने लगती है।

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन क्या है: सेक्स के दौरान या उससे पहले पेनिस में इरेक्शन (तनाव) के खत्म हो जाने को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या नपुंसकता कहते हैं। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कई तरह का हो सकता है। हो सकता है, कुछ लोगों को बिल्कुल भी इरेक्शन न हो, कुछ लोगों को सेक्स के बारे में सोचने पर इरेक्शन हो जाता है, लेकिन जब सेक्स करने की बारी आती है, तो पेनिस में ढीलापन आ जाता है। इसी तरह कुछ लोगों में पेनिस वैजाइना के अंदर डालने के बाद भी इरेक्शन की कमी हो सकती है। इसके अलावा, घर्षण के दौरान भी अगर किसी का इरेक्शन कम हो जाता है, तो भी यह इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की निशानी है।

इरेक्शन सेक्स पूरा हो जाने के बाद यानी इजैकुलेशन के बाद खत्म होना चाहिए। कई बार लोगों को वहम भी हो जाता है कि कहीं उन्हें इरेक्टाइल डिस्फंक्शन तो नहीं। सीधी सी बात है कि आप जिस काम को करने की कोशिश कर रहे हैं, वह काम अगर संतुष्टिपूर्ण तरीके से कर पाते हैं तो सब ठीक है और नहीं कर पा रहे हैं तो समस्या हो सकती है। जिन लोगों में यह दिक्कत पाई जाती है, वे चिड़चिड़े हो सकते हैं और उनका कॉन्फिडेंस लेवल भी कम हो सकता है। वजह: इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह शारीरिक भी हो सकती है और मानसिक भी। अगर किसी खास समय इरेक्शन होता है और सेक्स के समय नहीं होता, तो इसका मतलब यह समझना चाहिए कि समस्या मानसिक स्तर की है। खास समय इरेक्शन होने से मतलब है- सुबह सोकर उठने पर, पेशाब करते वक्त, मास्टरबेशन के दौरान या सेक्स के बारे में सोचने पर। अगर इन स्थितियों में भी इरेक्शन नहीं होता तो समझना चाहिए कि समस्या शारीरिक स्तर पर है। अगर समस्या मानसिक स्तर पर है तो साइकोथेरपी और डॉक्टरों द्वारा बताई गई कुछ सलाहों से समस्या सुलझ जाती है।


- शारीरिक वजह ये चार हो सकती हैं : चार छोटे एस (S) बड़े एस यानी सेक्स को प्रभावित करते हैं। ये हैं : शराब, स्मोकिंग, शुगर और स्ट्रेस।
- हॉर्मोंस डिस्ऑर्डर्स इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की एक खास वजह है।
- पेनिस के सख्त होने की वजह उसमें खून का बहाव होता है। जब कभी पेनिस में खून के बहाव में कमी आती है तो उसमें पूरी सख्ती नहीं आ पाती और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। कुछ लोगों के साथ ऐसा भी होता है कि शुरू में तो पेनिस के अंदर ब्लड का फ्लो पूरा हो जाता है, लेकिन वैजाइना में एंटर करते वक्त ब्लड का यह फ्लो वापस लौटने लगता है और पेनिस की सख्ती कम होने लगती है।
- नर्वस सिस्टम में आई किसी कमी के चलते भी यह समस्या हो सकती है। यानी न्यूरॉलजी से जुड़ी समस्याएं भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह हो सकती हैं।
- हमारे दिमाग में सेक्स संबंधी बातों के लिए एक खास केंद्र होता है। इसी केंद्र की वजह से सेक्स संबंधी इच्छाएं नियंत्रित होती हैं और इंसान सेक्स कर पाता है। इस सेंटर में अगर कोई डिस्ऑर्डर है, तो भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन हो सकता है।
- कई बार लोगों के मन में सेक्स करने से पहले ही यह शक होता है कि कहीं वे ठीक तरह से सेक्स कर भी पाएंगे या नहीं। कहीं पेनिस धोखा न दे जाए। मन में ऐसी शंकाएं भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह बनती हैं। इसी डर की वजह से लॉन्ग-टर्म में व्यक्ति सेक्स से मन चुराने लगता है और उसकी इच्छा में कमी आने लगती है।
- डॉक्टरों का मानना है कि 80 फीसदी मामलों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह शारीरिक होती है, बाकी 20 फीसदी मामले ऐसे होते हैं जिनमें इसके लिए मानसिक कारण जिम्मेदार होते हैं।
ट्रीटमेंट
पहले इस समस्या को आहार-विहार और कसरत करने से ठीक करने की कोशिश की जाती है, लेकिन जब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता तो कोई भी ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर समस्या की असली वजह का पता लगाते हैं। इसके लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। वजह के अनुसार आमतौर पर इलाज के तरीके ये हैं:
