Saturday, 21 October 2017

सम्बन्ध बनाने के दौरान दर्द क्यूँ होता है

         सम्बन्ध बनाने के दौरान दर्द क्यूँ होता है 


  • अगर प्यार करने के दौरान आपको दर्द का एहसास होता है तो सबसे महत्वपूर्ण यह नोट करना है कि आपको किस जगह पर होता है यानी दर्द आपको योनि (vagina) के अंदर होता है या योनि के मुह के आसपास | सेक्स के दौरान होने वाले दर्द को( दाईस्पेरेनिया) के मेडिकल टर्म से जाना जाता है | दाईस्पेरेनिया करीब-करीब महिलाओ के लिए है मगर कभी कभी यह पुरुषो को भी प्रभावित करता है |महिलाओ के लिए असामान्य नहीं है सेक्स के दौरान दर्द होना हालाँकि उनमे दाईस्पेरेनिया, अगर वगीनिस्मुस के साथ अक्सर होता है | वगीनिस्मुस एक सामान्य अवस्था है जिसमे योनि की मांसपेशीया , लिंग प्रवेश के दौरान, में ऐंठन आ जाती है और यह मुख्यतः डर के कारण होता है कि लिंग या पेनिस के कारण उन्हें बहुत दर्द होगा |
  • जब लिंग योनि में प्रवेश करता है तब एक बहुत तेज़ जलन की अनुभूति होती है और इस जलन के साथ साथ बहुत तेज़ खुजली और कॉटेज-चीस की तरह योनि से डिस्चार्ज होता है | खमीर(Yeast) संक्रमण महिलाओ में बेहद आम होता है और इस संक्रमण के कारण होने वाले सूजन के कारण लिंग प्रवेश के समय बहुत ज्यादा दर्द होता है | जब तक इस संक्रमण को ठीक ना हो जाए और सेक्स करने के कारण संक्रमण अपने पार्टनर को पास हो सकता है और आपका पार्टनर च्लाम्य्डिया या ( गोनोरिया ) से भी संक्रमित हो सकता है और ऐसा होने पर महिला चिकित्सा विशेषज्ञ से  तुरन्त मिले | 
  • सेक्स के दौरान अगर आपकी पार्टनर पेट के निचले हिस्से और कमर में बहुत तेज़ दर्द अनुभव होता है जब आपका लिंग या आपकी ऊँगली गर्भाशय ग्रीवा(  cervix ) को टच करती है | श्रोणि सूजन की बीमारी (Pelvic Inflammatory Disease ) जननागो का संक्रमण के कारण इस तरह का दर्द होता है और यह आपके पार्टनर के च्ला म्य्डिया या गोनोरिया से संक्रमित होने के संकेत हो सकता है और ऐसा होने पर अपना खुद का इलाज़ करवाए क्यूंकि आपके पार्टनर को इन्फेक्शन या संक्रमण  हो सकता है और आपको यह इन्फेक्शन अपने पार्टनर से मिल सकता है| 
  • सेक्स करते करते अचानक से अगर तेज़ दर्द का अनुभव हो और ऐसा हमेशा  ना हो और यह कभी कभी होता हो तो इसका मतलब है कि आपने अपने लिंग से या अपनी ऊँगली से अपने पार्टनर के cervix को आघात किया है और सेक्स पोजीशन बदल कर इस दर्द से बचा जा सकता है |

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Sunday, 8 October 2017

महिला साथी को सेक्स के लिए उतेजित करने के विशेष तरीके

महिला साथी को सेक्स के लिए उतेजित करने के विशेष तरीके 



महिलायें बहुत ही रोमांचित महसूस करती है जब पुरुष उसके नीचे के अंगो की तरफ मुखातिब होता है। मुख मैथुन या ओरल सेक्स सम्भोग के दौरान किया जाने वाली एक बहुत ही नैसर्गिक आनंददायी और रोमांचकारी क्रिया है। इसके इस्तेमाल से आप अपने वैवाहिक जीवन या सम्बन्ध में एक नयी उमंग भर सकते हैं। अपने साथी को सम्भोग के दौरान नए अहसास दे सकते हैं। मुख मैथुन वर्षो से चली आ रही प्रक्रिया है ये कोई अब की नयी बात नहीं है जिसे आजकल ज्यादातर पोर्न फिल्मो में दिखाया जाता है। मुख मैथुन का वर्णन कामसूत्र में भी है। आज हम आपको बताते हैं मुख मैथुन से जुड़े ऐसे सुझाओं से जिसके इस्तेमाल से आप अपने यौन जिंदगी में नयी उमंग लाकर अपने महिला पार्टनर को अदभुत रोमांच दे सकते है |

