Wednesday, 29 June 2016

वल्वा में पीड़ा और कष्ट



वल्वा में पीड़ा और कष्ट
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वल्वा में पीड़ा और खुजली किस कारण होती है? 

वल्वा क्षेत्र में पीड़ा खुजली, जलन एवं उत्तेजना का कारण जननेन्द्रिय में संक्रमण (इनफैक्शन) हो सकता है या डरमैटईटिस, एक्जीमा जैसी त्वचा के असंक्रमाक रोग हो सकते हैं।

त्वचा के असंक्रामक रोग जो कि वल्वल को पीड़ा या कष्ट देते हैं उनके कारण क्या हो सकते हैं?

औरत की वल्वा में त्वचा परक ऐसा रोग भी हो सकता है जो कि संक्रामक नही होता और सम्भोग के साथी को नहीं लगाता। जांघिए को धोने के लिए जो साबुन, दुर्गन्धनाशक और प्रक्षालक काम में लाया जाता है उससे जलन की बहुत सम्भावना रहती है।

वल्वा की त्वचा के रोगों का उपचार कैसे करें?

उपचार के लिए सामान्यतः ऐसी स्टीरॉयड क्रीम एवं प्रशासक औषधियों का उपयोग किया जाता है जो कि चिकनी हो और ऐसा मरहम लिया जाता है जो कि त्वचा को उत्तजित करने वाला न हो। जख्म को और फटी चमड़ी को नरम बनाने और आराम दिलाने के लिए इनका उपयोग किया जा सकता है और वल्वा की सफाई के लिए साबुन की जगह इनका उपयोग कर सकते हैं। क्रीम और लोशन के रूप में ये मिलते हैं और कैमिस्ट से बिना पर्ची लिखाये भी मिल जाती हैं।

वल्वल त्वचा की देखभाल महिला स्वयं कैसे करे?

यदि आपको यह समस्या है, या उसका अंदेशा है तो तंग माप के टाईटस या ट्राउसर मत पहनें। सिनथैटिक के जांघिये न पहने और कॉटन के भी ऐसे जांघिए पहने जो बहुत कसे हुए न हो। त्वचा को साफ करने के लिए हल्के साबुन का इस्तेमाल करें।

Kashyap Clinic Pvt. Ltd.

Dr. B.K. Kashyap - U.P. Top Sex & Guptrog Specialist.

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Dr. B.K. Kashyap

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Kashyap Clinic Top Counselling In Sex Problem

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Top Sex Counsellor In U.P. (Allahabad)

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Sexologist Doctor For Female In Allahabad (U.P.)

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Monday, 27 June 2016

Welcome To India Best Dr.B.K. Kashyap (SuperSexologist)

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स्वप्नदोष रोकने के उपाय

स्वप्नदोष रोकने के उपाय
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रात में सोते वक्त लड़कों का खुद-ब-खुद वीर्य निकल जाना स्वपनदोष कहलाता है. किशोरावस्था और युवावस्था में लडकों को स्वपनदोष होना एक साधारण सी बात है. अगर आपको 1 माह में 1-2 बार स्वप्नदोष होता है, तो डरने की जरूरत नहीं है. यह एक सामान्य बात है. क्योंकि पुरुष के शरीर में हमेशा वीर्य बनता रहता है, इसलिए एक सीमा के बाद वीर्य खुद-ब-खुद निकल जाता है. शादी के बाद स्वप्नदोष पूरी तरह से खत्म हो जाता है. और यह याद रखें कि यह कोई बीमारी नहीं है.

स्वपनदोष के मुख्य कारण :

  • अश्लील कहानियाँ पढ़ना या Porn Films देखना.
  • Sex के बारे में बहुत ज्यादा सोचना या स्त्री के कोमल या यौनांगों के बारे में ज्यादा पढ़ना, देखना या सुनना.
  • वीर्य का ज्यादा दिनों से स्खलित नहीं होना, मतलब वीर्य का Over Stock होना.


स्वप्नदोष रोकने के कुछ कारगर उपाय :

  • खुद को व्यस्त रखें, और अपने विचारों और मन में शुद्धता लाएँ. आपके दिमाग या मन में अश्लील या कामुक बातें नहीं होंगी, तो स्वप्नदोष भी नहीं होगा.
  • Porn Films न देखें, क्योंकि इससे आपका दिमाग कामुक विचारों से मुक्त नहीं हो पायेगा.
  • नहाने के लिए ठंडे पानी का उपयोग करें, गर्म पानी से न नहाएँ.
  • सोने से पहले रात में गर्म दूध न पिएँ.
  • सोने से 2-3 घंटा पहले खाना खा लें. और सुपाच्य भोजन हीं करें.
  • आपकी दिनचर्या ऐसी होनी चाहिए जिससे आपको अश्लीलता के चक्कर में पड़ने का समय हीं न मिले.
  • हर दिन सूर्योदय से पहले उठें, व्यायाम, योग एवं रोज पूजा करें. धार्मिक चीजों की ओर अपनी रूचि बढ़ाएं.
  • रात में सोने से पहले पेशाब जरुर करें और रात में पानी कम पिएँ.
  • रात में सोने से पहले अंडरवियर खोल लें और Lower या किसी अन्य तरह का ढीला कपड़ा पहनकर सोएँ.
  • सुबह-सुबह खाली पैर घास में Morning Walk करें.
  • लिंग की नियमित सफाई करें.

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स्वप्नदोष रोकने के उपाय

स्वप्नदोष रोकने के उपाय
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रात में सोते वक्त लड़कों का खुद-ब-खुद वीर्य निकल जाना स्वपनदोष कहलाता है. किशोरावस्था और युवावस्था में लडकों को स्वपनदोष होना एक साधारण सी बात है. अगर आपको 1 माह में 1-2 बार स्वप्नदोष होता है, तो डरने की जरूरत नहीं है. यह एक सामान्य बात है. क्योंकि पुरुष के शरीर में हमेशा वीर्य बनता रहता है, इसलिए एक सीमा के बाद वीर्य खुद-ब-खुद निकल जाता है. शादी के बाद स्वप्नदोष पूरी तरह से खत्म हो जाता है. और यह याद रखें कि यह कोई बीमारी नहीं है.

स्वपनदोष के मुख्य कारण :

  • अश्लील कहानियाँ पढ़ना या Porn Films देखना.
  • Sex के बारे में बहुत ज्यादा सोचना या स्त्री के कोमल या यौनांगों के बारे में ज्यादा पढ़ना, देखना या सुनना.
  • वीर्य का ज्यादा दिनों से स्खलित नहीं होना, मतलब वीर्य का Over Stock होना.