1. हॉर्मोन थेरपी : अगर इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह हॉर्मोन की कमी है तो हॉर्मोन थेरपी की मदद से इसे दो से तीन महीने के अंदर ठीक कर दिया जाता है। इस ट्रीटमेंट का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।
2. ब्लड सप्लाई : जब कभी पेनिस में आर्टरीज की ब्लॉकेज की वजह से ब्लड सप्लाई में कमी आती है, तो दवाओं की मदद से इस ब्लॉकेज को खत्म किया जाता है। इससे पेनिस में ब्लड की सप्लाई बढ़ जाती है और उसमें तनाव आने लगता है।
3. सेक्स थेरपी : कई मामलों में समस्या शारीरिक न होकर दिमाग में होती है। ऐसे मामलों में सेक्स थेरपी की मदद से मरीज को सेक्स संबंधी विस्तृत जानकारी दी जाती है, जिससे वह अपने तरीकों में सुधार करके इस समस्या से बच सकता है।
4. वैक्यूम पंप, इंजेक्शन थेरपी और वायग्रा : वैक्यूम पंप, इंजेक्शन थेरपी और वायग्रा जैसे ड्रग्स की मदद से भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को दूर किया जा सकता है। वैसे कुछ डॉक्टरों का मानना है कि वैक्यूम पंप और इंजेक्शन थेरपी अब पुराने जमाने की बात हो चुकी हैं।
- वैक्यूम पंप : आजकल बाजार में कई तरह के वैक्यूम पंप मौजूद हैं। रोज अखबारों में इसके तमाम ऐड आते रहते हैं। इसकी मदद से बिना किसी साइड इफेक्ट के इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का हल निकाला जा सकता है। वैक्यूम पंप एक छोटा सा इंस्ट्रूमेंट होता है। इसकी मदद से पेनिस के चारों तरफ 100 एमएम (एचजी) से ज्यादा का वैक्यूम बनाया जाता है जिससे पेनिस में ब्लड का फ्लो बढ़ने लगता है, और तीन मिनट के अंदर उसमें पूरी सख्ती आ जाती है। लगभग 80 फीसदी लोगों को इससे फायदा हो जाता है। चूंकि इसमें कोई दवा नहीं दी जाती है, इसलिए इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। वैक्यूम पंप आमतौर पर उन लोगों के लिए है जो 50 की उम्र के आसपास पहुंच गए हैं। यंग लोगों को इसकी सलाह नहीं दी जाती है, फिर भी जो भी इसका इस्तेमाल करे, उसे डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।
- वायग्रा : इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के लिए वायग्रा का इस्तेमाल अच्छा ऑप्शन है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी भी सूरत में बिना डॉक्टरी सलाह के नहीं करना चाहिए। वायग्रा में मौजद तत्व उस केमिकल को ब्लॉक कर देते हैं, जो पेनिस में होने वाले ब्लड फ्लो को रोकने के लिए जिम्मेदार है। इससे पेनिस में ब्लड का फ्लो बढ़ जाता है और फिर इरेक्शन आ जाता है। वायग्रा इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को ठीक करने में फायदेमंद तो साबित होती है, लेकिन यह महज एक टेंपररी तरीका है। इससे समस्या की वजह ठीक नहीं होती।
इनका असर गोली लेने के चार घंटे तक रहता है। वायग्रा बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए। कई मामलों में इसे लेने के चलते मौत भी हुई हैं। गोली लेने के 15 मिनट बाद असर शुरू हो जाता है।
अगर हाई और लो ब्लडप्रेशर, हार्ट डिजीज, लीवर से संबंधित रोग, ल्यूकेमिया या कोई एलर्जी है तो वायग्रा लेने से पहले विशेष सावधानी रखें और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ही चलें।
- सर्जरी : जब ऊपर दिए गए तरीके फेल हो जाते हैं, तो अंतिम तरीके के रूप में पेनिस की सर्जरी की जाती है।
प्रीमैच्योर इजैकुलेशन
प्रीमैच्योर इजैकुलेशन या शीघ्रपतन पुरुषों का सबसे कॉमन डिस्ऑर्डर है। सेक्स के लिए तैयार होते वक्त, फोरप्ले के दौरान या पेनिट्रेशन के तुरंत बाद अगर सीमेन बाहर आ जाता है, तो इसका मतलब प्रीमैच्योर इजैकुलेशन है। ऐसी हालत में पुरुष अपनी महिला पार्टनर को पूरी तरह संतुष्ट किए बिना ही फारिग हो जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पुरुष का अपने इजैकुलेशन पर कोई अधिकार नहीं होता। आदर्श स्थिति यह होती है कि जब पुरुष की इच्छा हो, तब वह इजैकुलेट करे, लेकिन प्रीमैच्योर इजैकुलेशन की स्थिति में ऐसा नहीं होता।