साफ़ सफाई का विशेष ध्यान दे पहले दोनों पार्टनर अपने जनांगो को अच्छी तरह से साफ़ करले 

नारी  का संवेदनशील अंग भग्न शीश स्पर्श मात्र से प्रेम और उतेजक उमड़ता है 
उसे अच्छा लगता है जब आपका ध्यान उसके भग्न शीश (क्लिटोरिस) की तरफ जाता है। भग्न शीश महिलाओं के जननेन्द्रियों का सबसे सवेंदनशील हिस्सा होता है। यहाँ किसी भी तरह का स्पर्श महिलाओं को उत्तेजना से भरपूर कर देता है। पर अगर बस इसी जगह पर ज्यादा ध्यान देना और हिस्से को चूमना महिलाओं को थोड़ा बोर भी कर सकता है। मुख मैथुन की क्रिया के दौरान अपनी जीभ का इस्तेमाल पूरी तरह करें। जीभ को सीधे कर के उसके उस हिस्से को छुएं, कभी हलके से कभी जोर से उसके क्लिटोरिस को जीभ से छुएं। अपनी जीभ में आप जितने भी अलग वैरीएशन देंगे मुख मैथुन का मजा उसके लिए और भी ज्यादा होगा।

मुख मैथुन में सतर्कता बरते 

मुख मैथुन की क्रिया जल्दी जल्दी रोटियां सेंक कर खाने जैसी नहीं है। इसे आराम से करें । ये किसी पांच सितारा होटल में पुरानी शराब को चखने जैसी प्रक्रिया है जिसे जितने आहिस्ता जितने आराम से करें मजा उत ना ही आएगा। उसके जाँघों की निचली सतहों को चूमें, अपने होठों से उसके भगोष्ठ (labia) को चूमें, उस जगह गर्म साँसे छोड़े। ऐसा करना उसको आनंद की पराकाष्ठा पर पहुंचा देगा।

प्रेम और उतेजना का ज्वार चरम्पर

वो आपकी जिंदगी का एक हिस्सा है, आपकी पत्नी है, प्रेमिका है या महिला मित्र है। वो एक सामान्य सी लड़की है कोई पोर्नस्टार नहीं है इसलिए मुख मैथुन के समय पोर्न फिल्मों में अपनाएं गए तरीकों से बचे। उसके भग्न शीश के पास अपने जीभ को गोल गोल घुमाएं कभी क्लॉकवाइज तो कभी एंटीक्लॉकवाइज। आपको कुछ ही पलों में अंदाजा हो जाएगा की आप जो कुछ भी कर रहे हैं सही जगह कर रहे हैं और आपके इन मूवमेंट्स से उसे स्वर्ग जैसा सुख मिल रहा है।

परमानन्द की अनुभूति स्वत: होगी 

अगर आप बिस्तर पर ये सोचकर जा रहे हैं की आज उसे चात्मोत्कर्ष के उत्कर्ष पर पहुंचा देंगे तो थोड़ा सचेत हो जाइए।आप बिस्तर पर बस ये सोचकर जाएँ की आज की रात आप उसे अपने प्रेम अपने स्पर्श से किसी और लोक की सैर कराएँगे। आपकी सोच बस आनंद तक सिमित रहनी चाहिए। आप ये कतई सोचकर बिस्तर पर न जाएँ की आज आप उसे इजैकुलेट करने पर मजबूर कर देंगे। वो इस पल में खोना चाहती है। अगर आप अपने आप में समां लेंगे तो वो खुद ब खुद आनंद के समंदर में डूब जायेगी।

प्रेमभाव को प्रदर्शन को विशेष निर्देशक सदेव याद रखे 

उन सारी बातो को ध्यान में रखे जब वो आपके पुरुषार्थ के स्तम्भ, आपके शिश्न को चूमती है। क्या आपको उसका आपके शिश्न को हौले हौले चूसना या चूमना पसंद है, या थोड़े जंगली तरीके से या फिर आप अपने शिश्न पर उसके दाँतो के स्पर्श को महसूस करना पसंद करते हैं। मुख मैथुन के समय आप जैसा भी महसूस करते होंगे या आपको जो कुछ भी अच्छा लगता होगा उसे भी कुछ ऐसा ही लगता होगा। इसलिए अगली बार जब उसके नाभि के नीचे उतरें तो इन बातों को ध्यान में रखें। 