स्वप्नदोष रोकने के कुछ कारगर उपाय :

  • खुद को व्यस्त रखें, और अपने विचारों और मन में शुद्धता लाएँ. आपके दिमाग या मन में अश्लील या कामुक बातें नहीं होंगी, तो स्वप्नदोष भी नहीं होगा.
  • Porn Films न देखें, क्योंकि इससे आपका दिमाग कामुक विचारों से मुक्त नहीं हो पायेगा.
  • नहाने के लिए ठंडे पानी का उपयोग करें, गर्म पानी से न नहाएँ.
  • सोने से पहले रात में गर्म दूध न पिएँ.
  • सोने से 2-3 घंटा पहले खाना खा लें. और सुपाच्य भोजन हीं करें.
  • आपकी दिनचर्या ऐसी होनी चाहिए जिससे आपको अश्लीलता के चक्कर में पड़ने का समय हीं न मिले.
  • हर दिन सूर्योदय से पहले उठें, व्यायाम, योग एवं रोज पूजा करें. धार्मिक चीजों की ओर अपनी रूचि बढ़ाएं.
  • रात में सोने से पहले पेशाब जरुर करें और रात में पानी कम पिएँ.
  • रात में सोने से पहले अंडरवियर खोल लें और Lower या किसी अन्य तरह का ढीला कपड़ा पहनकर सोएँ.
  • सुबह-सुबह खाली पैर घास में Morning Walk करें.
  • लिंग की नियमित सफाई करें.

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Friday, 24 June 2016

ऑयल मसाज से बढती है सेक्स लाइफ

ऑयल मसाज से बढती है सेक्स लाइफ
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आजकल भागदौड और तनाव भरी जिदंगी में किसी के पास टाइम नहीं होता इसके चलते अगर आपकी सेक्स लाइफ पर इसका असर पड रहा तो अरोमा ऑयल की मसाज आपकी सेक्स लाइफ में जान डालने में मददगार हो सकती है। आयुर्वेद में ऎसे कई तेलों का जिक्र है जिसकी महक से शरीर में सेक्स की इच्छा से संबंधित हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। चमेली का तेल अपनी तेज खुशबू के कारण इंद्रियों को जल्दी आकर्षित करता है। यह कामेच्छा बढाने के लिए प्रभावी माना जाता है। इसकी मसाज से शरीर में ऊर्जा का संचार तेजी से होता है। चंदन का तेल- चंदन की भीनी-भीनी खुशबू न सिर्फ इत्र के रूप में लोकप्रिय है बल्कि इसके इस्तेमाल से सेक्स के प्रति इच्छा प्रबल होती है। जीरे का तेल सुनने में अटपटा लगेगा लेकिन कामेच्छा बढाने के लिए आयुर्वेद में जीरे का तेल भी बहुत महत्व रखता है। इसका इस्तेमाल महिलाओं में फर्टिलिटी बढाने के लिए भी किया जाता है। लौंग का तेल- आमतौर पर लौंग को गर्म माना जाता है। लौंग का तेल को आयुर्वेद में कामेच्छा बढाने में भी सहायक मानता है। यह मांसपेशियों के तनाव को कम करता है, शरीर को तनाव मुक्त करता है। ध्यान रखें कि ये तेल हाई ब्लड प्रेशर या श्वास संबंधी रोगों में नुकसानदायक हो सकते हैं इसलिए इनके इस्तेमाल से पहले डॉक्टरी परामर्श जरूर लें। 

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Thursday, 23 June 2016

यौन शक्तिवर्धक सफ़ेद प्याज का मुरब्बा :

सफ़ेद प्याज का मुरब्बा ऐसी 💂 यौन शक्ति देगा की सभी दवाईयाँ भूल जाओगे
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यौन शक्तिवर्धक सफ़ेद प्याज का मुरब्बा : प्याज एक प्राकृतिक यौन शक्ति वर्धक और शीघ्रपतन को दूर कर स्तम्भन बढ़ाने वाला हैं। इसके हमने अनेक यौन शक्ति वर्धक प्रयोग आपको बताये। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सफ़ेद प्याज का एक ऐसा प्रयोग जो बिलकुल सस्ता सा हैं और जिसको आप हर रोज़ करेंगे तो 100 साल की आयु में भी अनेको स्त्रियों के साथ रमण कर सकेंगे। कमज़ोरी नाम क्या होता हैं सब भूल जायेंगे। ये प्रयोग काफी वर्षो पहले एक हकीम साब ने बताया था और अनेक यौन दुर्बल लोगो पर इसके चमत्कारिक प्रभाव देखे। आज हम आपको वही अनुभव बताने जा रहे हैं। 

सामान : सफ़ेद प्याज – 45  और शुद्ध शहद  आवश्यकतानुसार

विधि :सर्वप्रथम सफ़ेद प्याज का छिलका उतार लीजिये, अब इन प्याज में किसी सलाई की मदद से बीच बीच में 8-10 छेद कर दीजिये। सभी प्याज में ऐसे छेद कर लीजिये और इन सब प्याज को एक कांच के बर्तन में डालकर रख लीजिये। कांच का बर्तन तीन चौथाई तक भरे। अब इस बर्तन को शुद्ध शहद से पूरा भर दीजिये। इसको 45 दिन तक ढक कर रख लीजिये। 45 दिन बाद आपका बेजोड़ यौन शक्ति वर्धक उपाय तैयार हो जायेगा। नियमित सेवन के लिए 45 दिन बाद आप ऐसा ही नया जार तैयार कर लीजिये।

सेवन विधि :अभी हर रोज़ रात को सोने से १ घंटा पहले ये बना हुआ मुरब्बा एक नग खा लीजिये। इसको निरंतर खाने से आप में घोड़े से भी ज़्यादा बल आ जाएगा। शरीर में खून की आपूर्ति हो जाएगी। चेहरा लाल टमाटर जैसा खिल जायेगा। और बुढ़ापे का अनुभव तो कभी नहीं होगा। सदा जवान रहेंगे।

सावधानी : खट्टी चीजो, फ़ास्ट फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, धूम्रपान, शराब आदि का सेवन ना करे। इस प्रयोग का सम्पूर्ण फायदा लेने के लिए प्रयोग काल के प्रथम 25 दिन सम्भोग नहीं करना। उसके बाद भले निरंतर सम्भोग करते रहे। इस से ऐसी ताक़त मिलेगी जिसके आगे सब दवाये फेल हैं। और मन सदैव शांत रखे, हमेशा स्त्री गमण के बारे में सोचने से धातु कमज़ोर होती हैं और शक्ति का नाश होता हैं। अधिक सहवास करना सेहत के लिए नुकसानदेह हैं। शरीर से ओज तेज़ का नाश होता हैं। ये प्रयोग उन लोगो के लिए ही बताया हैं जो लोग अपनी शादी शुदा ज़िंदगी से परेशान हैं। और बचपन की गलतियों की वजह से अपना जीवन नरक समान बना लिया हैं !