- सेरोटोनिन जैसे न्यूरो ट्रांसमिटर्स की कमी से प्रीमैच्योर इजैकुलेशन की समस्या हो सकती है।
- यूरेथेरा, प्रोस्टेट आदि में अगर कोई इंफेक्शन है, तो भी प्रीमैच्योर इजैकुलेशन हो सकता है।
- दिमाग में मौजूद सेक्स सेंटर एरिया में अगर कोई डिस्ऑर्डर है तो भी सीमेन का डिस्चार्ज तेजी से होता है।
- कुछ लोगों के पेनिस में उत्तेजना पैदा करने वाले न्यूरोट्रांसमिटर्स ज्यादा संख्या में होते हैं। इनकी वजह से ऐसे लोगों में टच करने के बाद उत्तेजना तेजी से आ जाती है और वे जल्दी क्लाइमैक्स पर पहुंच जाते हैं।
- कई बार एंग्जायटी, टेंशन और सीजोफ्रेनिया की वजह से भी ऐसा हो सकता है।
दवाएं : प्रीमैच्योर इजैकुलेशन की वजह को जानने के बाद उसके मुताबिक खाने की दवाएं दी जाती हैं। इनकी मदद से प्रीमैच्योर इजैकुलेशन को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसमें करीब दो महीने का वक्त लगता है। इन दवाओं के कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हैं।
इंजेक्शन थेरपी: अगर खाने की दवाओं से काम नहीं चलता तो इंजेक्शन थेरपी दी जाती है। इनसे तीन मिनट के अंदर पेनिस हार्ड हो जाता है और यह हार्डनेस 30 मिनट तक बरकरार रहती है। इसकी मदद से कोई भी शख्स सही तरीके से सेक्स कर सकता है। ये इंजेक्शन कुछ दिनों तक दिए जाते हैं। इसके बाद खुद-ब-खुद उस शख्स का अपने इजैकुलेशन पर कंट्रोल होने लगता है और फिर इन इंजेक्शन को छोड़ा जा सकता है।
टोपिकल थेरपी : यह टेंपररी ट्रीटमेंट है। इसमें कुछ खास तरह की क्रीम का यूज किया जाता है। इन क्रीम की मदद से डिस्चार्ज का टाइम बढ़ जाता है। इनका भी कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।
सेक्स थेरपी : दवाओं के साथ मरीज को कुछ एक्सरसाइज भी सिखाई जाती हैं। ये हैं :
स्टॉप स्टार्ट टेक्निक : पार्टनर की मदद से या मास्टरबेशन के माध्यम से उत्तेजित हो जाएं। जब आपको ऐसा लगे कि आप क्लाइमैक्स तक पहुंचने वाले हैं, तुरंत रुक जाएं। खुद को कंट्रोल करें और सुनिश्चित करें कि इजैकुलेशन न हो। लंबी गहरी सांस लें और कुछ पलों के लिए रिलैक्स करें। कुछ पलों बाद फिर से पेनिस को उत्तेजित करना शुरू कर दें। जब क्लाइमैक्स पर पहुंचने वाले हों, तभी रोक लें और रिलैक्स करें। इस तरह बार बार दोहराएं। कुछ समय बाद आप महसूस करेंगे कि शुरू करने और स्टॉप करने के बीच का समय धीरे धीरे ज्यादा हो रहा है। इसका मतलब है कि आप पहले के मुकाबले ज्यादा समय तक टिक रहे हैं। लगातार प्रैक्टिस करने से इजैकुलेशन कब हो इस पर काबू पाया जा सकता है।
कीजल एक्सरसरइज : कीजल एक्सरसाइज न सिर्फ प्रीमैच्योर इजैकुलेशन को कंट्रोल करने में सहायक है, बल्कि प्रोस्टेट से संबंधित समस्याएं भी इससे ठीक की जा सकती हैं। इसके लिए पेशाब करते वक्त स्क्वीज, होल्ड, रिलीज पैटर्न अपनाना होता है। यानी पेशाब का फ्लो शुरू होते ही मसल्स का स्क्वीज करें, कुछ पलों के लिए रुकें और फिर से रिलीज कर दें। इस दौरान इस प्रॉसेस का बार बार दोहराएं। इन सेक्स एक्सरसाइज की प्रैक्टिस अगर कोई शख्स चार हफ्ते तक लगातार कर लेता है तो उसके बाद वह 8 से 10 मिनट तक बिना इजैकुलेशन के इरेक्शन बरकरार रख सकता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि काफी टाइम बाद सेक्स करने से भी व्यक्ति जल्दी स्खलित हो जाता है। ऐसे मामलों में इन एक्सरसाइजों को कर लिया जाए तो इस समस्या से भी निजात पाई जा सकती है।
मास्टरबेशन
सेक्स के दौरान पेनिस जो काम योनि में करता है, वही काम मास्टरबेशन के दौरान पेनिस मुट्ठी में करता है। मास्टरबेशन युवाओं का एक बेहद सामान्य व्यवहार है। जिन लोगों के पार्टनर नहीं हैं, उनके साथ-साथ मास्टरबेशन ऐसे लोगों में भी काफी कॉमन है, जिनका कोई सेक्सुअल पार्टनर है। जिन लोगों के सेक्सुअल पार्टनर नहीं हैं या जिनके पार्टनर्स की सेक्स में रुचि नहीं है, ऐसे लोग अपनी सेक्सुअल टेंशन को मास्टरबेशन की मदद से दूर कर सकते हैं। जो लोग प्रेग्नेंसी और एसटीडी के खतरों से बचना चाहते हैं, उनके लिए भी मास्टरबेशन उपयोगी है।