सेक्स के दौरान दोनों एक दूसरे में समा जाये 

मुख मैथुन की प्रक्रिया में अगर एक बार भी उसे ऐसा लगने लगे की आप अब बोर और असहज मह्सुश कर रहे हैं तो वो तुरंत ही आपसे अलग हैट जायेगी और मुख मैथुन से पर हो जायेगी। इसलिए हमेसा प्यार के इस खेल को दो तरफ़ा बनाये रखने में अपनी कोई कसर ना छोड़ें। उसे यह जताते रहे की प्रेम की यह अभिव्यक्ति कितनी पवित्र और कितनी आनंदमयी है। उसे कभी यह महशुस करने का मौक़ा न दे की वो बस एक ऑब्जेक्ट है, उसे अपने प्यार से अपने स्पर्श से जीवंत होने का अहसास करते रहें


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Thursday, 5 October 2017

बांझपन या ( infertility) की समस्या किन कारणों से पाया जाता है

बांझपन  या ( infertility) की समस्या किन कारणों से पाया जाता है


एक आदमी या पुरुष के लिए सबसे बड़ी ख़ुशी में से एक दुसरे जीवन को धरती पर लाना है मगर कई पुरुष समय से पहले अपनी पौरुष या बच्चे पैदा करने कि क्षमता खो कर अपनी ख़ुशी को लुटवा चुके होते  है | हमारे कुछ आदतो का दुष्परिणाम हमारी इस क्षमता के लिए बहुत हानिकारक और नुक्सानदेह है क्यूंकि कोई भी आदमी (Infertility) या बांझपन की समस्या से वास्तव में बचा हुआ नहीं है इसलिए यह बहुत जरुरी है कि हम इसके कारण और निदान को जाने |

अपनी पॉकेट में सेलफोन रखना

यूनिवर्सिटी ऑफ़ एक्सेटर के एक रिसर्च के अनुसार सेलफोन जब आप अपने पॉकेट या जेब में रखते है तो सेलफोन के रेडिएशन का बुरा असर आपके स्पर्म की गुणवता और गति पर पड़ता है| सेलफोन के रेडिएशन के कारण स्पर्म की गतिशीलता 8% तक कम हो जाती है और स्पर्म की जीवन क्षमता 9% से इसलिए यह कोशिश करे कि सेलफोन को अपने जेब या पॉकेट में कम से कम रखे |

शराब का अत्यधिक सेवन

शराब या अल्कोहल शरीर को जस्ता या zinc अवशोषित करने की क्षमता कम कर देता है जो स्वस्थ स्पर्म के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है | अल्कोहल जर्म कोशिकाओं में टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन और म्यूटेशन कम कर देता है और जिसका सीधा असर स्पर्म काउंट पर पड़ता है | यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है की अल्कोहल या शराब की कितनी मात्रा नुकसानदायक है मगर हमारी राय है की शराब या अल्कोहल के सेवन से जितनी दूर रहा जाय , उतना स्पर्म के स्वास्थ्य के लिए वो सही है |

कैफीन की खपत अधिक

हमारी आदत जिसका सबसे बुरा असर हमारे पौरुष पर पड़ता है है वो है कैफीन का अध्यधिक सेवन| कैफीन चाय और कॉफ़ी में अल्प मात्रा में और अध्याधिक मात्रा में सिगरेट, सिगार और शीशा में पाया जाता है| किसी भी रूप में 300 mg कैफीन का सेवन स्पर्म काउंट और उसकी गतिशीलता को कम कर देता है| शोधकर्ताओं ने पाया है कि एक दिन में 20 सिगरेट का सेवन 50% स्पर्म को मार देता है| 2 कप कॉफ़ी, छह कप चाय और caffeinated कोला का सेवन प्रतिदिन करने से स्पर्म काउंट और उसकी गतिशीलता पर बुरा असर डालता है |

अत्यधिक गर्मी

यह सबको पता है कि हमारे अंडकोष ,शरीर के तापमान से 2 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर ज्यादा अच्छे ढंग से काम करता है और स्पर्म का स्वस्थ्य स्पर्म का निर्माण करता है और यही कारण है कि वृषण अंडकोषीय थैली में जन्म के समय में उतरता है और जब अंडकोष का तापमान शरीर के तापमान के बराबर या ज्यादा हो जाता है तो अंडकोष के स्पर्म की निर्माण कि क्षमता पर बहुत असर पड़ता है|

मानसिक तनाव 

यह अभी तक विवादास्पद है कि तनाव और डिप्रेशन के कारण इनफर्टिलिटी होती है मगर शोधकर्ताओ ने यह साबित किया है डिप्रेशन और तनाव के दौरान हाईपोथेलेमिक पिट्यूटरी – एड्रि‍नल धुरी बाधित होती है और थाइरोइड शिथिलता के कारण सेक्स करने की चाहत में कमी आती है तो बाद में इनफर्टिलिटी का कारण बनती है |