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Wednesday, 22 June 2016

पीरियड, माहवारी या मासिक धर्म क्या है

 पीरियड, माहवारी या मासिक धर्म क्या है
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  • मासिक धर्म या पीरियड 10-16 साल की लड़कियों के शरीर में होने वाला एक हार्मोनल बदलाव है. स्त्री के शरीर में दो अंडाशय और एक गर्भाशय होता है. स्त्री के अंडाशय से हर माह एक विकसित अण्डा उत्पन्न होता है. जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है, उसका स्तर खून और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है. यदि उस अंडे का पुरूष के शुक्राणु से मिलन नहीं होता है, तो यह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निकल जाता है. इसी स्राव को मासिक धर्म, रजोधर्म या माहवारी, पीरियड, या मासिक  कहते हैं.
  • मासिक के बारे में प्रमुख बातें :
  • पीरियड महीने में एक बार होता है.
  • अलग-अलग लड़कियों का पीरियड अलग-अलग आयु में शुरू होता है.
  • मासिक का समय 2 से 7 दिन के बीच का हो सकता है. अलग-अलग स्त्रियों की पीरियड की अवधि अलग-अलग होती है. एक स्त्री के पीरियड की अवधि भी कम या ज्यादा होती रहती है.
  • मासिक हर महीने 28-35 दिन के बीच में होता है.
  • मासिक या पीरियड शुरू होने से पहले कमर में हल्का दर्द होना एक आम बात है, जिसे मासिक से पहले का दर्द कहते हैं.

  • मासिक खत्म होने लगता है, तो दर्द भी कम होने लगता है.

  • अधिकतर स्त्रियों को मासिक से पहले कुछ भी तकलीफ महसूस नहीं होता है. जबकि बहुत-सी महिलाओं को पीरियड से पहले कमर या पैर में दर्द महसूस होता है, सर दर्द होता है, कब्ज होता है, स्तनों में भारीपन और कड़ापन आ जाता है, और अकारण चिड़चिड़ापन आ जाता है.
  • अगर मासिक के दौरान तेज असहनीय दर्द हो, बहुत अधिक रक्त स्त्राव हो. तो आपको किसी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

  • मासिक 40-60 वर्ष की आयु के बीच में कभी भी बंद हो सकता है. इसलिए अलग-अलग महिलाओं का मासिक अलग-अलग आयु में खत्म होता है. अंतिम मासिक को रजोनिवृत्ति ( Menopause मेनोपोस ) कहते हैं.

  • वैसे तो हर 8 घंटे में पैड बदल देना चाहिए, लेकिन अगर यह पहले हीं गीला हो जाए तो उसे बदलना चाहिए. हर सुबह पैड बदलना चाहिए. पूरा दिन एक हीं पैड लगाए रखने से इसमें जीवाणु पनपते हैं. इसलिए आपको पैड की सफाई का ध्यान रखना चाहिए.
  • अनियमित माहवारी पीरियड वह होता है जिसमें पीरियड की अवधि एक चक्र से दूसरे चक्र तक लम्बी हो सकती है, या वे बहुत जल्दी-जल्दी होने लगते हैं या असामान्य. किशोरावस्था के पहले कुछ सालों में अनियमित पीरियड हो सकते हैं.

  • अगर मासिक के दिन थोड़े बहुत कम या ज्यादा हो जाएँ, तो आपको चिंता नहीं करनी चाहिए.
  • शरीर में खून की कमी होने से भी कई बार पीरियड से पहले बहुत ज्यादा दर्द होता है.
  • पीरियड में आपको ज्यादा तकलीफ न हो, इसके लिए आपका शारीरिक रूप से मजबूत होना जरूरी है.
  • आपको अपने खाने में ताजे फल और सब्जियों का उपयोग करना चाहिए.
  • और यह याद रखें कि मासिक कोई तकलीफ नहीं है, यह तो हर स्त्री की एक सामान्य मासिक प्रक्रिया है.

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Tuesday, 21 June 2016

यौन शक्ति बढ़ाने के अचूक घरेलू उपाय

यौन शक्ति बढ़ाने के अचूक घरेलू उपाय आइऐ जानते है सुप्रसिद्र सइको सेक्सोलोजिस्ट  
डॉ0 बी0 के0 कश्यप से 

तुलसी : 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है। 




लहसुन : 200 ग्राम लहसुन पीसकर उसमें 60 मिली शहद मिलाकर एक साफ-सुथरी शीशी में भरकर ढक्कन लगाएं और किसी भी अनाज में 31 दिन के लिए रख दें। 31 दिनों के बाद 10 ग्राम की मात्रा में 40 दिनों तक इसको लें। इससे यौन शक्ति बढ़ती है। 




जायफल : एक ग्राम जायफल का चूर्ण प्रातः ताजे जल के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में ही यौन दुर्बलता दूर होती है।





दालचीनी : दो ग्राम दालचीनी का चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य बढ़ता है और यौन दुर्बलता दूर होती है।




खजूर : शीतकाल में सुबह दो-तीन खजूर को घी में भूनकर नियमित खाएं, ऊपर से इलायची- शक्कर डालकर उबला हुआ दूध पीजिए। यह उत्तम यौन शक्तिवर्धक है।




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Monday, 20 June 2016

शीघ्रपतन किेसे कहते हैं.