नॉर्मल: मास्टरबेशन बिल्कुल नॉर्मल है। सेक्स का सुख हासिल करने का यह बेहद सुरक्षित तरीका है और ताउम्र किया जा सकता है, लेकिन अगर यह रोजमर्रा की जिंदगी को ही प्रभावित करने लगे तो इसका सेहत और दिमाग दोनों पर गलत असर हो सकता है।
कुछ तथ्य
- सामान्य सेक्स के तीन तरीके होते हैं - पार्टनर के साथ सेक्स, मास्टरबेशन और नाइट फॉल। अगर पार्टनर से सेक्स कर रहे हें तो जाहिर है सीमेन बाहर आएगा। सेक्स नहीं करते, तो मास्टरबेशन के जरिये सीमेन बाहर आएगा। अगर कोई शख्स यह दोनों ही काम नहीं करता है तो उसका सीमेन नाइट फॉल के जरिये बाहर आएगा। सीमेन सातों दिन और चौबीसों घंटे बनता रहता है। सीमेन बनता रहता है, खाली होता रहता है।
- मास्टरबेशन करने से कोई शारीरिक या मानसिक कमजोरी नहीं आती।
- पेनिस में जितनी बार इरेक्शन होता है, उतनी बार मास्टरबेशन किया जा सकता है। इसकी कोई लिमिट नहीं है। हर किसी के लिए अलग-अलग दायरे हैं।
- इससे बाल गिरना, आंखों की कमजोरी, मुंहासे, वजन में कमी, नपुंसकता जैसी समस्याएं नहीं होतीं।
- सीमेन की क्वॉलिटी पर कोई असर नहीं होता। न तो सीमेन का कलर बदलता और न वह पतला होता है।
- इससे पेनिस के साइज पर भी कोई असर नहीं होता। जो लोग कहते हैं कि मास्टरबेशन से पेनिस का टेढ़ापन, पतलापन, नसें दिखना जैसी समस्याएं हो जाती हैं, वे खुद भी भ्रम में हैं और दूसरों को भी भ्रमित कर रहे हैं।
- कुछ लोगों को लगता है कि मास्टरबेशन करने के तुरंत बाद उन्हें कुछ कमजोरी महसूस होती है, लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता। यह मन का वहम है।
- मास्टरबेशन एड्स और रेप जैसी स्थितियों को रोकने का अच्छा तरीका है।
- कामसूत्र या आयुर्वेद में कहीं यह नहीं लिखा है कि मास्टरबेशन बीमारी है।
- 13-14 साल की उम्र में लड़कों को इसकी जरूरत होने लगती है। कुछ लोग शादी के बाद भी सेक्स के साथ-साथ मास्टरबेशन करते रहते हैं। यह बिल्कुल नॉर्मल है।
मिथ्स क्या हैं
1. पेनिस का साइज छोटा है तो सेक्स में दिक्कत होगी। बड़ा पेनिस मतलब सेक्स का ज्यादा मजा।
सचाई : छोटे पेनिस की बात नाकामयाब दिमाग में ही आती है। दुनिया में ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे पेनिस के स्टैंडर्ड साइज का पता किया सके। वैजाइना की सेक्सुअल लंबाई छह इंच होती है। इसमें से बाहरी एक तिहाई हिस्सा यानी दो इंच में ही ग्लांस तंतु होते हैं। अगर किसी महिला को उत्तेजित करना है, तो वह योनि के बाहरी एक तिहाई हिस्से से ही उत्तेजित हो जाएगी। जाहिर है, अगर उत्तेजित अवस्था में पुरुष का लिंग दो इंच या उससे ज्यादा है, तो वह महिला को संतुष्ट करने के लिए काफी है। ध्यान रखें, खुद और अपने पार्टनर की संतुष्टि के लिए महत्वपूर्ण चीज पेनिस की लंबाई नहीं होती, बल्कि यह होती है कि उसमें तनाव कैसा आता है और कितनी देर टिकता है। पेनिस की चौड़ाई का भी खास महत्व नहीं है। योनि इलास्टिक होती है। जितना पेनिस का साइज होगा, वह उतनी ही फैल जाएगी। बड़ा पेनिस किसी भी तरह से सेक्स में ज्यादा आनंद की वजह नहीं होता।
2. पेनिस में टेढ़ापन होना सेक्स की नजर से समस्या है।
सचाई : पेनिस में थोड़ा टेढ़ापन होता ही है। किसी भी शख्स का पेनिस बिल्कुल सीधा नहीं होता। यह या तो थोड़ा दायीं तरफ या फिर थोड़ा बायीं तरफ झुका होता है। इसकी वजह से पेनिस को वैजाइना में प्रवेश कराने में कोई दिक्कत नहीं होती है। ध्यान रखें, घर में दाखिल होना महत्वपूर्ण है, थोड़े दायें होकर दाखिल हों या फिर बायें होकर या फिर सीधे। ऐसे मामलों में इलाज की जरूरत तब ही समझनी चाहिए योनि में पेनिस का प्रवेश कष्टदायक हो।
3. बाजार में तमाम तेल हैं, जिनकी मालिश करने से पेनिस को लंबा मोटा और ताकतवर बनाया जा सकता है। इसी तरह तमाम गोलियां, टॉनिक आदि लेने से सेक्स पावर बढ़ोतरी होती है।
सचाई : पेनिस पर बाजार में मिलने वाले टॉनिक का कोई असर नहीं होता, असर होता है उसके ऊपर बने सांड या घोड़े के चित्र का। इसी तरह जब पेनिस पर तेल की मालिश की जाती है, तो उस हाथ की स्नायु मजबूत होती हैं, जिससे तेल की मालिश की जाती है, लेकिन पेनिस की मसल्स पर इसका कोई भी असर नहीं होता।