टाइट जीन्स पहनना या बहुत टाइट ( Undergarments ) पहनना

नए दौर का फैशन, टाइट जीन्स पहनना , का भी बुरा असर पुरुष में इनफर्टिलिटी का कारण बन कर आया है| यह अंडकोष के क्षेत्र में गर्मी का अधिक उत्पादन तो करता है ही करता है और साथ ही साथ जननांग पथ सूजन और रक्त के संचार को भी रोकता है और इसका सीधा असर पुरुष के पौरुष पर पड़ता है |

मोटापा 

मोटापे के कारण हाइपोथेलेमस से हार्मोन जारी होने वाले हॉर्मोन गोनाडोट्रोपिन के निर्माण में कमी आ जाती है और किसके कारण पुरुष में हायपोगोनादिस्म( Hypogonadism ) की स्थिति आ जाती है और फलस्वरूप अंडकोष अपनी कार्यक्षमता पूरी तरह से खो सकता है और आदमी पूरी तरह से नपुंशक बन सकता है |

लम्बे समय तक बैठे रहना

लम्बे समय तक बैठे रहने के कारण पेल्विक क्षेत्र में रक्त के सप्लाई में कमी आ जाती है और फलस्वरुप जनन अंग में जरुरत के अनुसार रक्त या ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है और रक्त या ऑक्सीजन की कमी के कारण कोशिकाए गलने लगती है इसलिए एक्सपर्ट यह suggest करते है की हमे कम से कम 45 मिनट तक प्रतिदिन लगातार खड़े रहना चाहिए या कम से कम 30 मिनट के लिए व्यायाम करना चाहिए |

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Thursday, 28 September 2017

प्यार करने का सबसे बेहतर समय कब रहता है

प्यार करने का सबसे बेहतर समय कब रहता है

प्यार दिन के किस समय में बेहतर है यह बात प्रेमी जोड़ों के दिमाग में आता रहता है तो यह आश्चर्य करने के लिए यह असामान्य नहीं है और जब आप अपने  पार्टनर के साथ किसी भी समय अकेले हो, आप और आपके  पार्टनर दोनों उत्तेजित  हो सकते है और यह सोचना बिलकुल सामान्य है कि सेक्स ज्यादा उत्तेजनापूर्ण हो सकता है अगर उसे दिन के किसी खास समय पर किया जाए | यहाँ तक सेक्स विशेषज्ञों कि भी राय है कि ऐसा करने का कोई समय नहीं है जिसे पूर्णत; यह कहा जा सके कि वो सेक्स करने के लिए सबसे उपयुक्त  समय है मगर समय के कारण हमारे शरीर अलग अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है और समय के चुनाव में वो प्रतिक्रियाये एक बहुत महत्वपूर्ण कारण बन सकता है |

एक शोध के अनुसार पुरुषो के लिए सुबह का समय और महिलाओ के लिए दोपहर का समय सेक्स करने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है| हम कुछ शोध और आंकड़े के अनुसार घंटे दर घंटे के हिसाब से आपके लिए सेक्‍स करने का सबसे अच्छा समय लेकर आये हैं जो आपके और आपके पार्टनर के लिए शारीरिक जरुरत और हॉर्मोन के हिसाब से ज्यादा सही हो सकता है |
सुबह  4:00 से 5:00 के बीच का समय 

सुबह में सेक्स कभी कभी एक कल्पना से ज्यादा और कुछ नहीं लगता है , क्यूंकि इस समय हमारे आँखों में नींद होती है, रात के पसीने से शरीर में बदबू , ड्रैगन की तरह बदबूदार साँसे और शायद हैंगओवर मगर वास्तव में सुबह में सेक्स करना स्वास्थ्यप्रद  है क्यूंकि इस समय पुरुष के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर पूरे दिन की तुलना में सबसे ज्यादा होता है |सुप्रसिद्ध सायको सेक्सोलाजिस्ट  डॉ० बी० के० कश्यप  के अनुसार जब पुरुष के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अधिक हो और उसने अच्छे से आराम किया हो , उसके पास सेक्स के दौरान खर्च करने के लिए बहुत अच्छी ऊर्जा होती है और इस अधिक एनर्जी के कारण वो सेक्स में लम्बे समय तक परफॉरमेंस दे पाता है | आपकी महिला पार्टनर इस बात को नहीं समझ पाएंगी कि आपके अन्दर क्या आया है मगर जो उनके अंदर गया है उसके कारण वो आपसे और ज्यादा प्यार करेंगी |
जिन पुरुषो को स्पंदन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) की शिकायत है , उनके लिए सेक्स करने के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त होता है और इसी समय हार्मोन ऑक्सीटोसिन का स्तर अपने शरीर में सबसे अधिक हैं| यह हार्मोन न केवल मूड में सुधार लाने के लिए मदद करता है और यह एक प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में भी कार्य करता है और सेक्स को अधिक सुखद बना सकता हैं| सुबह सेक्स के कारण एंडोर्फिन हॉर्मोन रक्त दवाब और मानसिक तनाव के स्तर को कम करता है जिससे दिन को और अधिक आराम के लिए बनाता है | सुबह का सेक्स शरीर में IgA के स्तर को बढ़ा कर हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है | IgA एक एंटीबॉडी है जो संक्रमण से हमारी रक्षा करती है | सेक्स के क्लाइमेक्स के समय एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन नामक रसायन रिलीज़ होते है जिससे हमारी त्वचा और बालो के टोन और बनावट में सुधार होता है|