शीघ्रपतन  किेसे कहते हैं. 
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Sex करने के दौरान जब पुरुष अपना लिंग स्त्री की योनी में डालता है, और पुरुष का वीर्य बहुत हीं जल्दी स्खलित हो जाता है, तो इसे शीघ्रपतन कहते हैं. शीघ्रपतन होने से स्त्री सम्भोग का पूरा आनंद नहीं उठा पाती है, जिसके कारण पति-पत्नी दोनों के जीवन में अकारण तनाव उत्पन्न हो जाता है. और पुरुष हीन भावना का शिकार हो जाता है.
तो आइए जानते हैं शीघ्रपतन खत्म करने के उपाय :
  • तनाव और थकावट शीघ्रपतन के दो मुख्य कारण हैं, इन दोनों को दूर किए बिना आपको शीघ्रपतन से छुटकारा नहीं मिल सकता है.
  • किसी भी प्रकार के नशे का सेवन न करें, नशा आपकी सेक्स क्षमता को घटाता है.
  • सबसे पहले मन से यह भ्रम दूर कर लें कि शीघ्रपतन कोई बीमारी है, ज्यादातर लोग केवल इसी कारण से शीघ्रपतन के शिकार होते हैं, क्योंकि उन्हें खुद पर विश्वास नहीं होता है कि वो अपने साथी को यौन संतुष्टि दे पाएंगे. खुद को यह विश्वास दिलाइए कि आपको कोई यौन कमजोरी नहीं है और आप अपनी पत्नी को सेक्स के दौरान पूरी तरह संतुष्ट कर सकते हैं.
  • संतुलित और पौष्टिक भोजन करें और समय पर खाना खाएँ.
  • सेक्स करने के दौरान जल्दबाजी न करें, लिंग को योनी में डालने से पहले एक-दूसरे के कोमल तथा यौन अंगों को सहलाएं, चूमें ताकि आप दोनों सेक्स करने से पहले पूरी तरह से उत्तेजित हो जाएँ.
  • सेक्स करने के दौरान एक-दूसरे से बात करते रहें (बात Romantic और उत्साह बढ़ाने वाली होनी चाहिए), और लिंग के अंदर-बाहर करने की गति को भी कम-ज्यादा करते रहें. और कुछ सेकेण्ड के लिए लिंग को अंदर-बाहर करना रोक दें, उसके बाद फिर लिंग को अंदर बाहर करना शुरू करें. ऐसा करने के दौरान अपने साथी का चुम्बन लें और उसके नाजुक अंगों को चूमें, चूसें और सहलाएँ. और ध्यान रखें कि आपका ध्यान इस बात पर नहीं होना चाहिए कि कहीं आज भी मेरा वीर्य जल्दी तो नहीं निकल जायेगा.
  • बहुत ज्यादा सेक्स न करें, 1 दिन, 2 दिन या 3 दिन के अन्तराल में सेक्स करना भी फायदेमंद होगा.
  • सेक्स के दौरान किसी के Disturb करने का डर भी शीघ्रपतन का एक कारण हो सकता है.
  • अपने शरीर की नियमित मालिश करें, जांघ पर रखकर Laptop use न करें और अपने लिंग को गर्म पानी के सम्पर्क से बचाएँ.
  • बहुत लम्बे अन्तराल में भी सेक्स न करें. नियमित सेक्स करते रहें. Condom का इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • खुश रहें, और मानसिक रूप से स्वतंत्र रहें.
  • सुबह जल्दी उठें.
  • लहसून की 2-3 कलियाँ हर दिन खाने से Sex Power बढ़ता है.
  • Sex Power बढ़ाने वाली दवाओं के सेवन से बचें.
  • प्याज को अपने दैनिक भोजन में शामिल करें, यह आपको बहुत फायदा पहुंचाएगा.
  • ताजे फलों, साग-सब्जियों, दाल तथा दूध को अपने दैनिक आहार में शमिल करें.
  • अगर एक बार वीर्य जल्दी निकल जाए तो सेक्स खत्म न करें. आधा-1 घंटा बाद फिर सेक्स करना शुरू करें यकीन मानिए इस बार आप दोनों पूरी तरह से संतुष्ट होंगे.
  • अलग-अलग Sex Positions का उपयोग करना भी आपके लिए उपयोगी हो सकता है.
  • काले चने से बने खाद्य पदार्थों का सप्ताह में 2-3 बार खाना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.
  • लगभग 150 ग्राम बारीक कटे हुए गाजर को एक उबले हुए अंडे के आधे हिस्से में एक चम्मच मधु  मिलाकर दिन में एक बार खाएँ. इसे 1-2 महीने तक खाएँ.
  • 15 gram सफेद मूसली को एक कप दूध में उबालकर दिन में 2 बार पिएँ.
  • 15-16 gram सहजन के फूलों को 250 ml दूध में उबलने के बाद पिएँ.
  • 1/2 चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच मधु और एक उबले हुए अंडे का आधा भाग मिलकार रोज रात को सोने से पहले 1 माह तक खाएँ.
  • पिस्ता बादाम , खजूर और श्रीफल के बीजों को बराबर मात्रा में लेकर Mixture बनाकर इस Mixture को रोज 100 gram खाएँ.
  • 30-40 gram किशमिश को गर्म पानी में धोकर, 200 ml दूध में उबालें. इसे दिन में तीन बार खाएँ. हर बार तजा mixture तैयार करें.हमें उम्मीद है कि आपके शीघ्रपतन की समस्या जल्दी हीं खत्म हो जाएगी. अपने अनुभव हमारे साथ जरुर बातें.

Saturday, 18 June 2016

अंतरंग संबंधों का क्या मतलब है?

अंतरंग संबंधों का क्या मतलब है?
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एक अंतरंग संबंध या एक यौन संबंध याने जोड़ों का शारीरिक और भावनात्मक रूप से अच्छी तरह से शामिल होना हो सकता हैं। इसको मुख्यतः प्यार और प्रतिबद्धता के अलावा जुनून और आकर्षण द्वारा निर्धारित किया जाता है। एक रिश्ते में अंतरंगता जोड़े को भावनात्मक रुप से एकदुसरे सें कितने संलग्न है, यह तय करने में और
 सुरक्षा की अपनी भावना का निर्धारण करने में मदद करती हैं।
इसके अलावा, एक अंतरंग संबंध एकसाथ रहने की इच्छा को केवल शारीरिक स्तर से परे एक भावनात्मक स्तर पर बरकरार रखते हैं।
उसमें अपनेपन और स्नेह की भावना होती है।

निम्नलिखित मुद्दों से आपको यह संकल्पना समझने में मदद मिलेगी:
जोड़े उनके रिश्ते में अंतरंगता का आनंद लेते है, वह एक दूसरे पर निर्भर हो जाते हैं।
एक अंतरंग संबंध में हमेशा आवश्यकता की पूर्ति की भावना होती है। यह पूर्ताता भावनात्मक, सामाजिक और यौन हो सकती हैं।
एक अंतरंग संबंध कभी कभी आकर्षण, मोह, और जुनून के अन्य संकल्पना के साथ उलझ सकता है। अंतरंगता का आनंद ले रहे लोगों को इससे सतर्क होना चाहिये, जिससे वह बादमें दर्द और अविश्वास से बच सकते हैं।

इसके अलावा, एक अंतरंग संबंध हमेशा एक यौन संबंध नहीं हो सकता हैं। एक संतोषप्रद शारीरिक संबंध बनने के लिए एक भावनात्मक रूप से संलग्न होना बहूत जरुरी होता हैं, और इसलिए अंतरंगता को बहुत ज्यादा व्यक्तिगत स्तर पर परिभाषित किया जाता हैं।
एक अंतरंग जोड़े अपने साथी की पसंद और नापसंद के बारे में स्वाभाविक रुप से जानते है, और इसलिए साथ रहने का हर अनुभव पूर्ण बनाते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, एक अंतरंग संबंधों में शामिल व्यक्ति खुद को बेहतर समझने में भी सक्षम होते है, जिसके कारण उनको अपने साथियों से जुड़ा होने के अलावा उनको क्या चाहिए यह पता होता हैं।


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अंतरंग संबंधों का क्या मतलब है?