4. पेनिस में नसें नजर आती हैं तो यह कमजोरी की निशानी है।
सचाई : पेनिस में अगर कभी नसें नजर आती भी हैं तो वे नॉर्मल हैं। उनका पेनिस की कमजोरी से कोई लेना देना नहीं है।
5. जिन लोगों के पेनिस सरकमसाइज्ड (इस स्थिति में पेनिस की फोरस्किन पीछे की तरफ रहती है और ग्लांस पेनिस हमेशा बाहर रहता है) हैं, वे सेक्स में ज्यादा कामयाब होते हैं।
सचाई : सरकमसाइज्ड पेनिस का सेक्स की संतुष्टि से कोई लेना-देना नहीं है। यह तब कराना चाहिए जब उत्तेजित अवस्था में पुरुष की फोरस्किन पीछे हटाने में दिक्कत हो।
6. सेक्स पावर बढ़ाने नुस्खे, गोलियां (आयुर्वेदिक और एलोपैथिक), मसाज ऑयल, शिलाजीत आदि बाजार में हैं। इनसे सेक्स पावर बढ़ाई जा सकती है।
सचाई : बाजार में आमतौर मिलने वाली ऐसी गोलियों और दवाओं से सेक्स पावर नहीं बढ़ती। आयुर्वेद के नियम कहते हैं कि मरीज को पहले डॉक्टर से मिलना चाहिए और फिर इलाज करना चाहिए। हर मरीज के लिए उसके हिसाब से दवा दी जाती है, दवाओं को जनरलाइज नहीं किया जा सकता।
एक पक्ष यह भी
यूथ्स की सेक्स समस्याओं पर एलोपैथी और आयुर्वेद की सोच में अंतर मिलता है। जहां एक तरफ एलोपैथी में माना जाता है कि सीमेन शरीर से बाहर निकलने से शरीर और दिमाग को कोई नुकसान नहीं होता, वहीं आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज करने वाले लोग सीमेन के संरक्षण की बात करते हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टरों के मुताबिक :
- महीने में दो से आठ बार तक नाइट फॉल स्वाभाविक है, लेकिन इससे ज्यादा होने लगे, तो यह सेहत के लिए नुकसानदायक है।
- मास्टरबेशन करने से याददाश्त कमजोर होती है। एकाग्रता और सेहत पर बुरा असर होता है।
- प्रीमैच्योर इजैकुलेशन और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को आयुर्वेद में दवाओं के जरिए ठीक किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए मरीज को खुद डॉक्टर से मिलकर इलाज कराना चाहिए। दरअसल, आयुर्वेद में मरीज विशेष के लक्षणों और हाल के हिसाब से दवा दी जाती है, जिनका फायदा होता है।
- बाजार में आयुर्वेद के नाम पर बिकने वाले मालिश करने के तेल, कैपसूल और ताकत की दवाएं जनरल होती हैं। इन बाजारू दवाओं से सेक्स पावर बढ़ाने या पेनिस को लंबा-मोटा करने में कोई मदद नहीं मिलती। ये चीजें आयुर्वेद को बदनाम करती हैं।
- विज्ञापनों और नीम-हकीमों से दूर रहें। तमाम नीम-हकीम आयुर्वेद के नाम पर युवकों को बेवकूफ बनाकर पैसा ठगते हैं। इनसे बचें और हमेशा किसी योग्य डॉक्टर से ही संपर्क करें।
- मर्यादित सेक्स करने से जिंदगी में यश बढ़ता है और परिवार में बढ़ोतरी होती है, जबकि अमर्यादित और बहुत ज्यादा सेक्स रोगों को बढ़ाता है।
- मल-मूत्र का वेग होने पर और व्रत, शोक और चिंता की स्थिति में सेक्स से परहेज करना चाहिए।
- जो चीजें शरीर को सेहतमंद रखने में मदद करती हैं, वही चीजें सेक्स की पावर बढ़ाने में भी मददगार हैं। ऐसे में अगर आप स्वास्थ्य के नियमों का पालन कर रहे हैं और सेहतमंद खाना ले रहे हैं तो आपको सेक्स पावर बढ़ाने वाली चीजें अलग से लेने की कोई जरूरत नहीं है।

Monday, 9 March 2015

अनेक रोगों की दवा भी है सेक्स
आप शीर्षक पढ़कर चौंक गए होंगे कि भला सेक्स भी रोगों की दवा हो सकता है? तो इसमें चौंकने जैसी कोई बात नहीं है। डॉक्टरों व वैज्ञानियों ने शोध करके यह पता लगाया है कि सेक्स अनेक रोगों की दवा भी है। जहां विवाहित जीवन में सेक्स एक-दूजे के बीच सुख, आनन्द, अपनापन लाता है, वही एक-दूजे के स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को भी बनाए रखता है।सेक्स से शरीर में अनेक प्रकार के हार्मोन उत्पन्न होते हैं, जो शरीर के स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं। सेक्स से शरीर में उत्पन्न एस्ट्रोजन हार्मोन ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी नहीं होने देता है। सेक्स करने से एब्*डराफिन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे त्वचा सुंदर, चिकनी व चमकदार बनी रहती है।