दोपहर 12:00 से 15:00 के बीच का समय 

जो जोड़े संतान की कामना करते है उन्हें दोपहर के समय सेक्स का आनंद जरुर उठाना चाहिए क्यूंकि एक महिला की प्रजनन प्रणाली इन घंटों के दौरान सबसे अच्‍छी होने के साथ साथ वीर्य उत्‍पादन की भी अच्छी गुणवत्ता होती है| यह बात गौर करने लायक है कि इन समय के दौरान असुरक्षित सेक्स करने का फल आपकी महिला पार्टनर के गर्भवती बन कर हो सकता है | कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी मानते है कि दोपहर में किये सेक्स से लम्बे और मजबूत ओर्गास्म तक पहुचने की संभावना भी बढ  जाती है |
रात 8:00 से 11:00 के बीच का समय 

लंबे दिनों की मेहनत, व्यस्त कार्यक्रम और तनाव के कारण कुछ पुरुषों के लिए रात में सो पाना कठिन हो जाता है चाहे वो कितने भी थके हुए क्यूँ ना हो | एक सुरक्षित और प्राकृतिक विधि जिसमे आपको चैन की नींद सोने में मदद करता है, वह है सम्भोग या सेक्स की क्रिया में संलग्न होना है |
सेक्स हमारे दिमाग में कुछ रासायनिक प्रतिक्रियाओं के बाद हमें उत्साह की भावनाओं को प्रदान करता है | चरमोकर्ष के बाद हमारा शरीर ऑक्सीटोसिन , एंडोर्फिन और सेराटोनिन जैसे हार्मोंस को रिलीज़ करता है जो संतोष प्रदान करने वाला और दर्द निवारक का काम करता है और इसके साथ साथ सेक्स तनाव और अवसाद को भी कम करता है और जिसके कारण शरीर के अंदर आराम और शांतिपूर्ण भावना आती है और पुरुष चैन की नींद सो पाता है |

अन्तिम निष्कर्ष 
अगर सेक्स चिकित्सक से यह पुछा जाए कि दिन का कौन सा समय सेक्स के लिए सबसे उपयुक्त है तो जवाब आएगा कोई नहीं क्यूंकि दिन या रात के किसी भी समय आप सेक्स कर सकते हो जब तक आप और आपकी पार्टनर संतुष्ट और खुश है मगर समय का प्रभाव केवल शरीर में होने वाले बदलाव पर निर्भर करता है और उस हिसाब से सुबह में किया हुआ सेक्स सबसे महत्वपूर्ण है ठीक उसी तरह जैसे भोजन में सुबह में की जाने वाली नाश्ता | मगर अगर दिन कि शुरुवात ओर्गास्म या परम सुख से किया जाए तो इसमें क्या परेशानी है | यही आप सेक्स को नींद और रिलैक्स के लिए करना चाहते है तो रात्री सबसे उपयुक्त समय है मगर आप संतान प्राप्ति के लिए सम्भोग का आनंद लेना चाहते है तो दिन का समय और अगर आप अपने दिन को उर्जावान बनाना चाहते है तो सुबह सबसे उपयुक्त समय है | इसका मतलब यह हुआ कि परिस्तिथि और इंसान के जरुरत के अनुसार सेक्स का समय निश्चय किया जा सकता है |

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Saturday, 23 September 2017

पहली बार टॉप सेक्स पोजिशन कैसा होना चाहिए ?

पहली बार  टॉप सेक्स पोजिशन कैसा  होना चाहिए  ?