अंतरंग संबंधों का क्या मतलब है?
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एक अंतरंग संबंध या एक यौन संबंध याने जोड़ों का शारीरिक और भावनात्मक रूप से अच्छी तरह से शामिल होना हो सकता हैं। इसको मुख्यतः प्यार और प्रतिबद्धता के अलावा जुनून और आकर्षण द्वारा निर्धारित किया जाता है। एक रिश्ते में अंतरंगता जोड़े को भावनात्मक रुप से एकदुसरे सें कितने संलग्न है, यह तय करने में और
 सुरक्षा की अपनी भावना का निर्धारण करने में मदद करती हैं।
इसके अलावा, एक अंतरंग संबंध एकसाथ रहने की इच्छा को केवल शारीरिक स्तर से परे एक भावनात्मक स्तर पर बरकरार रखते हैं।
उसमें अपनेपन और स्नेह की भावना होती है।

निम्नलिखित मुद्दों से आपको यह संकल्पना समझने में मदद मिलेगी:
जोड़े उनके रिश्ते में अंतरंगता का आनंद लेते है, वह एक दूसरे पर निर्भर हो जाते हैं।
एक अंतरंग संबंध में हमेशा आवश्यकता की पूर्ति की भावना होती है। यह पूर्ताता भावनात्मक, सामाजिक और यौन हो सकती हैं।
एक अंतरंग संबंध कभी कभी आकर्षण, मोह, और जुनून के अन्य संकल्पना के साथ उलझ सकता है। अंतरंगता का आनंद ले रहे लोगों को इससे सतर्क होना चाहिये, जिससे वह बादमें दर्द और अविश्वास से बच सकते हैं।

इसके अलावा, एक अंतरंग संबंध हमेशा एक यौन संबंध नहीं हो सकता हैं। एक संतोषप्रद शारीरिक संबंध बनने के लिए एक भावनात्मक रूप से संलग्न होना बहूत जरुरी होता हैं, और इसलिए अंतरंगता को बहुत ज्यादा व्यक्तिगत स्तर पर परिभाषित किया जाता हैं।
एक अंतरंग जोड़े अपने साथी की पसंद और नापसंद के बारे में स्वाभाविक रुप से जानते है, और इसलिए साथ रहने का हर अनुभव पूर्ण बनाते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, एक अंतरंग संबंधों में शामिल व्यक्ति खुद को बेहतर समझने में भी सक्षम होते है, जिसके कारण उनको अपने साथियों से जुड़ा होने के अलावा उनको क्या चाहिए यह पता होता हैं।


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ये खाएं और अपनी सेक्स "पावर बढाएं"

ये खाएं और अपनी सेक्स "पावर बढाएं"
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आपने सेक्स पावर बढाने के लिए लोगों को विभिन्न प्रकार दवाई, टेबलेट और इजेक्शन लेते देखा होगा लेकिन अभी तक आपको ऎसी क्या आपको पता है कि कुछ प्रकृति चीजें है ज्यादा इन दवाईयों से ज्यादा गुणकारी है। प्रकृति की कई ऎसी चीजें है जो दवाईयों के मुकाबले कहीं अधिक सेक्स पावर बढाती हैं हम आपको उनके बारे में रूबरू कराते है। ये प्रकृति चीजें जो आसानी से उपलब्ध होती और आपकी सेक्स पॉवर को बढाती है। इनकी उपयोगिता को यदि गंभीरता से सीखा और जाना जाए तो ये बेहद कारगर साबित हो सकती हैं। दुनियाभर में इन वस्तुओं पर इतने प्रयोग हो चुके हैं कि ये भी सामने आया है कि यह आपकी सेक्स क्षमता को भी कई गुना बढा सकती हैं।
अदरक : आमतौर पर बाजार में उपलब्ध होने वाली अदरक के सेवन से सेक्स के
दौरान उत्तेजना में बढोतरी करती है। इसके सेवन से दिल की धडकन बढती है, खून का प्रवाह तेज होता है जिससे उत्तेजना बढती है।
इलायची : इंडियन मसाले में कीमती इलायची के इस्तेमाल कामेच्छा को उत्तेजित करता है। मीठी तुलसी : भारत में प्राचिनतम समय से ही तुलसी का इस्तेमाल ही कामलोलुपता की औषधी के रूप में किया जा रहा है। इटली के कुछ भागों में तुलसी का पेड प्यार की निशानी माना जाता है।
कद्दू के बीज : जिन लोगों को को कस्तूरी पसंद नहीं होती, उनके लिए कद्दू के बीज उत्तेजना बढाने का काम करते हैं। जो कि पुरूष टेस्टास्टारेन प्रजनन का काम करते हैं जिससे उत्तेजना बढती है। इन बीजों को भूनकर स्त्रैक्स के तौर पर या सलाद के रूप में खाया जाए।
लहसुन : लहसुन में एलीकीन होता है जो कि सेक्सी भागों में खून के प्रवाह को बढाता है। कामेच्छा बढाने के लिए लहसुन के कैप्सूल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
मिर्च : खाने में मिर्च की मात्रा लेने पर खून में प्रवाह बढा है। मिर्च की वजह से बढे खून का प्रवाह लोगों के मूड को बनाने में काम आता है।
हरा साग : हरा साग शरीर में हिस्टामाइन लेवल को बढाता है। हिस्टामाइन लेवल की वजह से शरीर में उत्तेजना बढती है।

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गर्भावस्था में सावधानियां

गर्भावस्था में सावधानियां
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 स्त्री तब पूर्ण होती है जब वह माँ  बनती है । किसी युवती के लिये पहली  बार माँ बनना एक अनोखी और चुनौतीपूर्ण क्रिया होती है । गर्भ धारण करने के बाद से युवती के शरीर में कई तरह के बदलाव शुरू हो जाते हैं । यह बदलाव पहले महीने से शुरू हो जाते हैं और डिलेवरी के बाद के कुछ महीने तक होते हैं । पहली बार माँ बन रही युवती के लिये ऐसे समय में घर की बड़ी और अनुभवी महिलाओं का साथ होना जरूरी होता है । महानगरों में जहॉं लोग एकल परिवारों में रहते हैं वहाँ किसी अनुभवी महिला के न होने से दिक्कते पेश आती हैं । ऐसे में स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सलाह लेते रहना चाहिये ।