एस्ट्रोजन हार्मोन शरीर के लिए एक चमत्कार है, जो एक अनोखे सुख की अनुभूति कराता है। सफल व नियमित सेक्स करने वाले दंपति अधिक स्वस्थ देखे गए हैं। उनका सौंदर्य भी लंबी उम्र तक बना रहता है। उनमें उत्*तेजना, उत्साह, उमंग और आत्मविश्*वास भी अधिक होता है। सेक्स से परहेज करने वाले शर्म, संकोच, अपराधबोध व तनाव से पीड़ित रहते हैं।दिमाग को तरोताजा रखने व तनाव को दूर करने के लिए नियमित सेक्स एक अच्छा उपाय है। सेक्स के समय फेरोमोंस नामक रसायन शरीर में एक प्रकार की गंध उत्पन्न करता है, जिसे आप सेक्स परफ्यूम भी कह सकते हैं। यह सेक्स परफ्यूम दिल व दिमाग को असाधारण सुख व शांति देता है। सेक्स हृदय रोग, मानसिक तनाव, रक्*तचाप और दिल के दौरे से दूर रखता है। सेक्स से दूर भागने वाले इन रोगों से अधिक पीड़ित रहते हैं।सेक्स व्यायाम भी है:सेक्स एक प्रकार का व्यायाम भी है। इसके लिए खास किस्म के सूट, शू या महंगी एक्सरसाइज सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत होती है बस शयनकक्ष का दरवाजा बंद करने की। सेक्स व्यायाम शरीर की मांसपेशियों के खिंचाव को दूर करता है और शरीर को लचीला बनाता है। एक बार की संभोग क्रिया, किसी थका देने वाले व्यायाम या तैराकी के 10-20 चक्करों से अधिक असरदार होती है। सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा दूर करने में सेक्स काफी सहायक सिद्ध होता है। सेक्स करने से शारीरिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे कि चर्बी घटती है। एक बार की संभोग क्रिया में 500-1000 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। सेक्स के समय लिया गया चुंबंन भी मोटापा दूर करने में सहायक सिद्ध होता है। विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स के समय लिए गए एक चुंबन से लगभग 9 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। इस तरह 390 बार चुंबन लेने से आधा किलो वजन घट सकता है।दर्दो की अचूक दवा:आह, उह, आउच, कमर दर्द, पीठ दर्द से परेशान पत्*नी आज नहीं, अभी नहीं करती है, लेकिन यदि वह बिना किसी भय के पति के साथ संभोग क्रिया में शामिल हो जाए तो उसके दर्द को उड़न-छू होने में देर नहीं लगती। सिरदर्द, माइग्रेन, दिमाग की नसों में सिकुड़न, उन्माद, हिस्टीरिया आदि का सेक्स एक सफल इलाज है। अनिद्रा की बीमारी में बिस्तर पर करवट बदलने या बालकनी में रातभर टहलने के बजाय बेड पर बगल में लेटी या लेटे साथी से सेक्स की पहल करें, फिर देखें कि खर्राटे आने में ज्यादा देर नहीं लगती। नियमित रूप से संभोग क्रिया में पति को सहयोग देने वाली पत्*नी माहवारी के विकारों से दूर रहती है। रात्रि के अंतिम पहर में किया गया सेक्स दिनभर के लिए तरोताजा कर देता है।सेक्स को सिर्फ यौन संबंध बनाने तक ही सीमित न रखें। इसमें अपनी दिनचर्या की छोटी-छोटी बातें, हंसी-मजाक, स्पर्श, आलिंगन, चुंबंन आदि को भी शामिल करें, संभोग क्रिया तभी पूर्ण मानी जाएगी। सेक्स के बारे में यह बात ध्यान रखें कि अपनी पत्*नी के साथ या पति के साथ किया गया सेक्स स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को बनाए रखता है। इस प्रसंग में यह बात विशेष ध्यान देने योग्य है कि जहां विवाहित जीवन में पत्*नी के साथ संभोग क्रिया अनेक तरह से लाभप्रद है, वहीं अवैध रूप से बनाए गए सेक्स संबंधों से अनिद्रा, हृदय रोग, मानसिक विकार, ठंडापन, सिफलिस, सूजाक, गनोरिया, एड्स जैसे अनेक प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो सकती है।


महिलाओं के कामुक अंग