पहली बार या फर्स्ट टाइम सेक्स विशेष या स्पेशल होनी चाहिए क्यूंकि अंततः आप अपने सपनो के पार्टनर के साथ नए जीवन का अनुभव करने के लिए तैयार हो चुके है | चाहे यह आपकी सुहागरात हो या नहीं हो, फर्स्ट टाइम सेक्स का अनुभव ज़िन्दगी भर आपको सुखमय आनंद की अनुभूति दे सकता है| अगर आपको डर इस बात का है आपका (अनाड़ीपन ) या अनुभव की कमी इस अनमोल या अमूल्य मिलन को ख़राब ना कर दे तो हम आपके लिए ले कर आये ऐसे कुछ ख़ास सेक्स पोजीशन जिसमे आप और आपके पार्टनर इस पहली बार के सेक्स के अनुभव को हमेशा याद रख पायेंगे |
1) मिशनरी सेक्स पोजीशन
जब आप पहली बार सेक्स करते है तो बेहतर होगा की आप आराम से और धीरे धीरे कामुक माहौल बना कर पेनीट्रेट वाले अवस्था में पहुचे और अधिक से अधिक समय फोरप्ले में बिताये| जब आप और आपकी पार्टनर  तैयार हो गए हो,  तो अपनी पार्टनर को पीठ के बल पर लिटाये और उनके पैर को ऊपर की तरफ उठाए और तत्पश्चात अपनी पार्टनर को पेनीट्रेट करे और जूनून को आगे बढने दे| एक ताल के साथ आप आगे पीछे हो कर झटके दे और याद रखे कि अगर आपको इसे यादगार बनाना है तो कोई भी जल्दबाजी ना दिखाए और अपने हांथो से अपने पार्टनर के शरीर के अन्य हिस्सों , जैसे बूब्स, क्लिटोरिस को धीरे धीरे अच्छे से सहला कर अपने पार्टनर को अधिक से अधिक उतेजित करके उन्हें ओर्गास्म दिलाने की कोशिश करे |
2) गर्ल ऑन टॉप सेक्स पोजीशन
पुरुषो को सबसे ज्यादा पसंद आने वाले सेक्स पोजीशन में एक है और इस पोजीशन का नाम आते ही पुरुष उतेजित हो जाते है | इस पोजीशन में महिला पार्टनर अपने पुरुष पार्टनर के ऊपर होती है और जिसके कारण लिंग योनी के अन्दर पूरी तरह से समा जाता है और दोनों के लिए असीम आनंद का अनुभव होता है | पुरुष इस पोजीशन में महिला पार्टनर के शरीर( स्तन और क्लिटोरिस ) को उतेजित करके उन्हें ओर्गास्म दिलवा सकते है|
3) 69 सेक्स पोजीशन
इस पोजीशन में पुरुष और महिला दोनों
 अपने मुह और जीभ का इस्तेमाल करते है और इसमें penetrative सेक्स की जगह ओरल सेक्स होता है | इस पोजीशन में दोनों पार्टनर्स अपने अपने मुह से दुसरे पार्टनर के सेक्स ऑर्गन को उतेजित करते है | इस पोजीशन में पुरुष अपने जीभ और ऊँगली से वेजाइना और क्लिटोरिस के साथ खेलते है जबकि महिला अपने मुह और जीभ से पुरुष के लिंग को उतेजित करती है | इस पोजीशन में दोनों पार्टनर्स को ओर्गास्म प्राप्ति की संभावना बराबर होती है तभी इसे सबसे बेहतर सेक्स पोजीशन माना जाता है

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Friday, 15 September 2017

आइये जानते है क्या हैं पीरियड्स से जुड़ी कुछ जानकारिया

आइये जानते है क्या हैं पीरियड्स से जुड़ी कुछ जानकारिया

महीने के वो दिन सभी महिलाओं के लिए कष्टप्रद ही होते हैं। हालांकि ये एक ऐसा शारीरिक चक्र हैं जिसके होने पर भी महिलाओं को कष्ट उठाना पड़ता है और नियमित रूप से न होने पर दूसरी कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। पीरियड्स का दर्द हर महिला के लिए अलग होता है। पीरियड्स में न केवल पेट में दर्द रहता है बल्कि पैर और पीठ में भी काफी तकलीफ बनी रहती है।
(मेन्स्ट्रूअल साइकल,) ( महीना, ) (मासिक धर्म, ) (पीरियड्स )  को लड़कियां आम बोलचाल में डाउन भी कहती हैं। यह लड़कियों में होना एकदम सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। यह उतनी ही कुदरती है, जितना कि नाक का बहना। जन्म के वक्त से ही किसी भी लड़की की ओवरी या अंडाशय में पहले से लाखों अपरिपक्व अंडे मौजूद होते हैं। 12 से 15 साल की उम्र होते-होते ओवरी में से दसियों अंडे महीने में एक बार विकसित होने शुरू हो जाते हैं। इसके लिए( एस्ट्रोजन ) और ( प्रोजेस्ट्रोन  )नाम के हॉर्मोन जिम्मेदार होते हैं। इस उम्र में लड़कियों के शरीर में कई बदलाव भी आते हैं, जैसे ब्रेस्ट और हिप्स का साइज बढ़ना। यह बेहद सहज प्रक्रिया है वैसे ही, जैसे कि छोटे बच्चे के दांत निकलना या उसका पहली बार चलना। 
क्या करें इस दौरान ?