गर्भावस्था के पहले महीने से ही गर्भवती युवती को कुछ सावधानियां बरतनी शुरू कर देनी चाहिये । ये सावधानियाँ खान-पान, रहन सहन, सेक्स के तरीकों में बदलाव आदि में करनी पड़ती है । हिंदू संस्कृति में 16 वैदिक संस्कारों को महत्वपूर्ण माना गया है । इसमें शुरू के तीन संस्कार गर्भाधान संस्कार, पुंसवन संस्कार और सीमंतोन्नयन संस्कार बच्चे के गर्भ में आने और पैदा होने के पहले किये जाते हैं । इसमें दूसरे नंबर का संस्कार पुंसवन संस्कार महत्वपूर्ण है । इसके अनुसार माता-पिता को यह संकल्प लेना होता है कि वे गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा करेंगे । कुल मिला कर आज के माता पिता को पुंसवन संस्कार पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिये । उन्हें गर्भ में पल रहे शिशु और माँ की सेहत का ख्याल रखना चाहिये और इसके लिये कुछ जरूरी सावधानियॉं हैं जिनका उन्हें ख्याल रखना चाहिए । वे जरूरी सावधानियां नीचे दी गयी हैं ।
जरूरी सावधानियां
·       गर्भधारण करते ही माता पिता को गर्भ में पल रहे भ्रूण  की रक्षा के लिये सबसे पहले सेक्स की पोजीशन में बदलाव लाने चाहिये । किसी भी हालत में गर्भ पर या पेट पर दबाव नहीं पड़ना चाहिये । चौथे महीने से नौवें महीने तक सेक्स की फ्रीक्वेंसी कम कर देनी चाहिये । चौथे महीने में जहॉं सेक्स हफ्ते में एक बार करना चाहिये वहीं सातवें, आठवें महीने में एक बार ही सेक्स करना चाहिये ।
 ·        गर्भावस्था शुरू होते ही स्त्रीरोग विशेषज्ञ से नियमित परामर्श लेते रहना चाहिये ।
·        गर्भावस्था के दौरन मॉं को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है । ऐसे में डाइटिशियन से अलग अलग महीने का चार्ट बनवा लेना चाहिये और उसी हिसाब से नियमित भोजन लेना चाहिये ।  
·        गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक श्रम नहीं करना चाहिये ।

·        अपने मन से कोयी भी दवा नहीं लेनी चाहिये । डाक्टर के परामर्श से ही दवा लेनी चाहिये । बहुत सी दवाओं का गर्भ में पल रहे शिशुओं पर विपरीत असर पड़ता है ।

·        गर्भावस्था में योनि से खून आने पर डाक्टर को जरूर बतायें । इनफैक्शन या घाव होने पर या सफेद और पीला स्राव होने पर गंभीरता से लेना चाहिये और डाक्टर से तुरंत परामर्श लेना चाहिये ।
·        24 सप्ताह से पहले खून का आना गर्भपात के लक्षण हो सकते हैं । इसमें कभी खून कम आता है और कभी ज्यादा मात्रा में । ऐसे में स्त्रीरोग विशेषज्ञ को तुरंत दिखाना चाहिये ।
·        दूसरे महीने से कुछ विशेष सावधानियॉं बरतनी चाहिये जैसे भारी सामान उठाना नहीं चाहिये, अधिक सीढ़ियॉं नहीं चढ़नी चाहिये, उछलकूद से भी बचना चाहिये, अगर कोयी एक्सरसाइज पहले करती हैं तो उसे बंद कर देना चाहिये ।
·        चौथे महीने से ऊंचाई पर चढ़ना बंद कर देना चाहिये, दोपहर में आराम करना चाहिये ।
·        छठे महीने से आहार में परिवर्तन कर देना चाहिये । वैसे तो डाक्टर अलग से विटमिन्स, कैल्शियम और आयरन की गोलियॉं शुरू कर देते हैं पर यहॉं पर चटपटे, मिर्च-मसालेदार भोजन और फास्टफूड से परहेज करना चाहिये । धार्मिक और ज्ञानवर्धक साहित्य पढ़ना चाहिये ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे का संस्कार बनने लगे । ऐसे दिनों में टीवी और फिल्मों में भी अच्छे और खुशनुमा सीरियल और फिल्में ही देखनी चाहिये न की हॉरर और एक्शन फिल्में ।
·        आठवें और नौवे महीने में घर में हल्का फुल्का काम ही करें । अधिक झुकना नहीं चाहिये और जितना हो सके लेट कर वक्त गुजारना चाहिये ।

महत्वपूर्ण जांचें

गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर गर्भवती स्त्री की कई महत्वपूर्ण जांच करवाती हैं जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के बारे में जानकारी मिलती है और गर्भवती स्त्री के शरीर में हो रहे बदलावों और शरीर में कोयी कमी है तो उसकी जानकारी मिलती है । कुछ प्रमुख जांचे निम्नलिखित हैं ।
·        गर्भ में पल रहे बच्चे की फीटल डॉपलर मशीन से हृदयगति की जांच की जाती है ।
·        गर्भवती स्त्री के कूल्हे की हड्डियों की बनावट कैसी है ।
·        गर्भाशय में कोयी सूजन, रसौली या मांस आदि तो नहीं है ।
·        योनि या गर्भाशय में कोयी रोग तो नहीं है ।
·        गर्भवती स्त्री के रक्त की जांच, हीमोग्लोबिन की जांच (रक्त में आयरन की कमी से बच्चे के विकास पर असर पड़ता है)
·        ब्लडगु्रप की जांच और आर एच फैक्टर की जांच ।
·        सेक्सजनित रोगों की जांच । ये रोग भू्रण में पल रहे बच्चे के विकास को बाधित करते हैं ।
·        एच आई वी वायरस की जांच ।



·        अल्ट्रासाउंड एक बेहद जरूरी जांच है जच्चा और बच्चा दोनों के लिये । इसके द्वारा भू्रण के आकार, प्रकार, उम्र, दिल की धड़कन, विकास, शिशु के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की जानकारी, गर्भ में शिशु को हो रहे किसी रोग, जुड़वा बच्चे आदि  का पता चलता है ।