कानकानों के चारों ओर चैतन्य नसों का जमावड़ा होता है, जो कान को उत्तेजना के प्रति अतिरिक्त चैतन्य बनाती हैं. अपनी उंगलियों से उन्हें हल्के से सहलाइए या खींचिये, कान के पीछे की ओर चूमे और कान के निचले गुद्देदार हिस्से को हल्के से काटे. इससे महिलाओं में उत्तेजना पूर्ण सनसनाहट का संचार होता है. कई महिलाएं अपने कान में जीभ फेरना पसंद नहीं करती लेकिन सौम्य तरीके से कान के चारों ओर जीभ घुमाना भी उनमें उत्तेजना का संचार करता है.होंठचूमना… किसी महिला के लिए एक बड़ा टर्निंग प्वांइट होता है. जब रिलेशन बन रहे होते हैं तो किस(kiss) ऐसी पहली चीज होती है सर्वप्रथम अस्वीकार की जाती है, लेकिन इसमें देर नहीं करना चाहिये. होंठ उत्तेजक नसों से लबालब भरे होते हैं. इन्हें तुरंत सीधे तौर पर इसलिए जीभ में नहीं डुबाना चाहिये. आपकी किस द्वारा सौम्यता से कामुकता में तीव्रता से परिवर्तन होता है. सबसे पहले उसके निचले होंठो पर अपनी जीभ फेरें फिर उसे अपने होंठों के बीच फंसाकर चूसे साथ ही उसे भी ऐसा करने दें. जब आप उसे किस कर रहें हो तो अपने हाथ उसकी गर्दन पर रखे या फिर उसकी कमर या नितंबों पर या फिर इस दौरान उसके इन सभी जगहों पर हाथ फेर सकते हैं यह दिखाने के लिये कि आप उससे कितना कुछ चाहते हैं.गर्दनइसे चूमना, चाटना, सौम्य तरीके से काटना और हल्के से थपथपाना उसको सिसकने के मजबूर कर देता है. लेकिन यहां जोर से नहीं काटना चाहिये क्योंकि यहां की त्वचा ब्रेक हो सकती है.कंधेगर्दन की तरह- कई महिलाएं कंधों को चूमने और आलिंगन करने से काफी उत्तेजना का अनुभव करती हैं. पूर्व की तरह जो प्रक्रिया गर्दन में कर रहे हैं वही करते हुए कंधों तक आएं ताकि उस पता चल सके कि आप कितने सेन्सुअल लवर हैं.कोहनीकोहनी के अंदर की ओर चूमने से महिलाओं में हल्की उत्तेजना का संचार होता है. कोहने के अंदर की ओर की त्वचा कोमल होती है, इस जगह हल्के से काटते हुए किस करते चले जाएं. देखें इससे उसे कैसे आनंद की अनुभूति होती है.अंगुलियांमहिलाओं की उंगलियां भी काफी उत्तेजक होती हैं लेकिन ज्यादातर लोग इस ओर ध्यान नहीं देते. उंगलियों के पोरों को हल्के-हल्के सहलाते हुए दबाने से महिलाओं में तीव्र उत्तेजना का संचार होता है. साथ ही जैसे-जैसे उत्तेजना बढ़ती जाती है आपको उसकी उंगलियों को अपने होंठों के बीच ले जाना चाहिए फिर होंठो से सहलाते हुए धीरे धीरे चूसना चाहिए. इस क्रिया से वह नशे की सी स्थिति में आ जाएगी. यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि उंगलियों में सर्वाधिक कामुक बिन्दु उसके पोर होते हैं.स्तनस्तन महिला के सेक्सुअल और कामुक अंगों में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. यह महिलाओं में सेक्सुअल आकांक्षा के साथ सेक्सुअल उत्तेजना जागृत करने में सहायक होता है साथ ही सेक्सुअल उत्तेजना के लिये अत्यंत संवेदनशील होता है. परन्तु इसके लिए सीधे छलांग नहीं लगा देनी चाहिये. आप अपने रास्ते उसके शरीर में नीचे की ओर जाते जाएं व उन्हें सहलाते रहे लेकिन स्तनों को तब तक न छुएं जब तक कि आपको यह न पता चल जाए कि वह स्वयं चाह रही है कि आप उसके स्तनों को छुएं. शुरुआती दौर में उनके साथ सौम्य तरीके से पेश आएं. इसके लिये शुरुआत किनारे से करें, फिर केन्द्रीभूत तरीके से गोल घेरे में अपनी उंगलियां उसके स्तनों के चारों ओर घूमाएं, ऐसा तब तक करें कि जब तक कि स्तनों के निप्पल के चारों ओर के गुलाबी या भूरे रंग के गोल घेरे तक न पहुंच जाएं, यहां कुछ देर तक उंगलियां फिराने के बाद निप्पल तक पहुंचना चाहिए. अब आप तो निप्पल को सहलाते हुए थपथपाएं, खींचे, दबाएं, चूमे और चूसे. इस दौरान आप चाहें तो सौम्य तरीके से हल्के से दांतो से काट सकते हैं. जब आप का मुंह एक स्तन पर है तो इस दौरान आपका हाथ दूसरे स्तन पर खेलना चाहिए तभी वह सब कुछ सौंपने को आतुर होगी. इसके पश्चात स्तन बदल कर यही क्रिया दोहराएं. फिर दोनों हाथों से स्तनों को जम कर दबाना चाहिये साथ ही बीच में अपने पार्टनर से पूछें कि उसे स्तनों में कौन सी क्रिया आनंददायी लगती है. कभी भी पार्टनर की इच्छाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिये. स्तनों के बीच की हिस्सा कई बार नजरअंदाज कर दिया जाता है जबकि यह भी कामुक क्षेत्र होता है.