1. साफ कपड़ा या पैड इस्तेमाल करें
सबसे जरूरी है कि आप साफ कपड़े या पैड का इस्तेमाल करें। अगर बाजार से सैनिटरी पैड्स खरीद रही हैं तो उसकी क्वॉलिटी में समझौता न करें । घर के पुराने  सूती कपड़े का इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है, बशर्ते कपड़े को अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाया गया हो। 

2. दिन में कम-से-कम 3 बार बदलें
कपड़े या पैड को दिन में कम-से-कम 3 बार बदलें। पीरियड्स के शुरुआती दिनों में जब खून का बहाव ज्यादा होता है तो तो 4-6 बार पैड बदलें। कई बार देखा गया है कि पीरियड्स के आखिरी दिनों में एक ही पैड 12-12 घंटे तक रह जाता है। ऐसा करने से प्राइवेट पार्ट के अंदर और आसपास बैक्टीरिया पैदा हो सकते हैं। बदबू भी आती है। 

3. सेक्स से दूरी बनाएं रखना ही बेहतर होगा
पीरियड्स के दौरान शरीर में थकान और दर्द होता है। ऐसे में सेक्स न करना ही बेहतर है । अगर दर्द न हो तो भी सेक्स नहीं करना चाहिए क्योंकि इस दौरान प्राइवेट पार्ट की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। ऐसे में सेक्स के दौरान दर्द हो सकता है और दोनों पार्टनर्स को इन्फेक्शन का खतरा रहता है। पीरिड्स के आखिरी दिनों में सेक्स संबंध बनाए जा सकते हैं, लेकिन कॉन्डम का इस्तेमाल करें। असुरक्षित सेक्स न करें। हालांकि बेहतर है कि पूरे पीरियड्स के दौरान संबंध न बनाएं। वैसे, एक मिथा  यह भी है कि पीरिएड्स के दौरान सेक्स करने से पुरुषों की सेक्स क्षमता कम होती है। दूसरा मिथा यह  भी है कि अगर पीरियड्स में सेक्स किया तो प्रेग्नेंसी के चांस कम होते हैं लेकिन यह सही नहीं है। इस दौरान सेक्स करना भी पूरी तरह सेफ नहीं है। 


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Saturday, 9 September 2017

पेनिस में कैसे आती है उत्तेजना [ इरेक्शन ]

 पेनिस में कैसे आती है उत्तेजना  [ इरेक्शन   ]




पेनिस में इरेक्शन विचार से होता है, स्पर्श से होता है। दिमाग में एक सेक्स सेंटर है। जब वह उत्तेजित होता है तो मेसेज पेनिस की तरफ जाता है। बदन में खून का प्रवाह तेज हो जाता है। पूरे शरीर में पेनिस में खून का प्रवाह सबसे ज्यादा तेज होता है। इसी वजह से लिंग में उत्तेजना ओर स्त्रियों की योनि में गीलापन आता है। पेनिस के इरेक्शन के लिए योग्य हॉर्मोन का होना जरूरी है। पुरुषों में 60 साल के बाद और महिलाओं में 45 साल के बाद हॉर्मोन की कमी होने लगती है।

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इरेक्टाइल डिस्फंक्शन क्या है:आइये जानतें है डॉ० बी० के ०कश्यप

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन क्या है:आइये जानतें है डॉ० बी० के ०कश्यप 



सेक्स के दौरान या उससे पहले पेनिस में इरेक्शन या (तनाव) के खत्म हो जाने को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या  कहते हैं। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कई तरह का हो सकता है। , कुछ लोगों को बिल्कुल भी इरेक्शन न हो, कुछ लोगों को सेक्स के बारे में सोचने पर इरेक्शन हो जाता है, लेकिन जब सेक्स करने की बारी आती है, तो पेनिस में ढीलापन आ जाता है। इसी तरह कुछ लोगों में पेनिस वैजाइना के अंदर डालने के बाद भी इरेक्शन की कमी हो सकती है। इसके अलावा, घर्षण के दौरान भी अगर किसी का इरेक्शन कम हो जाता है, तो भी यह इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की निशानी है। इरेक्शन सेक्स पूरा हो जाने के बाद यानी इजैकुलेशन के बाद खत्म होना चाहिए। कई बार लोगों को वहम भी हो जाता है कि कहीं उन्हें इरेक्टाइल डिस्फंक्शन तो नहीं । सीधी सी बात है कि आप जिस काम को करने की कोशिश कर रहे हैं, वह काम अगर संतुष्टिपूर्ण तरीके से कर पाते हैं तो सब ठीक है और नहीं कर पा रहे हैं तो समस्या हो सकती है। जिन लोगों में यह दिक्कत पाई जाती है, वे चिड़चिड़े हो सकते हैं और उनका कॉन्फिडेंस लेवल भी कम हो सकता है। 