·        गर्भवती स्त्री को टिटनेस का इंजेक्शन जरूर देना चाहिये ।

गर्भवती स्त्री का भोजन
गर्भवती स्त्री का भोजन संतुलित होना चाहिये । गर्भ के दौरान गर्भवती स्त्री के भोजन में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और मिनरल्स की जरूरत बढ़ जाती है । गर्भ में पल रहा बच्चा भी मॉं के भोजन पर ही निर्भर करता है । गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिये आयरन और कैल्शियम बहुत जरूरी होता है । आयरन से खून की कमी नहीं होने पाती है और शिशु का विकास ठीक से होता है । कैल्शियम शिशु की हड्डियॉं निर्मित करता है इसलिये मॉं के खान पान में कैल्शियम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । आईये आपको बताते हैं की भोजन में किन किन चीजों से कौन कौन सा पोषण मिलता है ।
 पालक, बंद गोभी, पुदीना, धनिया, गुड़, किशमिश, मूंग की दाल, काबुली चना, लोबिया, राजमा और सोयाबीन के सेवन से गर्भवती स्त्री को आयरन मिलता है ।
 कैल्शियम के लिये गर्भवती स्त्री को दूध या दूध से बनी चीजें खानी चाहिये जैसे पनीर, दही, मक्खन आदि । अंडे में भी कैल्शियम काफी मात्रा में होता है । कम से कम एक गिलास दूध जरूर पीना चाहिये । कैल्शियम की कमी से मांसपेशियों में एठन, हड्डियों और कमर में  दर्द होने लगता है ।
 प्रोटीन भी गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिये जरूरी है । प्रोटीनयुक्त भोजन के लिये आप इन चीजों को भोजन में शामिल कर सकती हैं । दालें, चना, सोयाबीन, दूध से बनी चीजें जैसे पनीर, दही । मूंगफली, काजू, बादाम, खजूर । मांस और मछली के सेवन से प्रोटीन की अत्यधिक मात्रा प्राप्त की जा सकती है । पर शाकाहारी स्त्रियां ऊपर दी गयी चीजों को भोजन में शामिल करके प्रोटीन प्राप्त कर सकती हैं ।
फोलिक एसिड गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क और स्पाइनल कार्ड के विकास में आवश्यक होता है । यह हरी सब्जियों, मक्के के आटे, संतरे और चावल,  में  पाया जाता है ।
विटामिन डी हड्डियों के विकास के लिये बहुत जरूरी होता है । आजकल कैल्शियम की टैबलेट में यह मिक्स रहता है । यह हमें सूर्य की रोशनी से पर्याप्त मात्रा में मिलता है । इसलिये नवजात शिशु को कम से कम 15 मिनट के लिये दिन में एक बार हल्की धूप में ले जाना चाहिये ।
गर्भवती स्त्री को भोजन में मिनरल्स भी पर्याप्त मात्रा में लेते रहना चाहिये जैसे फॉसफोरस, कॉपर, आयोडीन, मैंगनीज, कोबाल्ट, जिंक इत्यादि । इनसे रक्त बनता है और मांसपेशियॉं मजबूत होती हैं । ये अधिक्तर सब्जियों, फलों और अंकुरित अनाज और दालो से प्राप्त होते हैं । 

गर्भावस्था के दौरान होने वाली आम परेशानियॉं
·        गर्भावस्था के दौरान स्त्री के शरीर के कई अंगों का रंग सांवला होने लगता है ऐसा त्वचा के नीचे मेलेनिन इकट्ठा होने का कारण होता है । यह शरीर में कई प्रकार के द्रव बनने के कारण होता है ।
·        गर्भावस्था के दौरान स्त्री के शरीर में कई जगह सफेद धारियॉं पड़ने लगती हैं जैसे नाभि से नीचे की ओर, पेट पर, स्तनों पर, जांघों पर । ऐसा मांसपेशियों के खिचाव के कारण होता है । अगर प्रसव के बाद नियमित मालिश या व्यायाम नहीं किया गया तब ये धारियॉं जल्दी नहीं जाती हैं ।
·        गर्भवती स्त्री के शरीर के कुछ हिस्सों में नसें दिखने लगती हैं । ऐसा खून के दबाव के कारण होता है । इनमें दर्द भी होता है । ऐसी दशा में अधिक देर खड़े नहीं रहना चाहिये और लेटते समय पैरों के नीचे कुशन या तकिया लगा लेनी चाहिये ।
·        आठवें, नौवें महीने में गर्भवती स्त्री को सांस लेने में दिक्कत आती है । यह गर्भ में पल रहे शिशु का आकार बढ़ने पर होता है जिससे फेफड़ों पर दबाव पडता है । ऐसी हालत में गर्भवती को आराम अधिक करना चाहिये ।
·        गर्भावस्था में स्त्रियों का ब्लडप्रेशर सामन्यतः लो हो जाता है जिसके कारण उन्हें चक्कर आने लगता है और घबराहट होने लगती है । ऐसे में डाक्टर से परामर्श लेना चाहिये ।
·        गर्भावस्था में स्त्रियों को शरीर में खुजली और जलन की भी शिकायत होती है । ऐसा त्वचा में खिचाव के कारण होता है । नारियल तेल या आलिव आयल का तेल लगाने से ये दिक्कत दूर हो जाती है ।
·        कमर दर्द की दिक्कत गर्भावस्था में आम बात है । ऐसा शरीर में प्रोटीन और कैल्शियम की कमी के कारण होता है । गर्भावस्था में  शरीर का भार बढ़ जाता है और कूल्हे की हड्डियों के ढीला होने के कारण होता है । ऐसी अवस्था में आराम अधिक करना चाहिये ।
·        गर्भावस्था में स्त्री को उल्टी की दिक्कत आती है । यह पेट में भोजन आगे न बढ़पाने के कारण होता है । इस वजह से पेट का फूलना, गैस बनना, हाजमा कमजोर होना, ऐसिडिटी, कब्ज इत्यादि की समस्या आती है । ऐसे में खाना थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिये । तुलसी की चाय, ग्रीन टी, इलायची खाने से  आराम मिलता है ।
·        गर्भावस्था के दौरान खून का दौरा कम हो जाता है ऐसे में हाथ पैर सुन्न होने लगते हैं । इन दिनों ढीले कपड़े पहनने चाहिये । ज्यादा दिक्कत होने पर डाक्टर से परामर्श लेना चाहिये ।
·        गर्भावस्था के दौरान स्त्री को खट्टा, इमली, कच्चे आम, मिट्टी खाने का मन करता है । यह शरीर में प्रोटीन और मिनरल्स की कमी के कारण होता है ।
·        गर्भावस्था के दौरान नींद कम आती है । यह भविष्य की चिंता के कारण भी होता है । मानसिक चिंताओं के बारे में घरवालों से सलाह लेनी चाहिये । चाय- काफी का प्रयोग कम कर देना चाहिये । तेल की हल्की मालिश और गर्म पानी से पिंडलियों की सिंकाई से भी नींद अच्छी आती है ।
·        गर्भावस्था के दौरान पैदल चलना और साफ हवा में सांस लेना अच्छा व्यायाम है । तेज नहीं चलना चाहिये और हील नहीं पहननी चाहिये ।
·        गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार का नशा, तमाखू या शराब गर्भ में पल रहे शिशु के लिये अत्यधिक हानिकारक होता है ।
·        गर्भावस्था में अपने से कोयी दवा नहीं लेनी चाहिये । डाक्टर के परामर्श से दवा लेनी चाहिये ।
·        गर्भावस्था के दौरान स्त्री के ब्लडप्रेशर पर हमेशा निगाह रखनी चाहिये । ब्लडप्रेशर अधिक हो जाने पर गर्भपात भी हो सकता है ।

 नवजाज शिशु की देखभाल
शिशु का टीकाकरण
जन्म के समय - हैपीटाईटिस बी, बी.सी.जी. और पोलियो का टीका
 दो माह बाद – पोलियो, डी.पी.टी., एच.आई.बी. और हैपीटाईटिस बी
तीसरे माह में - पोलियो और डी.पी.टी
चौथे माह में - पोलियो और डी.पी.टी और एच. आई.वी.
पांचवे माह में - पोलियो
छठे माह में - हैपीटाईटिस और एच आई वी
नौवे माह में - खसरा
बारहवे माह में  - चिकनपॉक्स और हैपीटाइटिस ए
अठारहवे माह में – पोलियो, डी पी टी, हैपीटाइटिस एच आई वी
दूसरे साल में - टायफाइड
3 वर्ष में – पोलियो, डी पी टी और हैपीटाइटिस बी
5 वर्ष में - टिटनेस