पीठशुरुआत हल्के तरीके से सहलाने से करें. इसके लिए कंधों के निचले हिस्से से शुरू करें फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर आती जायें(इस दौरान रीढ़ की हड्डी को सीधे छूने से बचे यह खतरनाक हो सकता है). इस दौरान पीठ पर मिले जुले कभी हल्के कभी तेज थपथपाहट करनी चाहिये. इसे और बेहतर बनाने के लिये टेलकम पावडर या तेल का प्रयोग कर सकते हैं. यहां यह ध्यान दें कि उसकी पीठ के किस हिस्से में टच करने पर ज्यादा उत्तेजना का संचार होता हैं इसके लिये आप चाहें तो अपने पार्टनर से पूछ सकते हैं. फिर उसकी पीठ के मध्य में रीढ़ की हड्डी के उपर बने नालीदार हिस्से पर हल्के हाथ से उंगलियां फिराते हुए नीचे की ओर नितंबों तक आना चाहिये यह क्रिया चाहें तो कई बार दोहरा सकते हैं. ऐसा करने से उसे आराम की अनुभूति तो होगी ही, साथ ही इससे रक्त का संचार उसके पेल्विक क्षेत्र की ओर होने लगता है- इससे उसकी उत्तेजना चरम की ओर पहुंचने लगती है. उसकी पीठ के निचले हिस्से में या ठीक नितंब के उपर बने गङ्ढे (dimple) भी उत्तेजक अंग होते हैं. उसकी रीढ़ के समानान्तर ऊपर से नीचे की ओर(top to the bottom) जीभ फेरने पर उसके उत्तेजना की आग सुलग उठती है.नितंब या कूल्हेकई महिलाएं अपने नितंबों को जोर से दबाना या तेज दबाव की मालिश पसंद करती हैं. आप यहां पर शरीर के अन्य अंगों की अपेक्षा ज्यादा दबाव दे सकते हैं. कुछ महिलाएं नितंब पर हल्के थप्पड़ो का प्रहार पसंद करती हैं- किन्तु ऐसा करने से पहले अपने पार्टनर से पूछ लें.इस मामले को जोर का दबाव या थपथपाहट मजाक का विषय नहीं बनाना चाहिये – क्योंकि कई महिलाएं अपने नितंब के आकार को लेकर काफी आशंकित रहती हैं.मोन्सजैसे ही आप भग क्षेत्र या बाह्य जननेन्द्रियों (genital area) को पाते हैं, तो उसमें छलांग लगाना काफी सरल होता है लेकिन उसके पहले भगशिश्न के उपर स्थित उस गुद्देदार क्षेत्र को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जो रोमों (pubic hair) से घिरा होता है. इसे थपथपाना और रगड़ना उसे सिसकने को मजबूर कर देगा वहीं रोमों को(यदि हैं तो) उंगलियों में फंसाकर हल्के से खींचने पर उसे मीठे दर्द की अनुभूति होती है जो उसमें उत्तेजना का संचार करती है.भगशिश्नयह महिलाओं का सबसे कामुक अंग होता है. भगशिश्न को आसानी से खोजा जा सकता है. यह भगोष्ठ (vaginal lips) के उपर की ओर उभरा हुआ हिस्सा होता है. यह उत्तेजक उत्तकों से बना हुआ होता है और इसका काम पुरुषों को शिश्न मुण्ड की ही तरह होता है. उत्तेजना के दौरान यह रक्त से भरा रहता है. कुछ महिलाओं का भगशिश्न इतना सेन्सटिव होता है कि कई बार परेशानी का सबब भी बन जाता हैं क्योंकि हल्की सी छुअन भी उसमें उत्तेजना भर देती है. इस तरह की स्थितियों में इसे सीधे न छूकर इसके किनारों से स्पर्श करना चाहिए और उस नीचे (base) से उत्तेजित करना चाहिये. कुछ महिलाएं जैसे-जैसे उत्तेजित होती जाती हैं वैसे-वैसे वे अपने भगशिश्न में ज्यादा दबाव चाहती हैं. लेकिन भगशिश्न में दबाव व स्पर्श के लिये पार्टनर से पूछ कर ही हरकत करना चाहिये. यदि आप मुखमैथुन कर रहें हैं तो भगशिश्न तक किनारे से पहुंचे. इस तरीके से उसे ज्यादा आनंद आएगा.योनियोनि वह दूसरा क्षेत्र है जहां कई आदमी स्तनों को उत्तेजित करने के बाद सीधे पहुंच जाते हैं. जब आप वहां पहुंच जाएं तो उसके बाहर रुके, तब आपको काफी पसंदीदा तरीके से अंदर के लिये वेलकम किया जाएगा. जैसे ही महिला उत्तेजित होती है उसका गर्भद्वार उपर की ओर खिसक जाता है जिससे योनि कीगहराई बढ़ जाती है और आपको गहरे तक प्रवेश का आनंद मिलता है. इस लिए यह आपकी पसंद का मामला है कि आप उसे कितना गीला कर सकते हैं. जितना समय यहां दिया जाएगा उतना ही आनंद आपको लिंग प्रवेश पर मिलेगा.जी-स्पॉटयोनि की गहराई के एक तिहाई रास्ते पर यह क्षेत्र योनि की बाहरी दीवार पर (आमाशय या पेट के सामने न कि गुदा की ओर ) एक स्पंजी क्षेत्र पाया जाता है यह लगभग मुंह के उपरी हिस्से की तरह होता है जब जीभ से छुआ जाता है. यदि इस जगह पर लगातार उंगली चलाई जाती है तो कई महिलाएं काफी मात्रा में पानी छोड़ती है. पानी की यह धार काफी तेज भी होती है. वहीं कुछ महिलाओं को ऐसा अनुभव होता है कि मानों उन्हें पेशाब जाना हो, तो कई को कुछ और ही अनुभूति होती है. कुल मिला कर जी-स्पाट उत्तेजना के महिलाओं में अलग-अलग अनुभव होते हैं. इसलिए अपने पार्टनर से पूछिये कि उसे क्या अनुभूति हो रही है और उसे कैसा लग रहा है.

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