वजह: इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह (शारीरिक) भी हो सकती है और( मानसिक  ) भी।  हो सकती है अगर किसी खास समय इरेक्शन होता है और सेक्स के समय नहीं होता, तो इसका मतलब यह समझना चाहिए कि समस्या मानसिक स्तर की है। खास समय इरेक्शन होने से मतलब है- सुबह सोकर उठने पर, पेशाब करते वक्त, मास्टरबेशन के दौरान या सेक्स के बारे में सोचने पर। अगर इन स्थितियों में भी इरेक्शन नहीं होता तो समझना चाहिए कि समस्या शारीरिक स्तर पर है। अगर समस्या मानसिक स्तर पर है तो साइकोथेरपी और डॉक्टरों द्वारा बताई गई कुछ सलाहों से समस्या सुलझाई जा सक्ती है। 

- शारीरिक वजह ये चार हो सकती हैं : चार छोटे एस (S) बड़े एस यानी सेक्स को प्रभावित करते हैं। ये हैं : शराब, स्मोकिंग, शुगर और STRESS ।

- हॉर्मोंस डिस्ऑर्डर्स इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की एक खास वजह है।

- पेनिस के सख्त होने की वजह उसमें खून का बहाव होता है। जब कभी पेनिस में खून के बहाव में कमी आती है तो उसमें पूरी सख्ती नहीं आ पाती और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। कुछ लोगों के साथ ऐसा भी होता है कि शुरू में तो पेनिस के अंदर ब्लड का फ्लो पूरा हो जाता है, लेकिन वैजाइना में एंटर करते वक्त ब्लड का यह फ्लो वापस लौटने लगता है और पेनिस की सख्ती कम होने लगती है।

- नर्वस सिस्टम में आई किसी कमी के चलते भी यह समस्या हो सकती है। यानी न्यूरॉलजी से जुड़ी समस्याएं भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह हो सकती हैं।

- हमारे दिमाग में सेक्स संबंधी बातों के लिए एक खास केंद्र होता है। इसी केंद्र की वजह से सेक्स संबंधी इच्छाएं नियंत्रित होती हैं और इंसान सेक्स कर पाता है। इस सेंटर में अगर कोई डिस्ऑर्डर है, तो भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन हो सकता है।

- कई बार लोगों के मन में सेक्स करने से पहले ही यह शक होता है कि कहीं वे ठीक तरह से सेक्स कर भी पाएंगे या नहीं। कहीं पेनिस धोखा न दे जाए। मन में ऐसी शंकाएं भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह बनती हैं। इसी डर की वजह से लॉन्ग-टर्म में व्यक्ति सेक्स से मन चुराने लगता है और उसकी इच्छा में कमी आने लगती है।

- डॉ० बी० के ० कश्यप का मानना है कि 80 फीसदी मामलों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह शारीरिक होती है, बाकी 20 फीसदी मामले ऐसे होते हैं जिनमें इसके लिए मानसिक कारण जिम्मेदार होते हैं।

ट्रीटमेंट
पहले इस समस्या को आहार-विहार और  योग  ( पंचकर्म )काराने से ठीक करने की कोशिश की जाती है, लेकिन जब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता तो कोई भी ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर समस्या की असली वजह का पता लगाते हैं। इसके लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। वजह के अनुसार आमतौर पर इलाज के तरीके ये हैं:

1. हॉर्मोन थेरपी : अगर इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह हॉर्मोन की कमी है तो हॉर्मोन थेरपी की मदद से इसे दो से तीन महीने के अंदर ठीक कर दिया जाता है। इस ट्रीटमेंट का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।

2. ब्लड सप्लाई : जब कभी पेनिस में आर्टरीज की ब्लॉकेज की वजह से ब्लड सप्लाई में कमी आती है, तो (आयुर्वेद दवाओं) की मदद से इस ब्लॉकेज को खत्म किया जाता है। इससे पेनिस में ब्लड की सप्लाई बढ़ जाती है और उसमें तनाव आने लगता है।

3. सेक्स थेरपी : कई मामलों में समस्या शारीरिक न होकर दिमाग में होती है। ऐसे मामलों में सेक्स थेरपी की मदद से मरीज को सेक्स संबंधी विस्तृत जानकारी दी जाती है, जिससे वह अपने तरीकों में सुधार करके इस समस्या से बच सकता है।
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सम्बन्ध बनाने के दौरान दर्द क्यूँ होता है

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