नवजात शिशु की देखभाल
 नवजात शिशु छः माह तक होने तक दिन में करीब 18 घंटे तक सोता है । जन्म के बाद शिशु के शरीर पर लाल व नीले रंग के कुछ निशान होते हैं जो कि कुछ माह में धीरे धीरे खत्म हो जाते हैं । शिशु को अकेला नहीं छोड़ना चाहिये । उसे बिस्तर पर पूरा ढक कर नहीं रखना चाहिये जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को तकिया या गद्दे का भ्रम हो जाये और वह उस पर अपने शरीर का भार डाल दे । बच्चा के रोने के कई कारण होते हैं जैसा भूख लगना, कपड़ा गीला होना, सर्दी जुकाम, पेट दर्द या गैस । बच्चा अकेलापन महसूस करने पर भी रोता है ।
सामान्यतः बच्चा 24 घंटे में पोट्टी करता है । बच्चे की पहली पोट्टी काली चिकनी होती है । 3-4 दिन बाद बच्चे की पोट्टी का रंग पीला होने लगता है । बच्चा दिन में कई बार पोट्टी करता है । नवजात शिशु के पैदा होने से 36 घंटे के अंदर पेशाब करनी चाहिये । अगर पेशाब न हो तो डाक्टर दिखाना चाहिये ।
बच्चों को नहलाते समय सावधानी बरतनी चाहिये । कभी भी बच्चे को  टब या बाल्टी में नहलाते वक्त अकेला नहीं छोड़ना चाहिये ।  बच्चे को नहलाने के लिये सामान्य साबुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये । बच्चे के कान में पानी न जाये इसके लिये कान में थोड़ी रूई लगा देनी चाहिये और नहलाने के बाद उसे फेंक देना चाहिये । बच्चे को लगाने के पावडर अलग से आते हैं । बच्चे के मलद्वार को रूई गीला करके हल्के से पोछना चाहिये नहीं तो वहां खरोंचें आ जाती हैं । 

नवजात शिशु को दूध की मात्रा और भोजन
 नवजात शिशु के लिये मॉं का दूध अमृत होता है । प्रसव के कुछ दिनों तक मॉं के स्तन से गाढ़ा पीला दूध निकलता है । इसे कोलस्ट्रम कहते हैं । इस दूध में जादुई गुण होते हैं । ये दूध इम्यून पावर से भरपूर होता है । ये दूध शिशु के लिये सुपाच्य होता है । मॉं के दूध से बच्चे को कोयी एलर्जी या शिकायत नहीं होती है जबकि बाहर के दूध से उसे दस्त या दूसरी बीमारियॉं हो सकती हैं । मॉं के सीने से लग कर स्तनपान करने से मॉं और बच्चे के बीच आत्मीय रिश्ता पनपता है । मॉं बच्चे को कभी भी स्तनपान करा सकती है पर बोतल से दूध देने से पहले दूध को पकाना पड़ता है, बोतल को गर्म पानी से साफ करना पड़ता है । कभी भी बच्चे को बोतल का बचा हुआ दूध दुबारा नहीं पिलाना चाहिये । 

स्तनपान कराते समय सावधानियॉं 

·        बच्चे को स्तनपान कराते वक्त उसकी नाक पर जोर नहीं देना चाहिये जिससे की उसे सांस लेने में तकलीफ हो ।

·       नवजात शिशु को केवल मॉं का दूध ही देना चाहिये । उन्हें अलग से पानी देने की जरूरत नहीं होती है ।
·        स्तनपान कराते समय बच्चे का सिर हमेशा ऊपर की ओर होना चाहिये और बैठ कर ही स्तनपान कराना चाहिये ।
·        स्तनपान के साथ बच्चा कुछ मात्रा में हवा भी पेट में ले जाता है जिससे पेट में गैस बनने लगती है । शिशु को छाती से लगा कर पीठ पर थपकी देने से शिशु की गैस निकल जाती है ।
·        स्तनपान के बाद स्तनों को गीले कपड़े से साफ करना चाहिये ।
·        बच्चे अधिक्तर एक ही करवट सोते हैं जिससे उनकी पाचनक्रिया प्रभावित होती है । मॉं को बच्चे की करवट बदलते रहना चाहिये ।  
·        यदि बच्चे को बीमारी के कारण आई सी यू में एडमिट किया गया है तब भी बच्चे को मॉं का दूध ही देना चाहिये । चाहे इसके लिये मॉं का दूध निकाल कर बूँद बूँद  ही पिलाने पड़े ।
·         दो से तीन माह के शिशु को गाय या भैंस का दूध दिया जा सकता है पर स्तनपान न होने की दशा में ही ।  
·        चार माह के शिशु को मॉं के दूध के अलावा मला हुआ केला, मला हुआ आलू या सेब, शहद पानी में मिलाकर, दाल का पानी दिया जा सकता है ।
·        छः माह के शिशु को पतली दलिया या खिचड़ी, दाल का पानी, बिस्कुट, मले हुये फल और रस, सब्जियों का सूप, अंडे का पीला भाग, दही दिया जा सकता है ।
·        दस माह के बच्चे को ताजी रोटी, सब्जी, दाल चावल, फल, वगैरह दिया जा सकता है पर मिर्च मसाला और तली भुनी चीजें अभी नहीं देनी चाहिये ।

प्रसव के बाद स्त्री की मालिश
 प्रसव के बाद स्त्री के शरीर की मांसपेशियॉं ढीली हो जाती हैं और इसलिये उन्हें दुबारा सुगठित बनाने के लिये मालिश बहुत जरूरी होती है । यह काम अनुभवी दाई या घर की अनुभवी महिलाओं से कराना चाहिये । मालिश से खून का दौरा सही होता है और मांसपेशियॉं कसने लगती हैं । मालिश के लिये सरसों, तिल, बादाम रोगन, ओलिव आयल का प्रयोग किया जा सकता है । मालिश करते वक्त बहुत ताकत लगाने की जरूरत नहीं है । मालिश उंगलियों और हथेलियों से ही की जानी चाहिये । मालिश से खून का दौरा सही हो जाता है और शरीर में चुस्ती आती है । शरीर फिर पहले की तरह गठीला और स्लिम हो जाता है ।


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सम्बन्ध बनाने के दौरान दर्द क्यूँ होता है

         सम्बन्ध बनाने के दौरान दर्द क्यूँ होता है  अगर प्यार करने के दौरान आपको दर्द का एहसास होता है तो सबसे महत्वपूर्ण यह नोट करना...